टीआरपी डेस्क। भारत में 2 अक्टूबर को दशहरा या विजयादशमी बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। यह पर्व अश्विन मास की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को आता है और भगवान श्रीराम द्वारा रावण का वध कर धर्म की स्थापना का प्रतीक माना जाता है। दशहरा अच्छाई की जीत और बुराई के अंत का प्रतीक है।

दशहरे का तिथि और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की दशमी तिथि 1 अक्टूबर शाम 7:01 बजे से शुरू होकर 2 अक्टूबर शाम 7:10 बजे तक रहेगी। यही दिन दशहरा मनाने के लिए शुभ है।

  • अस्त्र-शस्त्र पूजा मुहूर्त: दोपहर 1:21 बजे से 3:44 बजे तक (अवधि: 2 घंटे 22 मिनट)
  • पूजन मुहूर्त: दोपहर 2:09 बजे से 2:56 बजे तक (अवधि: 47 मिनट)
  • वाहन खरीद मुहूर्त: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 1:39 बजे तक

रावण दहन का शुभ मुहूर्त

दशहरे के दिन रावण दहन हमेशा प्रदोष काल में किया जाता है, जो सूर्यास्त के बाद शुरू होता है। इस बार सूर्यास्त शाम 6:05 बजे होगा और इसके बाद ही रावण का दहन किया जाएगा।

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दशहरे के दिन किए जाने वाले शुभ कार्य

मान्यता है कि दशहरा नए कार्यों की शुरुआत, बच्चों की पढ़ाई, व्यवसाय या घर में समृद्धि लाने के लिए विशेष रूप से शुभ होता है। यह दिन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता की राह खोलने वाला माना जाता है।

पूजा-अर्चना का महत्व

दशहरे पर केवल रावण दहन ही नहीं, बल्कि पूजा-अर्चना भी विशेष महत्व रखती है। इस दिन मां दुर्गा, भगवान श्रीराम और शस्त्रों की पूजा की जाती है। प्रातःकाल स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा की तैयारी होती है। सबसे पहले भगवान और मां दुर्गा का स्मरण कर संकल्प लिया जाता है, फिर उन्हें फूल, फल, धूप-दीप और प्रसाद अर्पित किया जाता है।

शस्त्र पूजन और रामलीला

दशहरे पर शस्त्र पूजन या आयुध पूजन भी किया जाता है। परंपराओं के अनुसार, योद्धा अपने शस्त्रों की पूजा करके युद्ध में विजय की कामना करते थे। कई स्थानों पर दशहरे की शाम को रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन करने से पहले राम दरबार की विशेष पूजा और आरती की जाती है।

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दशहरा का यह पर्व हमें अच्छाई की शक्ति और बुराई पर विजय का संदेश देता है, साथ ही जीवन में सकारात्मकता और धार्मिक आस्था बनाए रखने का अवसर प्रदान करता है।