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Chhath Puja में क्यों सजाया जाता है गन्ने का मंडप और मिट्टी का हाथी? जानिए मन्नत पूरी होने पर कैसे करते हैं कोसी भरने की रस्म

Women performing Kosi Bharna ritual during Chhath Puja with sugarcane mandap and clay elephant
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • Chhath Puja 2026: छठ पूजा का चार दिवसीय महापर्व 13 नवंबर से शुरू होकर 16 नवंबर तक चलेगा।
  • इस दौरान नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य की परंपराएं निभाई जाएंगी।
  • इन्हीं रस्मों में एक खास परंपरा कोसी भरने की भी है।
  • छठ के तीसरे दिन यानी संध्या अर्घ्य के अवसर पर महिलाएं गन्ने का मंडप बनाकर उसमें मिट्टी का हाथी, दीपक और प्रसाद सजाती हैं।

Chhath Puja 2026: छठ पूजा का चार दिवसीय महापर्व 13 नवंबर से शुरू होकर 16 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य की परंपराएं निभाई जाएंगी। इन्हीं रस्मों में एक खास परंपरा कोसी भरने की भी है।

छठ के तीसरे दिन यानी संध्या अर्घ्य के अवसर पर महिलाएं गन्ने का मंडप बनाकर उसमें मिट्टी का हाथी, दीपक और प्रसाद सजाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मन्नत पूरी होने पर छठी मैया और भगवान सूर्य के प्रति आभार जताने के लिए यह पूजा की जाती है।

क्या होती है छठ पूजा में कोसी भरने की परंपरा?

कोसी भरना छठ महापर्व की एक विशेष धार्मिक परंपरा है। इसे मुख्य रूप से संतान प्राप्ति, बच्चों की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि जब किसी भक्त की मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वह छठी मैया के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए कोसी पूजा करता है। इस रस्म में गन्ने के सहारे एक मंडप तैयार किया जाता है। इसमें दीपक, मिट्टी का हाथी और छठ पूजा में चढ़ाए जाने वाले प्रसाद व फल रखे जाते हैं। इसे कई जगह कोसी भरना या कोसी सेवना भी कहा जाता है।

गन्ने का मंडप और मिट्टी का हाथी क्यों होता है खास?

  • गन्ने का मंडप: कोसी बनाने के लिए 4, 5, 7 या 11 गन्नों को एक साथ बांधकर मंडप तैयार किया जाता है। इसे मंदिर और यज्ञ के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
  • मिट्टी का हाथी: मंडप के बीच मिट्टी का हाथी रखा जाता है। इसे शक्ति, शुभता और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
  • दीपक: मिट्टी के हाथी पर बने दीपकों को जलाया जाता है। पूजा के दौरान इनकी रोशनी का विशेष महत्व होता है।
  • प्रसाद और फल: कोसी में ठेकुआ, चावल के लड्डू, केला, नारियल, गन्ना और मौसमी फल रखे जाते हैं।

कब और कैसे की जाती है कोसी पूजा?

कोसी भरने की परंपरा छठ पूजा के संध्या अर्घ्य वाले दिन निभाई जाती है।

  1. संध्या अर्घ्य के दिन सजावट: 15 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर में कोसी सजाई जाती है।
  2. गन्ने का मंडप तैयार करना: गन्नों को बांधकर मंडप बनाया जाता है। इसके बीच मिट्टी का हाथी और पूजा सामग्री रखी जाती है।
  3. दीपक जलाना और जागरण: रातभर कोसी के पास दीपक जलाए जाते हैं। महिलाएं छठी मैया के पारंपरिक लोकगीत गाती हैं और जागरण करती हैं। इसे कोसी सेवना कहा जाता है।
  4. उगते सूर्य को अर्घ्य: 16 नवंबर को सप्तमी तिथि पर उगते सूर्य को अर्घ्य देने के समय कोसी को घाट पर ले जाया जाता है।
  5. पूजा और विसर्जन: पूजा-अर्चना के बाद मिट्टी के हाथी को पवित्र नदी या जल में विसर्जित किया जाता है।

कोसी भरते समय इन गलतियों से बचें

छठ पूजा में शुद्धता और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। कोसी भरते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।

  • पूजा स्थल पर गंदगी न रखें।
  • टूटे हुए गन्ने का इस्तेमाल न करें।
  • खंडित कलश पूजा में न रखें।
  • रातभर दीपक जलते रहने का ध्यान रखें।
  • पूजा में साफ और बिना दाग वाले फल ही चढ़ाएं।

छठ पूजा 2026 की चारों तिथियां

वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में छठ महापर्व 13 नवंबर से शुरू होकर 16 नवंबर तक मनाया जाएगा।

तारीखपर्व और परंपरा
13 नवंबर 2026नहाय-खाय
14 नवंबर 2026खरना
15 नवंबर 2026संध्या अर्घ्य
16 नवंबर 2026उषा अर्घ्य
Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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