Leopard attacking villagers successfully caged: बीती रात महासमुंद जिले के झिटकी गांव स्थित एक मकान में घुसकर एक तेंदुए ने एक ही परिवार के 8 लोगों को घायल कर दिया। इनमें से 3 लोगों हालत काफी नाजुक है। गंभीर हालत में उन्हें रायपुर अस्पताल भेज दिया गया है। तीन लोगों का इलाज महासमुंद जिला अस्पताल में जारी है और बाकी 2 लोगों को इलाज के बाद घर भेज दिया गया है। घर वापस भेजे गये लोगों में दो बच्चे शामिल हैं।
महासमुंद जिले के झिटकी गांव के समीप पंडरीपानी में तेंदुए ने सबसे पहले एक व्यक्ति पर हमला किया और देर रात झिटकी गांव के एक मकान में घुसकर 8 लोगों को घायल कर दिया। ग्रामीणों और वन विभाग को आशंका है कि पंडरीपानी और झिटकी की दोनों घटनाओं में एक ही तेंदुआ शामिल हो सकता है। घटना के बाद वन विभाग, पुलिस और विशेषज्ञों की टीम मौके पर मौजूद रही।
रैबीज का टीका नहीं था उपलब्ध
झिटकी में घायल 8 लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में टीका उपलब्ध न होने के कारण जिला अस्पताल महासमुंद भेजा गया, जहां कल पंडरीपानी की घटना में घायल व्यक्ति का भी उपचार चल रहा है। 24 घंटे के भीतर दोनों घटनाओं में कुल 9 लोग घायल हुए हैं।

आधी रात को मकान में घुसा तेंदुआ
रात्रि लगभग 12 से 12.30 बजे के बीच तेंदुआ कोमाखान के झिटकी गांव में सरजू यादव के मकान में घुसा। तेंदुए ने पहले छोटे भाई और फिर बड़े भाई के परिवार के सदस्यों पर हमला किया। घायलों में सरजू यादव (60 वर्ष), उत्तरीबाई यादव (55 वर्ष), जनकराम (40 वर्ष), मनीष (18 वर्ष), सुनीता यादव (34 वर्ष) और तुषार (15 वर्ष) शामिल हैं। इनके अलावा दो अन्य व्यक्ति भी घायल हुए हैं।
सभी घायलों को पहले बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां एंटी-रेबीज/एंटी-वेनम टीका उपलब्ध न होने के कारण उन्हें जिला अस्पताल महासमुंद भेज दिया गया।
हमले की कहानी घायलों की जुबानी
महासमुंद जिला अस्पताल में भर्ती घायलों ने बताया कि तेंदुए ने सबसे पहले किस पर हमला किया, परिवार के लोगों के शरीर के किन-किन जगहों पर हमला हुआ, बच्चों के कमरे में तेंदुआ कैसे घुसा, दो बच्चों ने पलंग के नीचे घुसकर जान बचाई, इसकी जानकारी मीडिया को दी है।
ग्रामीण ने कुल्हाड़ी से किया बचाव
ग्राम पंडरीपानी निवासी लक्ष्मीचंद यादव ने बताया कि जब वो कोमाखान सर्किल के भलेसर बीट में लकड़ी बीन रहा था, तब तेंदुए ने झाड़ियों से निकलकर अचानक उस पर हमला कर दिया। इस दौरान उसने अपने पास मौजूद कुल्हाड़ी से बचाव किया। इस दौरान तेंदुआ पहले तो भागा, मगर उसने तुरंत दूसरी बार हमला किया। लक्ष्मीचंद ने फिर कुल्हाड़ी से उसका सामना किया। युवक के लगतार प्रतिरोध के बाद आखिरकार तेंदुआ जंगल की ओर भाग खड़ा हुआ। इस घटना में उसके शरीर पर पंजों के 5 घाव आए हैं, जिसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने उसे 108 संजीवनी वाहन से महासमुंद अस्पताल पहुंचाया।
आधी रात को मकान में घुस कर किया हमला
महासमुंद जिला अस्पताल में 65 साल का बुजुर्ग सरजू यादव, बड़ा बेटा जनक यादव (45) और नाती मनोज यादव (14) भर्ती थे। जनक यादव और उनकी पत्नी लक्ष्मी यादव ने घटना की पूरी जानकारी दी और बताया कि झिटकी गांव में सरजू यादव का घर है। एक ही घेरे में दो मकान हैं, जहां सरजू के दोनों बेटों का परिवार रहता है। पुराने मकान के एक कमरे में रात सरजू और उसकी पत्नी उत्तरी यादव, दूसरे कमरे में छोटा बेटा सुनील यादव, बहू सुनीता यादव सोए हुए थे। जबकि दूसरे मकान में बड़ा बेटा जनक और उसकी पत्नी सोई हुई थीं। बड़े बेटे जनक के घर के एक कमरे में बड़े बेटे के दो बच्चे और छोटे बेटे के दो बच्चे सोए हुए थे।
लघुशंका के लिए निकली महिला पर पहला अटैक
रात लगभग 12 साढ़े 12 बजे सरजू की पत्नी उत्तरी यादव पेशाब के लिए अपने कमरे से बाहर आईं तो तेंदुए ने सीधे उस पर हमला किया और उसके गर्दन को दांत में दबा जमीन पर गिरा दिया। पत्नी की जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज पर सरजू यादव कमरे से बाहर आया और पत्नी को बचाने की कोशिश की तो उत्तरी को छोड़कर तेंदुआ सरजू पर हमला करने लगा। दोनों की चीखें सुनकर छोटे बेटे बहू दौड़े तो तेंदुए ने उन पर भी हमला कर दिया।
हमले से बचने के लिए छोटे भाई सुनील और उसकी पत्नी सुनीता बड़े भाई जनक के घर की ओर दौड़े। दोनों के घर के बीच सिर्फ आंगन का फासला है। जोर-जोर से दरवाजा खटखटाया तो दरवाजा खोलते ही तेंदुआ भी जनक के घर के भीतर घुस गया। घर में घुसते ही तेंदुए ने जनक पर हमला किया। इसके बाद तेंदुआ उस कमरे में घुसा, जहां चार बच्चे सोए हुए थे।
बच्चों को बचाने तेंदुए से भिड़ गया जनक
तेंदुए को बच्चों के कमरे में घुसते देख जनक भी उसी कमरे में घुस गया। तेंदुए ने जनक के बेटे मनीष यादव के अलावा एक और बच्चे तुषार पर भी जोरदार हमला किया। बचे हुए दो बच्चे डर से पलंग के नीचे घुस गये। बच्चों पर हमला करते देख जनक ने किसी तरह हिम्मत जुटा कर तेंदुए को जमीन पर पटका और अपने शरीर का वजन उस पर देते तेंदुए केे मुंह को दोनों हाथों से ताकतभर दबाए रखा। फिर उसने सभी बच्चों को कमरे से बाहर जाने को कहा। इस बीच तेंदुआ लगातार अपने नाखूनों ने जनक के हाथों को पंजों से नोंचता रहा।

बचकर बाहर आये जनक ने तेंदुए को कमरे में किया बंद
थोड़ी देर बाद जनक किसी तरह तेंदुए से बचकर कमरे से बाहर आया और कमरे का दरवाजा लगा दिया। तब तक गांव में इसकी सूचना पहुंच गई थी। इसके बाद गांव वालों ने फोन कर वन विभाग और जिले के अन्य अधिकारियों को इसकी सूचना दी। सुबह होते-होते अधिकारी घटनास्थल पहुंचे और घायलों को कोमाखान अस्पताल पहुंचाया गया।
तीन घायलों की हालत गंभीर
इस घटना में घायल एक ही परिवार के तीन लोगों सुनील यादव, उत्तरी यादव और मनीष यादव को गंभीर हालत में रायपुर भेज दिया गया।
तेंदुए ने उत्तरी के गर्दन को दांतों से दबाया है, जिससे गर्दन की नसें बाहर से दिखाई दे रही हैं। इनके शरीर से काफी मात्रा में खून बह चुका है। सुनील यादव के पीठ, कंधे और चेहरे के अलावा जांघों पर भी तेंदुए के दांतों के गहरे निशान हैं। जनक के बेटे मनीष के शरीर में अनगिनत जगहों पर तेंदुए ने हमला किया है। सभी के शरीर में गहरे घाव हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वन क्षेत्र में तेंदुओं की आवाजाही की जानकारी होने के बावजूद विभाग द्वारा चेतावनी बोर्ड या बैनर नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने गश्त बढ़ाने और प्रवेश रोकने के लिए चेतावनी व्यवस्था की मांग की है। ग्रामीण तुलाराम यादव के अनुसार, वे मवेशी चराने का काम करते हैं और जंगल में उनका तेंदुए से सामना होता रहा है।
पहले भी मार चुका है बछड़े और घोड़ा
ग्रामीण चैतराम पांडेय ने बताया कि लगभग 6 महीने पहले तेंदुए के हमले में उनके दो बछड़ों की मौत हुई थी, और पिछले वर्ष अक्टूबर में इसी क्षेत्र में एक घोड़े की भी तेंदुए के हमले से मौत हो गई थी।
जंगल की ओर भागा तेंदुआ घंटों बाद फिर उसी घर में घुसा
वन विभाग के डिप्टी रेंजर दुलार सिंह सिन्हा ने बताया कि बीती रात तेंदुआ घर के अंदर घुसा हुआ था और रात भर विभाग व विशेषज्ञों की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। आज सुबह तेंदुआ जंगल की ओर भाग गया। तेंदुए के फिर से आने की आशंका को देखते हुए वन कर्मी गांव में ही रूककर हालात पर नजर रखे हुए थे।

वन विभाग के मुताबिक आज सुबह जंगल की ओर भागा तेंदुआ घंटों बाद फिर उसी घर में घुस गया। दोपहर करीब 2 बजे वही तेंदुआ फिर से उसी मकान में लौट आया है। जिसके बाद उसे कमरे में बंद कर रखा गया। जिसके बाद रायपुर से पहुंची बचाव टीम ने तेंदुए को शाम करीब 5 बजे पिंजरे में कैद कर लिया।
बहरहाल तेंदुए के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों और वन अमले ने राहत की सांस ली है, मगर दहशत अब भी कायम है। पास के जंगल में और भी तेंदुओं का बसेरा है, जिनके हमले की आशंका जताई जा रही है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. महासमुंद में तेंदुए ने कहां हमला किया?
झिटकी गांव में सरजू यादव के मकान में और उससे पहले पंडरीपानी में, दोनों जगह कुल 9 लोग घायल।
Q2. कितने लोग घायल हुए और उनकी हालत क्या है?
झिटकी में एक ही परिवार के 8 लोग घायल, 3 गंभीर – उत्तरीबाई, सुनील और मनीष को रायपुर भेजा गया, 3 का जिला अस्पताल में इलाज, 2 बच्चों को घर भेजा।
Q3. तेंदुआ दोबारा कैसे पकड़ा गया?
रात को हमला कर जंगल भागा था, दोपहर 2 बजे फिर उसी घर में घुसा, कमरे में बंद कर शाम 5 बजे रायपुर टीम ने पिंजरे में कैद किया।
Q4. बच्चों ने कैसे बचाई जान?
हमले के दौरान दो बच्चे पलंग के नीचे घुस गए, पिता जनक ने तेंदुए को पकड़कर बच्चों को बाहर निकाला।
Q5. ग्रामीणों की क्या मांग है?
जंगल में तेंदुओं की मौजूदगी के बावजूद चेतावनी बोर्ड नहीं लगे, गश्त बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था की मांग।



