भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में से एक है। देश में पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा नहीं कर पाता, इसलिए उसे बड़ी मात्रा में कच्चा तेल विदेशों से आयात करना पड़ता है। मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है।
ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ा दी है। इसमें भारत भी शामिल है। जहां भविष्य में ईंधन की पूर्ती को लेकर दुविधाएं देखी जा रही है। जानकारों का मानना है कि यदि अभी अगर युद्ध की स्थिति सामान्य भी हो जाती है फिर भी भारत में ईंधन आयात करने में महीने से भी ज्यादा समय लग सकता है। आइये जानते है ऐसा आखिर क्यों-
यह प्रक्रिया कई चरणों से गुजरती है और इसमें आम तौर पर 20 से 35 दिन तक का समय लग सकता है।
सबसे पहला चरण होता है कच्चे तेल की खरीद का। भारत की प्रमुख तेल कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल की खरीद करती हैं। इसके लिए तेल उत्पादक देशों और कंपनियों के साथ पहले से दीर्घकालिक या अल्पकालिक अनुबंध किए जाते हैं। कच्चे तेल की कीमत आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय मानक Brent Crude या अन्य वैश्विक बेंचमार्क के आधार पर तय होती है।
समंदर से पेट्रोल पंप तक: 35 दिनों का लंबा सफर
भारत जिन देशों से सबसे ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है उनमें Saudi Arabia, Iraq, Russia और United Arab Emirates प्रमुख हैं। इन देशों के समुद्री बंदरगाहों से विशाल ऑयल टैंकर जहाजों में कच्चा तेल लोड किया जाता है। एक बड़े टैंकर में लाखों बैरल तेल एक साथ ले जाया जा सकता है।
तेल से भरे ये जहाज समुद्री मार्ग से भारत की ओर रवाना होते हैं। ज्यादातर जहाज Arabian Sea के रास्ते भारतीय तट तक पहुंचते हैं। दूरी के हिसाब से यात्रा का समय अलग-अलग होता है। मध्य-पूर्व के देशों से भारत तक जहाज को पहुंचने में सामान्यतः 10 से 15 दिन लगते हैं, जबकि रूस या अन्य दूर के क्षेत्रों से आने वाले जहाजों को 25 से 35 दिन तक लग सकते हैं।
भारत पहुंचने के बाद तेल सीधे उपयोग में नहीं आ जाता। सबसे पहले जहाज भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचते हैं, जहां से तेल उतारा जाता है। प्रमुख बंदरगाहों में Jawaharlal Nehru Port, Paradip Port और Kandla Port शामिल हैं। यहां कस्टम क्लियरेंस, सुरक्षा जांच और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया पूरी की जाती है। यह प्रक्रिया आम तौर पर 1 से 3 दिनों में पूरी हो जाती है।
इसके बाद कच्चे तेल को पाइपलाइन, टैंकर या विशेष परिवहन व्यवस्था के जरिए देश की रिफाइनरियों तक पहुंचाया जाता है। रिफाइनरी में कच्चे तेल को विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजारकर पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, एटीएफ और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में बदला जाता है। भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में Jamnagar Refinery का नाम प्रमुख है, जो दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी परिसरों में गिनी जाती है।
रिफाइनिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तैयार ईंधन को देशभर में भेजा जाता है। इसके लिए पाइपलाइन नेटवर्क, रेलवे टैंकर और सड़क मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद ही पेट्रोल और डीजल देश के पेट्रोल पंपों तक पहुंचते हैं और आम लोगों के उपयोग के लिए उपलब्ध होते हैं।
इस पूरी प्रक्रिया को देखें तो विदेश से कच्चा तेल खरीदने से लेकर उसे पेट्रोल पंप तक पहुंचाने में कई चरण शामिल होते हैं। सामान्य परिस्थितियों में यह प्रक्रिया 20 से 35 दिनों के बीच पूरी हो जाती है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय हालात, समुद्री मार्ग की स्थिति, बंदरगाहों की क्षमता और अन्य लॉजिस्टिक कारणों से इसमें बदलाव भी हो सकता है।
डिस्क्लेमर : यह आर्टिकल इंटरनेट पर मिली जानकारी पर आधारित है। टीआरपी इसकी पुष्टि नहीं करता।


