Raipur 3D Mapping: राजधानी में अब प्रॉपर्टी टैक्स के लिए संपत्तियों का आकलन पुराने रिकॉर्ड के भरोसे नहीं रहेगा। रायपुर नगर निगम पूरे शहर में ड्रोन आधारित LiDAR सर्वे कराने जा रहा है। इसके तहत शहर की प्रत्येक संपत्ति की थ्रीडी डिजिटल मैपिंग की जाएगी। मकान और भवन के निर्मित क्षेत्रफल, मंजिलों की संख्या, भूखंड का आकार और संपत्ति के आवासीय या व्यावसायिक उपयोग की जानकारी डिजिटल डाटा के रूप में तैयार की जाएगी।
नगर निगम करीब 10 साल बाद प्रॉपर्टी री-असेसमेंट कराने की तैयारी में है। सर्वे का काम जिस एजेंसी को मिलेगा, उसे एक साल के भीतर पूरे शहर का सर्वे पूरा कर रिपोर्ट निगम को सौंपनी होगी।
चार एजेंसियों ने दिखाई रुचि, जल्द खुलेगी फाइनेंशियल बीड
नगर निगम की ओर से हाल ही में LiDAR सर्वे के लिए ऑनलाइन टेंडर जारी किया गया था। इसमें चार एजेंसियों ने निविदा दाखिल की है। इनमें दिल्ली की दो, अमरावती की एक और हैदराबाद की एक एजेंसी शामिल है। निविदा की अंतिम तिथि के बाद निगम मुख्यालय में चारों एजेंसियों के दस्तावेजों का 12 बिंदुओं पर तकनीकी परीक्षण किया गया। तकनीकी जांच के बाद अब फाइनेंशियल बीड खोली जाएगी। इसमें सबसे कम दर की पेशकश करने वाली पात्र एजेंसी को सर्वे का वर्क ऑर्डर दिया जाएगा।
ड्रोन से होगी पूरे शहर की थ्रीडी मैपिंग
LiDAR सर्वे आधुनिक तकनीक पर आधारित होगा। ड्रोन के जरिए शहर की आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के साथ-साथ खाली भूखंडों का भी डिजिटल सर्वे किया जाएगा। इससे प्रत्येक संपत्ति का थ्रीडी डाटा तैयार होगा। इसमें भवन का कुल निर्मित क्षेत्रफल, कितनी मंजिलें हैं और उसका वास्तविक उपयोग क्या है, जैसी जानकारियां दर्ज होंगी। तैयार डाटा का नगर निगम के मौजूदा रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा।
टैक्स रिकॉर्ड से होगा डाटा का मिलान
सर्वे से तैयार थ्रीडी डाटा को निगम के मौजूदा प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड से मिलाने की योजना है। इसके लिए स्वचालित सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे रिकॉर्ड में दर्ज संपत्ति और मौके पर मौजूद वास्तविक निर्माण के बीच अंतर की पहचान की जा सकेगी।
आवासीय मकान का कमर्शियल इस्तेमाल मिला तो बदलेगा टैक्स
स्पॉट वैरिफिकेशन के दौरान यदि किसी संपत्ति का निर्मित क्षेत्र रिकॉर्ड से अधिक पाया जाता है या आवासीय संपत्ति का उपयोग व्यावसायिक गतिविधि के लिए होता मिला, तो संबंधित संपत्तिधारक को संशोधित टैक्स दर के आधार पर डिमांड नोट भेजा जा सकता है। हालांकि नोटिस जारी होने के बाद संपत्तिधारक को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। उसे 15 से 30 दिन तक का समय मिल सकेगा। इस अवधि में संपत्तिधारक स्वीकृत नक्शा, रजिस्ट्री की कॉपी और अन्य संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर सकता है।
बढ़े टैक्स पर आपत्ति का भी मिलेगा मौका
यदि किसी संपत्तिधारक को सर्वे के आधार पर बढ़ाए गए क्षेत्रफल या संशोधित टैक्स दर पर आपत्ति है, तो वह संबंधित जोन कार्यालय में दस्तावेजों के साथ दावा पेश कर सकेगा। नगर निगम के राजस्व अधिकारी आपत्ति की जांच करेंगे और आवश्यक होने पर रिकॉर्ड में सुधार भी किया जाएगा।
12 महीने में पूरा करना होगा सर्वे
LiDAR सर्वे के लिए नगर निगम ने करीब 6 करोड़ रुपए का अनुमानित बजट रखा है। चयनित एजेंसी को अनुबंध के बाद 12 महीने के भीतर पूरे रायपुर शहर का थ्रीडी मैपिंग आधारित सर्वे पूरा करना होगा।



