Raipur: छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तत्कालीन छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ विशेष पीएमएलए अदालत, रायपुर में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है। ईडी ने रायपुर स्थित उनकी दो अचल संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से अटैच किया है। इनकी कीमत करीब 9.06 करोड़ रुपए बताई गई है। अब ईडी ने कस्टम मिलिंग घोटाले में रामगोपाल को गिरफ्तार किया है। उन्हें 5 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया गया है।
ईडी के मुताबिक, शराब घोटाले की यह जांच रायपुर ईओडब्ल्यू-एसीबी द्वारा अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, कवासी लखमा और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी।
सिंडिकेट ने सरकारी दुकानों के जरिए बिकवाई शराब
जांच में ईडी ने दावा किया है कि 2019 से 2023 के दौरान एक शराब सिंडिकेट आबकारी विभाग और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) को नियंत्रित कर रहा था। एजेंसी के अनुसार, सिंडिकेट ने देशी शराब की आपूर्ति पर अवैध कमीशन, सरकारी दुकानों के जरिए डुप्लीकेट होलोग्राम लगी बिना हिसाब की शराब की बिक्री, डिस्टिलरों से सालाना कमीशन और विदेशी शराब के लिए एफएल-10ए लाइसेंस व्यवस्था के जरिए 2,883 करोड़ रुपए से अधिक की अपराध से अर्जित आय हासिल की।
ईडी की जांच के अनुसार, सिंडिकेट से जुटाई गई नकदी का एक बड़ा हिस्सा लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल के जरिए रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर शंकर नगर स्थित छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय राजीव भवन पहुंचाया जाता था। एजेंसी का आरोप है कि सिंडिकेट से जुड़े लोग यह नकदी राजीव भवन में रामगोपाल अग्रवाल के अधीन काम करने वाले अकाउंटेंट देवेंद्र दादसेना को सौंपते थे।
कितनी रकम पहुंची रामगोपाल के पास ?
जांच में करीब 860 से 880 करोड़ रुपए की नकदी इस माध्यम से पहुंचाए जाने का दावा किया गया है। ईडी के अनुसार, इसमें से करीब 72 करोड़ रुपए रामगोपाल अग्रवाल के नियंत्रण में रहे और उनके निर्देश पर रखे, इस्तेमाल या वितरित किए गए। एजेंसी ने कहा है कि सिंडिकेट के डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों से नकदी पहुंचाने की इस व्यवस्था और रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका की पुष्टि होती है।
अब तक 601.28 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच
ईडी ने रामगोपाल अग्रवाल की रायपुर के अनुपम नगर और कटोरा तालाब स्थित दो फ्लैटों को 9.06 करोड़ रुपए के बराबर मूल्य की संपत्ति के रूप में अस्थायी रूप से अटैच किया है।
ईडी के मुताबिक, इस मामले में पहले विशेष पीएमएलए अदालत, रायपुर में एक अभियोजन शिकायत और छह पूरक अभियोजन शिकायतें दाखिल की जा चुकी हैं। एजेंसी ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी और चैतन्य बघेल सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले में अब तक 601.28 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं। नई कार्रवाई के बाद यह राशि करीब 610.34 करोड़ रुपए हो गई है।
ईडी ने कहा है कि अपराध से अर्जित धन के अन्य लाभार्थियों की पहचान के लिए जांच जारी है। मामले में आगे की जांच भी जारी है।
कस्टम मिलिंग घोटाले में रामगोपाल अग्रवाल गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ के कस्टम राइस मिलिंग घोटाले मेंरामगोपाल अग्रवाल को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। ईडी की कार्रवाई के बाद विशेष पीएमएलए अदालत, रायपुर ने रामगोपाल अग्रवाल को 5 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।
राइस मिलर्स से 147 करोड़ रूपये की वसूली
ईडी के मुताबिक, यह मामला राइस मिलरों से अवैध रूप से करीब 147 करोड़ रुपए की वसूली से जुड़ा है। जांच आयकर विभाग द्वारा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दायर अभियोजन शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी। इसके बाद रायपुर एसीबी-ईओडब्ल्यू ने भी भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
ईडी की जांच के अनुसार, खरीफ सीजन 2021-22 में कस्टम राइस मिलिंग के लिए विशेष प्रोत्साहन राशि 40 रुपए से बढ़ाकर 120 रुपए प्रति क्विंटल की गई थी। इसके बाद छत्तीसगढ़ स्टेट राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों और मार्कफेड के अधिकारियों से जुड़े एक सिंडिकेट ने राइस मिलरों से प्रोत्साहन राशि जारी करने के बदले 20 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अवैध नकद वसूली शुरू की।
…तो रोक देते थे राइस मिलर्स का पेमेंट
ईडी का आरोप है कि जो राइस मिलर यह रकम देने से इनकार करते थे, उनके बिल जानबूझकर रोक दिए जाते थे। दिसंबर 2022 से जुलाई 2023 के बीच इस तरीके से करीब 147 करोड़ रुपए की अवैध वसूली की गई। एजेंसी ने इसे पीएमएलए के तहत अपराध से अर्जित आय माना है।
जांच में ईडी ने दावा किया है कि रामगोपाल अग्रवाल ने राइस मिलरों से अवैध नकद वसूली की व्यवस्था बनाने, उसकी निगरानी करने और उसे नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एजेंसी के अनुसार, राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के जरिए अवैध रकम वसूलने के निर्देश दिए जाते थे।
रौशन चंद्राकर के जरिये वसूली की जानकारी
अलग-अलग जिलों से वसूली गई रकम की जानकारी तत्कालीन एसोसिएशन कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर को दी जाती थी। ईडी के अनुसार, रोशन चंद्राकर नियमित रूप से जिलेवार वसूली का ब्योरा रामगोपाल अग्रवाल को सत्यापन के लिए देते थे। इसके बाद वसूली गई नकदी रामगोपाल अग्रवाल द्वारा बताए गए लोगों को पहुंचाई जाती थी।
जांच के दौरान ईडी ने रामगोपाल अग्रवाल को पूछताछ में सहयोग नहीं करने और अवैध वसूली से हासिल रकम के संग्रह, संचालन और इस्तेमाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया। इसके बाद अदालत ने उन्हें 5 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. रामगोपाल अग्रवाल पर ईडी ने क्या कार्रवाई की है?
Ans. ईडी ने शराब घोटाले में विशेष पीएमएलए अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है और 9.06 करोड़ की 2 अचल संपत्तियां (अनुपम नगर, कटोरा तालाब) अटैच की हैं। साथ ही कस्टम मिलिंग घोटाले में 9 अक्टूबर को गिरफ्तार कर 5 दिन की हिरासत में लिया है।
Q2. शराब घोटाले में उन पर क्या आरोप है?
Ans. ईडी के मुताबिक 2019-23 में सिंडिकेट ने 2,883 करोड़ से ज्यादा की अवैध कमाई की। इसमें से 860-880 करोड़ नकदी पप्पू बंसल के जरिए राजीव भवन में देवेंद्र दादसेना को पहुंचाई गई, जिसमें 72 करोड़ रामगोपाल के नियंत्रण में रहे। डिजिटल रिकॉर्ड और CDR से इसकी पुष्टि का दावा है।
Q3. कस्टम मिलिंग घोटाला क्या है और इसमें उनकी भूमिका क्या बताई गई?
Ans. आरोप है कि 2021-22 में प्रोत्साहन राशि 40 से 120 रुपए होने के बाद सिंडिकेट ने 20 रुपए प्रति क्विंटल अवैध वसूली शुरू की। दिसंबर 2022 से जुलाई 2023 के बीच 147 करोड़ वसूले गए। ईडी के अनुसार रामगोपाल ने वसूली की व्यवस्था बनाई, रोशन चंद्राकर जिलेवार ब्योरा उन्हें देते थे और नकदी उनके बताए लोगों को जाती थी।
Q4. अब तक इस मामले में कुल कितनी संपत्ति अटैच हुई है?
Ans. ईडी के मुताबिक पहले 601.28 करोड़ की संपत्तियां अटैच/फ्रीज हो चुकी थीं। नई 9.06 करोड़ की कार्रवाई के बाद कुल राशि करीब 610.34 करोड़ हो गई है। मामले में 9 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।



