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Tara Coal Block Controversy: “तारा कोल ब्लॉक की नीलामी कब होगी रद्द?” अडानी के हितों को लेकर दीपक बैज का साय सरकार पर बड़ा हमला

Tara Coal Block Controversy: छत्तीसगढ़ में हसदेव अरण्य और तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर राजनीतिक घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार से तीखा सवाल पूछते हुए कहा है कि सरकार यह स्पष्ट करे कि तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को आखिरकार कब रद्द […]

तारा कोल ब्लॉक 5000 एकड़ में फैला है, जहां 10 लाख से अधिक पेड़ काटे जाने की बात कही जा रही है।
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Tara Coal Block Controversy: छत्तीसगढ़ में हसदेव अरण्य और तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर राजनीतिक घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार से तीखा सवाल पूछते हुए कहा है कि सरकार यह स्पष्ट करे कि तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को आखिरकार कब रद्द किया जाएगा।

कांग्रेस का आरोप है कि इस मामले में सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाना इस बात का प्रमाण है कि सत्ता में बैठे लोग कॉर्पोरेट घरानों के हितों से समझौता करने से पीछे नहीं हटेंगे।

5000 एकड़ क्षेत्र में फैला है तारा कोल ब्लॉक, कटेंगे 10 लाख पेड़

दीपक बैज ने आंकड़ों के हवाले से बताया कि तारा कोल ब्लॉक लगभग 5000 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें से 4000 एकड़ से अधिक का हिस्सा बेहद घना जंगल है। इस परियोजना के आगे बढ़ने से लगभग 10 लाख से अधिक पेड़ों को पूरी तरह से काट दिए जाने की आशंका है। इसके अलावा, लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास होने वाले खनन से राष्ट्रीय धरोहर पशु हाथियों के पारंपरिक आवाजाही के रास्ते गंभीर रूप से प्रभावित होंगे, जिससे वन्यजीवों पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।

पूर्ववर्ती कांग्रेस और मौजूदा भाजपा सरकार के पत्रों पर सियासी तकरार

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि हसदेव अरण्य क्षेत्र के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए वर्तमान साय सरकार ने ही 11 दिसंबर 2025 को कोयला मंत्रालय को पत्र लिखकर अनुशंसा की थी। इसके विपरीत, उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस की भूपेश सरकार ने 23 जून 2023 को तारा सहित 9 कोल ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया से बाहर रखने के लिए केंद्र को पत्र लिखा था। कांग्रेस का कहना है कि जिस सरकार ने खुद नीलामी की सिफारिश की हो, वह इसे रद्द करेगी, इस पर जनता को बिल्कुल भरोसा नहीं है।

‘छत्तीसगढ़ को अडानीगढ़ बनाने में जुटी है सरकार’

दीपक बैज ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार छत्तीसगढ़ को ‘अडानीगढ़’ बनाने पर तुली हुई है। सरकार की कथित अडानी-परस्त नीतियों की वजह से हसदेव अरण्य के अमूल्य और प्राचीन जंगलों पर अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है। सरगुजा रेंज के केते एक्सटेंशन की खदानों की खुदाई और अन्य औपचारिकताएं केवल चुनिंदा व्यावसायिक घरानों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए तेजी से पूरी की जा रही हैं, जिससे स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

रामगढ़ की पहाड़ियों और ऐतिहासिक धरोहरों पर मंडराता खतरा

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी चिंता जताई कि इन खनन परियोजनाओं के कारण केवल जंगल ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थल भी खतरे में पड़ रहे हैं। रामगढ़ की पहाड़ियां, प्राचीन नाट्यशाला, सीता गुफा, जानकी रसोई और प्रभु श्री राम के वनगमन पथ की पावन स्मृतियों वाले क्षेत्रों को कॉपर और कोल खनन के नाम पर संकट में डाला जा रहा है। सरकार के इन फैसलों से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को भी गहरा आघात पहुंच रहा है, जिसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है।

केते एक्सटेंशन परियोजना और 7 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई

राज्य सरकार द्वारा केते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल माइनिंग और पिट हेड कोल वॉशरी परियोजना के लिए 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वन उपयोग में बदलने की अनुमति दी जा चुकी है। राज्य की स्वीकृति मिलने के बाद यह प्रस्ताव केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया, जहां से हरी झंडी मिलने के बाद अब 7 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है। सेंट्रल इंडिया के इस ‘लंग्स ज़ोन’ को उजाड़े जाने से पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है।

पांचवी अनुसूची क्षेत्र में आदिवासियों के अधिकारों की हो रही अनदेखी

यह पूरा विवादित क्षेत्र संविधान की पांचवी अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां स्थानीय आदिवासी समुदाय अपनी जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए लंबे समय से अहिंसक आंदोलन कर रहे हैं। कई ग्राम सभाओं द्वारा खनन के विरोध में प्रस्ताव भी पारित किए जा चुके हैं, इसके बावजूद प्रशासन और सरकार द्वारा जनता की आवाज़ को नजरअंदाज किया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों को कुचलकर किए जा रहे ये कार्य पूरी तरह से जनविरोधी हैं।

Shravan Sharma
लेखक / पत्रकार:

Shravan Sharma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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