Non Trade Cement Price Hike: छत्तीसगढ़ में सीमेंट के दाम बढ़ने के बाद निर्माण क्षेत्र में इसकी चर्चा तेज हो गई है। मानसून समाप्त होने से ठीक पहले कंपनियों ने नॉन ट्रेड सीमेंट की कीमत में दो चरणों में कुल 60 रुपये की बढ़ोतरी की है। अब खुले बाजार में मिलने वाले सीमेंट के दाम भी बढ़ने की तैयारी की खबरों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नॉन ट्रेड सीमेंट क्या होता है और इसका इस्तेमाल कहां किया जाता है?
नॉन ट्रेड सीमेंट ऐसा सीमेंट है जिसकी बिक्री आम खुदरा बाजार में सामान्य ग्राहकों को सीधे करने के बजाय बड़े निर्माण कार्यों, संस्थागत खरीदारों और परियोजनाओं के लिए की जाती है। इसे अक्सर बड़े ठेकेदारों, निर्माण एजेंसियों और सरकारी परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराया जाता है। इसकी कीमत और आपूर्ति का ढांचा सामान्य बाजार में बिकने वाले सीमेंट से अलग हो सकता है।
ट्रेड सीमेंट से कैसे अलग है नॉन ट्रेड?
ट्रेड सीमेंट वह है जो आमतौर पर दुकानों और डीलरों के माध्यम से खुले बाजार में ग्राहकों को बेचा जाता है। कोई व्यक्ति घर बनाने के लिए सीमेंट खरीदता है तो सामान्य तौर पर उसे ट्रेड चैनल से ही सीमेंट मिलता है। इसके विपरीत नॉन ट्रेड सीमेंट बड़े निर्माण कार्यों और संस्थागत जरूरतों में इस्तेमाल होने के कारण अलग आपूर्ति व्यवस्था के जरिए खरीदा जाता है।
सरकारी योजनाओं में क्यों महत्वपूर्ण है नॉन ट्रेड सीमेंट?
सरकारी निर्माण परियोजनाओं में सीमेंट की खपत काफी ज्यादा होती है। सड़क, पुल, सरकारी भवन, अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और दूसरी आधारभूत संरचनाओं के निर्माण में बड़ी मात्रा में सीमेंट की आवश्यकता होती है। ऐसे कामों में सीमेंट की कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी भी पूरी परियोजना की लागत पर बड़ा असर डाल सकती है।
60 रुपये की बढ़ोतरी ने बढ़ाई चिंता
छत्तीसगढ़ में नॉन ट्रेड सीमेंट के दाम दो बार में कुल 60 रुपये बढ़ाए जाने की बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार पहले 24 अगस्त को कीमत में 40 रुपये की बढ़ोतरी की गई और इसके बाद 20 रुपये की और वृद्धि हुई। निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे पहले से स्वीकृत परियोजनाओं की लागत पर भी दबाव बढ़ सकता है।
बारिश के बीच दाम बढ़ने पर उठ रहे सवाल
सीमेंट की मांग आम तौर पर बारिश के दौरान प्रभावित होती है क्योंकि कई निर्माण कार्य धीमे या अस्थायी रूप से बंद रहते हैं। इसके बावजूद नॉन ट्रेड सीमेंट के दाम बढ़ने से निर्माण क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि मानसून खत्म होने के बाद निर्माण गतिविधियां बढ़ने वाली हैं और उसी समय बढ़ी कीमतों का असर ज्यादा दिखाई देगा।
खुले बाजार का सीमेंट भी हो सकता है महंगा
नॉन ट्रेड सीमेंट के बाद अब खुले बाजार में मिलने वाले सीमेंट की कीमतों में भी बढ़ोतरी की तैयारी की बात सामने आ रही है। फिलहाल थोक बाजार में सीमेंट करीब 230 से 290 रुपये और खुदरा बाजार में करीब 260 से 300 रुपये के बीच मिलने की जानकारी दी गई है। कीमत बढ़ने पर निजी निर्माण करने वाले लोगों का बजट भी प्रभावित होगा।
ओपीसी और पीपीसी सीमेंट में क्या अंतर है?
निर्माण कार्यों में सीमेंट के अलग-अलग प्रकार इस्तेमाल किए जाते हैं। पीपीसी सीमेंट में फ्लाईऐश मिलाया जाता है, जबकि ओपीसी सीमेंट में फ्लाईऐश का इस्तेमाल नहीं होता। ओपीसी का उपयोग कई ऐसे निर्माण कार्यों में किया जाता है जहां जल्दी मजबूती हासिल करना महत्वपूर्ण होता है। बड़े भवन, पुल और फ्लाईओवर जैसे निर्माण में इसकी जरूरत पड़ सकती है।
ओपीसी सीमेंट के दाम भी बढ़े
जानकारी के अनुसार ओपीसी सीमेंट की कीमत पहले करीब 270 रुपये बताई गई थी, जिसे बढ़ाकर 360 रुपये तक किए जाने की बात सामने आई है। यानी इसमें करीब 90 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इतनी बड़ी वृद्धि का असर उन निर्माण परियोजनाओं पर पड़ सकता है जहां ओपीसी सीमेंट की आवश्यकता अधिक होती है।
दस हजार करोड़ से ज्यादा की योजनाओं पर असर
छत्तीसगढ़ में इस समय हजारों करोड़ रुपये की भवन और आधारभूत संरचना से जुड़ी परियोजनाएं चल रही हैं। बारिश के कारण कई काम फिलहाल धीमे हैं, लेकिन मानसून समाप्त होने के बाद निर्माण गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। ऐसे में सीमेंट की बढ़ी कीमतें परियोजनाओं की अनुमानित लागत और ठेकेदारों के खर्च दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।
ठेकेदारों के सामने बढ़ेगा लागत का दबाव
बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया की छत्तीसगढ़ शाखा के अध्यक्ष रूपेश सिंघल के अनुसार नॉन ट्रेड सीमेंट की कीमत में 60 रुपये की वृद्धि हुई है। उनके मुताबिक यह करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। उनका कहना है कि इससे सरकारी योजनाओं की लागत बढ़ेगी और निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
आम लोगों के लिए भी समझना जरूरी
नॉन ट्रेड सीमेंट का नाम सुनकर ऐसा लग सकता है कि इसका आम लोगों से कोई संबंध नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं है। सरकारी भवन, सड़क, पुल, अस्पताल और आवास जैसी परियोजनाओं की लागत बढ़ने पर इसका असर सरकारी बजट और भविष्य की परियोजनाओं पर पड़ सकता है। वहीं खुले बाजार में कीमत बढ़ने पर घर बनाने वाले लोगों का खर्च भी बढ़ सकता है।
अब आगे क्या होगा?
मानसून समाप्त होने के साथ छत्तीसगढ़ में निर्माण गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। ऐसे समय में यदि सीमेंट की कीमतें और बढ़ती हैं तो सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की निर्माण लागत पर दबाव बढ़ सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनियां आगे कीमतों में और बदलाव करती हैं या सरकार इस मुद्दे पर कोई हस्तक्षेप करती है।



