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धान की फसल में बालियां आते ही कर लें ये जरूरी उपाय, दाना नहीं रहेगा खोखला

Paddy Grain Filling
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Paddy Farming Tips: खरीफ सीजन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर धान की फसल में बालियां निकलने का चरण शुरू हो चुका है, जो किसानों के लिए पैदावार के लिहाज से सबसे नाजुक समय माना जाता है। इस अवस्था में पौधे की पूरी शक्ति तने से निकलकर दानों के विकास में लगने लगती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस दौरान खेत में नमी, संतुलित पोषक तत्व और कीट-रोगों से सुरक्षा पर ध्यान न दिया गया, तो बालियों में दाने अधूरे, कमजोर या खाली रह सकते हैं। इसलिए किसानों को इस समय अपने खेतों की नियमित निगरानी करने और पोषण का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।

धान में दाना न भरने के पीछे कई कारण काम करते हैं, जिनमें मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी, अचानक तापमान में उतार-चढ़ाव और परागण के समय नमी का असंतुलन मुख्य हैं। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन के मुताबिक, बाली निकलने के बाद अगेती फसलों में यूरिया का इस्तेमाल बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। अत्यधिक नाइट्रोजन मिलने से पौधे की ऊर्जा दानों के बजाय पत्तियों की बढ़वार में खर्च होती है। इसके स्थान पर गोभ की स्थिति में 20 प्रतिशत बोरोन का 100 ग्राम प्रति एकड़ छिड़काव परागण क्रिया को बेहतर बनाता है।

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अब धान में यूरिया डालने की गलती न करें
बाली निकलने के बाद खासकर अगेती धान में जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन या यूरिया देने से बचना चाहिए। इस समय अतिरिक्त नाइट्रोजन मिलने पर पौधे की ऊर्जा पत्तियों और तने की बढ़वार में जा सकती है। इसका असर दाना बनने पर पड़ सकता है। अधिक यूरिया से फसल में कुछ कीट और रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है।

एक एकड़ में पोटाश की मात्रा का रखें ध्यान
जानकारी के अनुसार पोटाश के छिड़काव के लिए 1 किलोग्राम पोटाश को 150 से 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है। हालांकि किसान अपने क्षेत्र, मिट्टी और फसल की स्थिति के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। निर्धारित मात्रा से ज्यादा उर्वरक का इस्तेमाल करने से लाभ के बजाय नुकसान हो सकता है।

फूल आने से पहले बोरोन का इस्तेमाल
धान में दाने खाली रहने की समस्या के पीछे परागण से जुड़ी दिक्कत भी हो सकती है। बोरोन पौधे में फूल और परागण से जुड़ी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। दिए गए सुझाव में गोभ अवस्था के दौरान 20 प्रतिशत बोरोन की 100 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ इस्तेमाल करने की बात कही गई है। इसका प्रयोग फूल खिलने से पहले विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करना चाहिए।

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खेत को सूखने से बचाना सबसे जरूरी
बाली निकलने के बाद खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना बेहद जरूरी है। पानी की कमी होने पर दाने के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। दूसरी तरफ खेत में लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा पानी भरा रखना भी उचित नहीं है। किसान मिट्टी की स्थिति देखकर हल्की सिंचाई करें और दाना सख्त होने तक नमी का संतुलन बनाए रखें।

दूधिया अवस्था में गंधी बग पर नजर रखें
जब धान के दानों में दूध भरने लगता है, उस समय गंधी बग जैसे कीट फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ये कीट दानों का रस चूसते हैं, जिससे दाने कमजोर, खोखले या बदरंग हो सकते हैं। खेत में ऐसे कीट दिखाई देने पर तुरंत पहचान कर कृषि विशेषज्ञ से उचित नियंत्रण उपाय की जानकारी लेना चाहिए।

नेक ब्लास्ट से बचाने के लिए निगरानी जरूरी
बाली निकलने के आसपास नेक ब्लास्ट और कंडुआ जैसे रोग भी फसल को प्रभावित कर सकते हैं। रोग का असर होने पर बालियों के विकास और दाना बनने की प्रक्रिया को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए किसान खेत में नियमित निरीक्षण करें। शुरुआती लक्षण मिलने पर संबंधित रोग के लिए अनुशंसित फफूंदनाशी का इस्तेमाल कृषि विभाग या विशेषज्ञ की सलाह से करें।

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छिड़काव के समय भी रखें सावधानी
किसी भी उर्वरक या कृषि रसायन का छिड़काव करते समय मौसम और फसल की अवस्था का ध्यान रखना चाहिए। तेज धूप में स्प्रे करने से बचना बेहतर है और सुबह या शाम का समय सामान्यतः उपयुक्त रहता है। फूल आने के दौरान बिना जरूरत छिड़काव नहीं करना चाहिए। रसायन की मात्रा हमेशा उत्पाद के लेबल और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार रखें।

दाना भरने के समय की मेहनत तय करेगी उपज
धान की बाली निकलने के बाद किसान अगर खेत में नमी का संतुलन बनाए रखें, पोषण की कमी दूर करें और कीट-रोगों की समय पर पहचान करें तो फसल की गुणवत्ता बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। इस चरण में छोटी सी लापरवाही भी उपज पर असर डाल सकती है। इसलिए रोजाना खेत का निरीक्षण करना किसानों के लिए सबसे जरूरी कदमों में से एक है।