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Somvati Amavasya 2026: साल की अंतिम सोमवती अमावस्या कब? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ चौघड़िया मुहूर्त और धार्मिक महत्व

कार्तिक सोमवती अमावस्या 2026: साल का अंतिम और अत्यंत पवित्र संयोग
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • Somvati Amavasya 2026: हिंदू पंचांग और सनातन धर्म में कार्तिक मास की अमावस्या का बहुत ही विशेष और पवित्र महत्व बताया गया है।
  • कार्तिक का संपूर्ण महीना भगवान विष्णु की आराधना और पुण्य अर्जन के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
  • इस दौरान भगवान विष्णु लंबी योगनिद्रा से जागते हैं और पृथ्वी पर सभी शुभ व मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होता है।
  • इस साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 9 नवंबर 2026 सोमवार के दिन पड़ने के कारण यह सोमवती अमावस्या कहलाएगी।

Somvati Amavasya 2026: हिंदू पंचांग और सनातन धर्म में कार्तिक मास की अमावस्या का बहुत ही विशेष और पवित्र महत्व बताया गया है। कार्तिक का संपूर्ण महीना भगवान विष्णु की आराधना और पुण्य अर्जन के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु लंबी योगनिद्रा से जागते हैं और पृथ्वी पर सभी शुभ व मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होता है। इस साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 9 नवंबर 2026 सोमवार के दिन पड़ने के कारण यह सोमवती अमावस्या कहलाएगी।

साल 2026 की यह अंतिम सोमवती अमावस्या होगी, इसलिए धार्मिक दृष्टिकोण से इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान, सामर्थ्य अनुसार दान और भक्तिभाव से पूजन करने से साधक को जीवन में अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और हर प्रकार के कष्टों का निवारण होता है।

सोमवती अमावस्या 2026 की सही तारीख और तिथि समय

अमावस्या तिथि के प्रारंभ और समापन को लेकर पंचांगीय गणनाओं के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का आरंभ 8 नवंबर 2026, रविवार को सुबह 11 बजकर 29 मिनट पर होगा। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 9 नवंबर 2026, सोमवार को दोपहर में 12 बजकर 32 मिनट पर होगा।

शास्त्रों के अनुसार सनातन परंपरा में उदया तिथि की मान्यता सर्वोपरि होती है। 9 नवंबर को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी, इसलिए सोमवती अमावस्या का पर्व, स्नान-दान और व्रत पूजन 9 नवंबर 2026, सोमवार को ही मनाना शास्त्र सम्मत और फलदायी रहेगा।

लक्ष्मीनारायण के साथ-साथ भगवान शिव की मिलेगी विशेष कृपा

सोमवती अमावस्या के इस दुर्लभ योग में पूजन करने से त्रिदेवों और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है। कार्तिक का महीना भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को अति प्रिय है, वहीं सोमवार का दिन देवाधिदेव महादेव यानी भगवान शिव को समर्पित होता है।

इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत एवं पूजन करने से साधक पर लक्ष्मीनारायण के साथ-साथ भगवान भोलेनाथ की भी असीम अनुकंपा बरसती है। जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में है या पितृदोष की समस्या है, उनके लिए इस दिन किया गया जप, तप और दान विशेष फलदायी सिद्ध होता है।

सोमवती अमावस्या पर स्नान-दान के लिए चौघड़िया शुभ मुहूर्त

9 नवंबर को सोमवती अमावस्या के दिन स्नान, दान और पूजा-अर्चना के लिए चौघड़िया के अनुसार शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। प्रातः काल के इन शुभ समयों में पूजा-पाठ करना अत्यंत श्रेयस्कर माना जाता है:

सूर्योदय का समय: सुबह 6 बजकर 38 मिनट पर

अमृत चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 38 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 00 मिनट तक

शुभ चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 9 बजकर 21 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 43 मिनट तक

इन शुभ मुहूर्तों में पवित्र नदियों में स्नान करने या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करने से शारीरिक और मानसिक शांति मिलती है।

पवित्र नदियों में स्नान और दीपदान की परंपरा

सोमवती अमावस्या के अवसर पर हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन, काशी और कुरुक्षेत्र जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों एवं पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष विधान है। यदि किसी कारणवश तीर्थ स्थान पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।

कार्तिक मास में दीपदान का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन सायंकाल के समय पीपल के वृक्ष के नीचे, तुलसी के पौधे के पास और घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

पीपल पूजन और तुलसी परिक्रमा का विशेष विधान

सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष नियम बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल के वृक्ष में त्रिदेवों और समस्त देवी-देवताओं का वास होता है। इस दिन प्रातः स्नान के बाद जल में कच्चा दूध, तिल और गंगाजल मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करना चाहिए।

इसके बाद पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करना बेहद शुभ माना जाता है। परिक्रमा के दौरान ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। इसके साथ ही, सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए इस दिन वट या पीपल के वृक्ष पर कलावा बांधकर विशेष पूजा-अर्चना करती हैं।

पितृदोष मुक्ति के लिए दान और तर्पण के उपाय

अमावस्या की तिथि पितरों की तृप्ति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। साल की अंतिम सोमवती अमावस्या होने के कारण इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंड दान और दान-पुण्य करने से कुपित पितृ भी प्रसन्न होते हैं।

इस दिन जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, कंबल और तांबे के बर्तनों का दान करना चाहिए। चींटियों को आटा व शक्कर खिलाना और काले कुत्ते को रोटी देना भी इस दिन विशेष फलदायक माना जाता है। इससे जीवन में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

सोमवती अमावस्या पर क्या करें और क्या न करें?

सोमवती अमावस्या के पावन दिन पर कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है:

क्या करें: प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें, सूर्य देव को जल अर्पित करें, सात्विक भोजन ग्रहण करें और भगवान शिव तथा विष्णु जी के मंत्रों का जाप करें।

क्या न करें: इस दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। घर में किसी भी प्रकार का कलह या विवाद न करें। तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांसाहार) और शराब आदि के सेवन से पूरी तरह दूर रहें। किसी भी वृद्ध या असहाय व्यक्ति का अनादर न करें।

Shravan Sharma
लेखक / पत्रकार:

Shravan Sharma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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