farmers warned lay siege to Kaveri Seed Company: तेलंगाना की कावेरी बीज कंपनी से प्रभावित किसानों की आवश्यक बैठक भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही की उपस्थिति में पन्नालाल टावर महासमुंद में सम्पन्न हुई, जिसमें 23 अक्टूबर को कावेरी बीज कंपनी के रायपुर स्थिति कार्यालय को घेरने का निर्णय लिया गया है।
कावेरी कंपनी पर आरोप है कि उसने पिछले वर्ष किसानों के खेतों का इस्तेमाल धान के बीज उगाने के लिए इस्तेमाल किया मगर लीज का भुगतान अब तक नहीं किया है।

क्या है मामला ?
प्रभावित किसानों ने बताया कि उनके साथ हुआ अन्याय अब बर्दाश्त के बाहर हो चुका है। वर्ष 2024–25 के रबी सीजन में तेलंगाना की कावेरी बीज कम्पनी ने किसानों की भूमि लीज (रेंग) पर लेकर बीज उत्पादन कराया गया, मजदूरों से कड़ी मेहनत कराई गई, मशीनरी का उपयोग कराया गया, लेकिन लीज राशि तो दूर आज तक मेहनताना का भुगतान नहीं किया गया है।
1900 एकड़ में हुई खेती, लीज पर जमीन लेती है कंपनी
दरअसल कावेरी, बायर और अन्य कृषि कंपनियां हर वर्ष किसानों की जमीन लीज पर लेकर उस पर खेती करती हैं और हाईब्रीड बीज तैयार करती हैं, वहीं कुछ किसान खुद भी कंपनी के लिए खेती करते हैं। कंपनी द्वारा प्रति एकड़ जमीन के हिसाब से किसानों को किराया दिया जाता है। पिछले कुछ सालों तक सब कुछ ठीक रहा मगर 2024–25 की खेती के बाद कंपनी ने किसानों को धोखा दे दिया है।
करोड़ों की राशि है बकाया
प्रभावित किसानों के बताए अनुसार, कुल बकाया मूल राशि 3,23,26,388 (तीन करोड़ तेइस लाख छब्बीस हजार तीन सौ अठ्यासी ) रुपए है। जुलाई 2025 से फरवरी 2026 तक 2% मासिक ब्याज जोड़ने पर 51,72,222 रुपए अतिरिक्त देय है। इस प्रकार कुल बकाया राशि 3,74,98,610 (तीन करोड़ चौहत्तर लाख अट्ठानवे हजार छह सौ दस) रुपए हो चुकी है।
जिम्मेदारी से पाला झाड़ा कंपनी ने
दरअसल कावेरी कंपनी किसानों से बीज की खेती के लिए अनुबंध करती है। पता चला है कि कई किसानों ने भरोसे के चलते कंपनी से अनुबंध नहीं किया, वहीं कुछ किसानों ने कंपनी के ऑर्गनाइजर धमतरी निवासी परमानन्द साहू के साथ अग्रीमेंट किया। बताया जाता है कि पिछले वर्ष ओलावृष्टि के चलते धान की अपेक्षित फसल नहीं हो सकी और कावेरी कंपनी को नुकसान हुआ, जिसके बाद कंपनी ने किनारा करना शुरू कर दिया। अब कंपनी ने किसानों से सीधे कोई अनुबंध नहीं होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया है। हालांकि जिन किसानों ने अनुबंध किया है, उनका कहना है कि जिस परमानन्द साहू से कंपनी के प्रतिनिधि के तौर पर अनुबंध हुआ है, उस पर बताकर गवाह कंपनी के रीजनल मैनेजर राजकुमार रेड्डी के भी हस्तक्षगर हैं। किसान यह भी कह रहे हैं कि कंपनी अपनी फसल का बीमा कराती है, और किसी तरह के नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी से हो जाती है।
कृषि विभाग की नोटिस के बाद कोर्ट से स्टे लिया कंपनी ने
कावेरी कंपनी की मनमानी की लगातार शिकायतों के बाद कृषि विभाग ने नोटिस जारी कर कंपनी को छत्तीसगढ़ में बैन करने की चेतावनी देते हुए नोटिस जारी किया। इसके बाद कंपनी से बैन के खिलाफ हाई कोर्ट से स्टे ले लिया। अब यह मामला कोर्ट में उलझ गया है।
कर्ज में डूबे कई किसान परिवार
किसानों ने कहा कि यह केवल आर्थिक मामला नहीं है, यह किसानों और मजदूरों की मेहनत, सम्मान और जीवन से जुड़ा प्रश्न है। भुगतान न मिलने के कारण कई परिवार कर्ज में डूब चुके हैं, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है, और आजीविका संकट में है। शासन-प्रशासन से बार-बार निवेदन करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
बैठक में उपस्थित किसानों कृष्ण कुमार चंद्राकर, भोजराम साहू, पंकजमणी चंद्राकर, रोशन चंद्राकर, महेन्द्र बंजारे, केशव राम पाल, अनिल चंद्राकर, बंशी साहू, प्रवीण चंद्राकर, आदि किसानों ने कहा कि महासमुंद, रायपुर, बेमेतरा, बलौदाबाजार आदि जिलों के सैकड़ों किसानों एवं मजदूरों का लगभग चार करोड़ रूपये का भुगतान कंपनी द्वारा नहीं किया गया है। इसलिए 23 अक्टूबर 2026 को महासमुंद से रायपुर कावेरी बीज कंपनी के रायपुर स्थित कार्यालय को घेरने को बाध्य हो रहे हैं।
पूर्व में प्रसंस्करण प्लांट घेरने निकले थे किसान
किसान अपनी मांग को लेकर पिछले 20 फरवरी 2026 को धनेली स्थिति प्रसंस्करण प्लांट घेरने के लिए महासमुंद से ट्रेक्टर लेकर बड़ी संख्या में किसान और मजदूर रायपुर के लिए निकले थे, मगर प्रशासन ने इन्हे आश्वासन देते हुए बेलसोंडा के पास से समझा बुझाकार वापस कर दिया था।

कृषि विभाग की अनदेखी के शिकार हुए किसान
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही का कहना है कि बहरी कंपनियां अगर किसानों से अनुबंध करके खेती कर रही हैं तो इसके तहत खेती और भुगतान का सारा काम कृषि विभाग की निगरानी में होना चाहिए। मगर विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने इस पर ध्यान नहीं दिया, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
तेजराम ने कहा कि प्रशासन के आश्वसन के सात महीने बाद भी अब तक कोई समाधान नहीं निकला और न ही किसानों को भुगतान हो पाया है। किसानों के प्रतिनिधि मंडल ने 8 अक्टूबर को सहायक संचालक कावेरी बीज कंपनी रायपुर को पत्र के माध्यम से अवगत कराया था कि 15 अक्टूबर तक किसानों को भुगतान कर दिया जाए परन्तु उनकी ओर से किसी प्रकार भुगतान देने के संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की गई जिससे किसानों व मजदूरों में भारी आक्रोश है। इस विषय पर प्रभावित किसानों ने महासमुंद में बैठक की, जिसमें जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चंद्राकर, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही, प्रभावित किसान कृष्ण कुमार चंद्राकर, रोशन चंद्राकर, महेन्द्र, बंजारे, प्रवीण चंद्राकर, भीखम चंद्राकर, पंकज चंद्राकर, केशवराम पाल उपस्थित थे।।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. कावेरी कंपनी पर क्या आरोप है?
1900 एकड़ में बीज उत्पादन कराकर 3.74 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया।
Q. किसान कब घेराव करेंगे?
23 अक्टूबर 2026 को महासमुंद से निकलकर रायपुर स्थित कार्यालय का घेराव करेंगे।
Q. कृषि विभाग ने क्या किया?
विभाग ने कंपनी को बैन का नोटिस दिया, लेकिन कंपनी हाई कोर्ट से स्टे ले आई।



