टीआरपी डेस्क। आने वाले कुछ दिन पूरी दुनिया के लिए भारी पड़ने वाले हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 2 अप्रैल से मीन राशि में ग्रहों का एक ऐसा जाल बुना गया है, जिसने वैज्ञानिकों और ज्योतिषियों दोनों की नींद उड़ा दी है। बता दें कि मीन राशि में मंगल, शनि और सूर्य जैसे उग्र ग्रहों का मिलन हो रहा है, जिसे द्वंद्व योग कहा जाता है।

30 साल पुराना वो खौफनाक मंजर

गौरतलब है कि ठीक ऐसा ही संयोग साल 1996 में बना था। उस वक्त दुनिया ने कई बड़ी तबाही देखी थी। 1996 में इसी युति के दौरान न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड के पास एक विमान में जोरदार धमाका हुआ था, जिसमें 230 मासूमों की जान चली गई थी।

साओ पाउलो के एक शॉपिंग सेंटर में भी भीषण दुर्घटना घटी थी। अब ठीक 30 साल बाद अप्रैल 2026 में वही ग्रह फिर से एक साथ आए हैं, जो किसी बड़ी अनहोनी का संकेत दे रहे हैं।

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अमेरिका-इजराइल और ईरान: क्या शुरू होगा तीसरा विश्व युद्ध?

मंगल को युद्ध का कारक माना जाता है। 23 फरवरी को जब मंगल ने कुंभ राशि में प्रवेश किया, तभी से वैश्विक राजनीति में आग लगी हुई है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर भीषण हमला किया, जिसमें वहां के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित 40 बड़े अफसर मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिका-इजराइल को भारी नुकसान पहुंचाया है। अभी 29 मार्च को ही अमेरिका के कई शहरों में डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

14 अप्रैल तक का समय सबसे घातक

ज्योतिष गणना के अनुसार, मीन राशि (जल तत्व) में शनि और मंगल का मिलना मानसिक अशांति और जनविद्रोह का कारण बनता है। मीन राशि जल का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए बड़े समुद्री तूफान या सुनामी जैसी आपदाओं की संभावना बढ़ गई है। 14 अप्रैल तक सूर्य भी इसी युति का हिस्सा रहेंगे, जिससे हिंसा और आगजनी की घटनाएं बढ़ सकती हैं। मंगल 11 मई तक मीन राशि में रहेंगे, यानी तब तक शनि-मंगल की यह खतरनाक जोड़ी सक्रिय रहेगी।

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देश-दुनिया पर असर

दरअसल, जब भी अनुशासन के देवता (शनि) और अग्नि के देवता (मंगल) एक साथ आते हैं, तो सत्ता परिवर्तन और आंदोलनों का दौर शुरू हो जाता है। वर्तमान में चल रही युद्ध की स्थितियां और भयानक मोड़ ले सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 14 अप्रैल के बाद जब सूर्य मेष राशि में जाएंगे, तब कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन तब तक पूरी दुनिया को बेहद सावधान रहने की जरूरत है।