Pitru Paksha 2026 Vastu Tips: वैदिक पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष 26 सितंबर 2026 से शुरू हो चुका है और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा। इस अवधि में पितरों के श्राद्ध, तर्पण और स्मरण की परंपरा है।
वहीं वास्तु शास्त्र से जुड़ी मान्यताओं में पितृ पक्ष के दौरान घर की साफ-सफाई और कुछ विशेष बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। दक्षिण दिशा में कबाड़ रखना, पितरों की तस्वीर गलत दिशा में लगाना और घर में कलह करना ऐसी ही गलतियों में शामिल माना गया है।
दक्षिण दिशा में न रखें कबाड़
वास्तु शास्त्र में घर की दक्षिण दिशा को यमराज और पितरों से संबंधित दिशा माना गया है। इसलिए पितृ पक्ष के दौरान इस हिस्से में कूड़ा, कबाड़ या भारी सामान नहीं रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि दक्षिण दिशा में गंदगी या अव्यवस्था होने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। इसलिए इस अवधि में दक्षिण दिशा को साफ और व्यवस्थित रखने की बात कही गई है।
पितरों की तस्वीर लगाने की भी दिशा
पितृ पक्ष में घर में पूर्वजों की तस्वीर लगाने को लेकर भी वास्तु के कुछ नियम बताए गए हैं। मान्यता के अनुसार पितरों की तस्वीर उत्तर, पूर्व या ईशान कोण में नहीं लगानी चाहिए। वास्तु के अनुसार पितरों की तस्वीर दक्षिण दीवार पर लगाना उचित माना जाता है। इस तरह तस्वीर का मुख उत्तर दिशा की ओर रहता है। गलत दिशा में तस्वीर लगाने को वास्तु दोष से जोड़कर देखा जाता है।
घर में कलह और बुजुर्गों का अपमान न करें
पितृ पक्ष के दौरान घर के माहौल को शांत रखने की सलाह दी जाती है। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में इस अवधि में झगड़े और बड़े-बुजुर्गों के अपमान को उचित नहीं माना गया है। ऐसा माना जाता है कि घर में लगातार विवाद होने से अशांति का वातावरण बनता है। इसलिए पितृ पक्ष में परिवार के सदस्यों के साथ सम्मान और शांतिपूर्ण व्यवहार रखने पर जोर दिया जाता है।
मुख्य द्वार की सफाई का रखें ध्यान
पितृ पक्ष के दौरान घर के मुख्य द्वार की साफ-सफाई को भी महत्वपूर्ण माना गया है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार मुख्य द्वार से सकारात्मक ऊर्जा और मां लक्ष्मी का आगमन होता है। मान्यता है कि मुख्य द्वार पर गंदगी और अव्यवस्था रहने से घर में सकारात्मक माहौल प्रभावित हो सकता है। इसलिए पितृ पक्ष में प्रवेश द्वार को साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है।
10 अक्टूबर को होगा पितृ पक्ष का समापन
पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से हो चुकी है। इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। इस अवधि में पितरों के श्राद्ध और तर्पण की परंपरा निभाई जाती है।
नोटः पितृ पक्ष से जुड़े वास्तु नियम धार्मिक और वास्तु संबंधी मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं में इनके बारे में मत अलग हो सकते हैं।



