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DMF Scam: डीएमएफ के फंड में घोटाला उजागर, कलेक्टर ने 17.46 करोड़ के 160 कार्य किए रद्द

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तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • GPM: छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले जीपीएम में जिला खनिज न्यास (DMF) फंड में बड़ा घोटाला सामने आया है।
  • मौजूदा कलेक्टर विजय दयाराम के. ने पूर्व कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी के कार्यकाल में हुई गंभीर अनियमितता को पकड़ा है।
  • बिना कार्यकारिणी और गवर्निंग काउंसिल यानी शासी परिषद की मंजूरी के 17.46 करोड़ रुपये के 160 विकास कार्य स्वीकृत कर दिए गए थे और पहली किस्त की राशि भी जारी कर दी गई थी।
  • अब मौजूदा कलेक्टर ने सभी 160 कार्यों को निरस्त करते हुए 8.32 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में वापस जमा कराने का आदेश दिया है।

GPM: छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले जीपीएम में जिला खनिज न्यास (DMF) फंड में बड़ा घोटाला सामने आया है। मौजूदा कलेक्टर विजय दयाराम के. ने पूर्व कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी के कार्यकाल में हुई गंभीर अनियमितता को पकड़ा है। बिना कार्यकारिणी और गवर्निंग काउंसिल यानी शासी परिषद की मंजूरी के 17.46 करोड़ रुपये के 160 विकास कार्य स्वीकृत कर दिए गए थे और पहली किस्त की राशि भी जारी कर दी गई थी। अब मौजूदा कलेक्टर ने सभी 160 कार्यों को निरस्त करते हुए 8.32 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में वापस जमा कराने का आदेश दिया है।

यह पहला मौका है जब छत्तीसगढ़ में किसी कलेक्टर ने अपने पूर्व कलेक्टर की डीएमएफ गड़बड़ी पकड़ी और उसे रद्द करने की हिम्मत दिखाई है।

कैसे हुआ 17.46 करोड़ का खेल?

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले में DMF मद से 160 विकास कार्यों की स्वीकृति दी गई थी। इनकी कुल लागत 17 करोड़ 46 लाख 92 हजार 166 रुपये थी। नियमों को दरकिनार कर इनकी प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी गई और पहली किस्त के रूप में 8 करोड़ 32 लाख 48 हजार 70 रुपये संबंधित निर्माण एजेंसियों को बांट भी दिए गए।

सालों से इसी तर्ज पर हो रहा है घोटाला

छत्तीसगढ़ में बीते 10 सालों में डीएमएफ में घोटाला इसी पैटर्न पर होता रहा है। नियमानुसार डीएमएफ का कोई भी कार्य पहले शासी परिषद (गवर्निंग काउंसिल) में कलेक्टर की अध्यक्षता में स्वीकृत होता है, तब जाकर फंड जारी होता है। लेकिन जीपीएम में इस पूरी प्रक्रिया को ही बायपास कर दिया गया। बैठक ही नहीं हुई और सीधे प्रशासनिक स्वीकृति दे दी गई।

70% राशि उच्च प्राथमिकता पर खर्च करना अनिवार्य, पर यहां…

छत्तीसगढ़ जिला खनिज न्यास नियम और प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के दिशा-निर्देश स्पष्ट हैं। डीएमएफ की कम से कम 70% राशि खनन प्रभावित क्षेत्रों में उच्च प्राथमिकता वाले कार्यों – पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिला एवं बाल कल्याण और कौशल विकास पर खर्च करना अनिवार्य है। शेष 30% राशि अन्य बुनियादी ढांचे पर खर्च हो सकती है। डीएमएफ का उद्देश्य ही खनन प्रभावित लोगों को बुनियादी सुविधा देना है। लेकिन जीपीएम में इन प्राथमिकताओं और प्रक्रिया दोनों की अनदेखी की गई।

मौजूदा कलेक्टर ने पकड़ी गड़बड़ी, सचिव को लिखा पत्र

गड़बड़ी सामने आने के बाद मौजूदा कलेक्टर विजय दयाराम के. ने खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद को पत्र लिखकर पूरी अनियमितता की जानकारी दी। इसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित निर्माण एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

एजेंसियों ने क्या दी सफाई ?

नोटिस पाने वालों में जनपद पंचायत गौरेला, पेंड्रा, मरवाही, विद्युत एवं यांत्रिकी संभाग बिलासपुर, नगर पंचायत मरवाही, पशु चिकित्सा विभाग, क्रेडा और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय शामिल थे। सभी एजेंसियों ने जवाब में विकास कार्यों की जरूरत और डीएमएफ कार्यालय से प्रस्ताव मांगे जाने का हवाला दिया, लेकिन बिना शासी परिषद की मंजूरी के फंड जारी करने का कोई वैध आधार नहीं बता पाईं।

जिला प्रबंधन समिति की बैठक में रद्द हुए काम

शासन के निर्देश पर 26 अक्टूबर को जिला प्रबंधन समिति की बैठक हुई। इसमें सभी 160 कार्यों और एजेंसियों के जवाबों की बिंदुवार समीक्षा की गई। समीक्षा में अनियमितता स्पष्ट होने पर सभी 160 परियोजनाओं को निरस्त करने का फैसला लिया गया। प्रशासन ने अब सभी एजेंसियों को पहली किस्त के रूप में मिली 8.32 करोड़ की पूरी रकम तत्काल सरकारी खाते में लौटाने का निर्देश दिया है।

क्या अफसरों की जवाबदेही तय होगी?

यह कार्रवाई केवल परियोजनाएं रद्द करने तक सीमित नहीं है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना शासी परिषद की मंजूरी के करोड़ों रुपये की स्वीकृति देने वाले अधिकारियों और तत्कालीन कलेक्टर की जवाबदेही कैसे तय होगी। इस घोटाले के उजागर होने के बाद पूरे प्रदेश में डीएमएफ फंड के दुरुपयोग की जांच की मांग तेज हो सकती है।

FAQ: डीएमएफ की गड़बड़ी उजागर

Q1. जीपीएम में डीएमएफ घोटाला क्या है और कितनी राशि का है?
A. जीपीएम जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए DMF मद से 17 करोड़ 46 लाख 92 हजार 166 रुपये के 160 कार्यों को बिना कार्यकारिणी और शासी परिषद (गवर्निंग काउंसिल) की मंजूरी के स्वीकृत कर दिया गया था। पहली किस्त के रूप में 8.32 करोड़ रुपये एजेंसियों को जारी भी कर दिए गए थे।

Q2. घोटाला किसके कार्यकाल में हुआ और किसने पकड़ा?
A. यह घोटाला तत्कालीन कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी के कार्यकाल में हुआ। मौजूदा कलेक्टर विजय दयाराम के. ने अनियमितता पकड़ी और खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद को पत्र लिखकर जानकारी दी। यह पहला मौका है जब किसी कलेक्टर ने पूर्व कलेक्टर की डीएमएफ गड़बड़ी पकड़ी हो।

Q3. अब प्रशासन ने क्या कार्रवाई की है?
A. 26 अक्टूबर को जिला प्रबंधन समिति की बैठक के बाद सभी 160 कार्यों को निरस्त कर दिया गया है और संबंधित एजेंसियों – जनपद पंचायत, क्रेडा, विद्युत विभाग, नगर पंचायत सहित सभी को पहली किस्त के 8 करोड़ 32 लाख 48 हजार 70 रुपये सरकारी खजाने में तत्काल वापस जमा करने का आदेश दिया गया है।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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