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Korba: कोल ब्लॉक नीलामी के खिलाफ फूटा गुस्सा, 13 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने कहा – नहीं देंगे जल, जंगल और जमीन 

Korba: कोल ब्लॉक नीलामी के खिलाफ फूटा गुस्सा, 13 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने कहा – नहीं देंगे जल, जंगल और जमीन 
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • Opposition to coal block auctions: कोरबा जिले में कोलगा-बताती कोयला ब्लॉक की नीलामी की आहट से एक बार फिर आदिवासी इलाकों में विरोध की आग भड़क उठी है।
  • यहां के कलगामार में बुलाई गई एक विशाल ग्रामसभा में 13 गांवों के सैकड़ों ग्रामीण, खासकर बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट हुईं और एक स्वर में कोयला ब्लॉक की नीलामी का विरोध किया।
  • जैसा कि आप तस्वीर में देख सकते हैं, टेंट के नीचे सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण बैठे हैं।
  • ये सिर्फ भीड़ नहीं, अपनी जमीन बचाने की जद्दोजहद है।

Opposition to coal block auctions: कोरबा जिले में कोलगा-बताती कोयला ब्लॉक की नीलामी की आहट से एक बार फिर आदिवासी इलाकों में विरोध की आग भड़क उठी है। यहां के कलगामार में बुलाई गई एक विशाल ग्रामसभा में 13 गांवों के सैकड़ों ग्रामीण, खासकर बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट हुईं और एक स्वर में कोयला ब्लॉक की नीलामी का विरोध किया।

जैसा कि आप तस्वीर में देख सकते हैं, टेंट के नीचे सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण बैठे हैं। ये सिर्फ भीड़ नहीं, अपनी जमीन बचाने की जद्दोजहद है। ग्रामसभा में कलगामार, तौलीपाली, मदवानी, कोलगा, बताती, चांपा, चोरभट्ठी, ताराईमार, भौभनीमार समेत 13 गांवों के लोग शामिल हुए।

जल, जंगल, जमीन की लड़ाई

ग्रामीणों का कहना है कि कोयला खनन शुरू हुआ तो उनका सब कुछ उजड़ जाएगा।

“हमारा जीवन इसी जल, जंगल और जमीन से चलता है। खदान खुलेगी तो जंगल कटेगा, पानी खत्म होगा और खेती बर्बाद हो जाएगी। हम अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए लड़ रहे हैं,” – एक महिला ग्रामीण ने ग्रामसभा में कहा।

ग्रामीणों ने केंद्र और राज्य सरकार से चारों प्रस्तावित कोयला ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया तत्काल रद्द करने की मांग की है।

पेसा कानून का हवाला

ग्रामसभा में ग्रामीणों ने साफ कहा कि यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां पेसा (PESA) कानून लागू है। बिना ग्रामसभा की सहमति के जमीन का अधिग्रहण या नीलामी असंवैधानिक है। इसी को लेकर गांवों में अध्यक्ष और सचिव भी चुने गए हैं, ताकि दोनों सरकारों तक अपनी बात मजबूती से पहुंचा सकें।

बता दें कि कोरबा वन मंडल क्षेत्र में स्थित कोलगा-बताती ब्लॉक का विरोध कोई नया नहीं है। पहले भी ग्रामीण सड़क जाम और प्रदर्शन कर चुके हैं।

विरोध अब राजगामार तक फैला

दूसरी तरफ राजगामार क्षेत्र में भी हलचल तेज है। वहां केरवा, कोरकोमा और केराबहार पंचायतों को भी खनन से प्रभावित होने का डर सता रहा है। बताया जा रहा है कि संबंधित ब्लॉक दिल्ली की एक कंपनी को आवंटित किया गया है। खनन से पहले ग्रामसभा के लिए पत्र जारी होते ही सरपंच और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंच गए और ग्रामसभा रद्द करने की मांग की।

फिलहाल ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी नहीं सुनी तो यह विरोध चरणबद्ध आंदोलन में बदल जाएगा।

FAQ: कोल ब्लॉक का विरोध

Q1. विरोध कहां और क्यों हो रहा है?

कोरबा के कलगामार में 13 गांवों के ग्रामीण कोलगा-बताती कोयला ब्लॉक की नीलामी के खिलाफ विरोध कर रहे हैं, उन्हें जल, जंगल, जमीन और आजीविका खत्म होने का डर है।

Q2. ग्रामीणों ने किस कानून का हवाला दिया?

ग्रामीणों ने पेसा कानून और संविधान की पांचवीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा कि ग्रामसभा की सहमति के बिना नीलामी अवैध है।

Q3. कितने गांव विरोध में हैं?

कलगामार, तौलीपाली, मदवानी, कोलगा, बताती, चांपा, चोरभट्ठी, ताराईमार, भौभनीमार समेत 13 गांव।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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