Chhattisgarh forest wildlife protection and investigation over alleged animal smuggling
Wildlife smuggling allegations trigger a political debate over forest protection and CBI investigation in Chhattisgarh.

Chhattisgarh Wildlife Smuggling: छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने मंगलवार को सरकार की वन नीति और विभाग की उपलब्धियों का ब्यौरा पेश किया। नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित पत्रकार वार्ता में मंत्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार जंगलों की सुरक्षा के साथ उन लोगों की जिंदगी बदलने पर भी काम कर रही है, जिनकी आजीविका सीधे तौर पर वनों से जुड़ी है।

सरकार के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में किसानों की जमीन पर करोड़ों पौधे लगाए गए हैं, बाघों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है और बस्तर के दूरस्थ वन क्षेत्रों में वानिकी गतिविधियों के जरिए लाखों मानव-दिवस रोजगार सृजित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

नक्सल खात्मे के बाद बढ़ी वन्यजीवों की तस्करी!
31 मार्च 2026 को नक्सवाद के खात्मे का ऐलान किया गया। जिसके बाद से वन्यजीवों की तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे है। इस मामले पर वनमंत्री ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि दूरांचल क्षेत्रों में शिकायतें आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुई यह तय किया गया है। वन्यजीवों की तस्करी के मामले की जांच CBI से कराइ जाएगी। उन्होंने कहा कि तस्करों को बक्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

सुशील आनंद शुक्ला ने साधा निशाना
प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने मंत्री के बयान पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद से ही संरक्षित वन्य प्राणियों की तस्करी और शिकार की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। कांग्रेस नेता ने सरकार द्वारा इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के फैसले को महज मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने का पैंतरा करार दिया है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि राज्य में वन्य प्राणियों का लगातार शिकार हो रहा है, जो सीधे तौर पर सरकार की उदासीनता और वन अमले की घोर लापरवाही को दर्शाता है।

क्या CBI करेगी छत्तीसगढ़ के वन्यजीवों की रक्षा?- सुशील आनंद शुक्ला
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सीबीआई केवल एक या दो विशिष्ट घटनाओं की जांच कर सकती है, लेकिन वह पूरे जंगल या वन्य जीवों की चौबीसों घंटे सुरक्षा नहीं कर सकती। राज्य का विशाल भूभाग वनाच्छादित है और इसकी सीमाएं सात अन्य राज्यों से मिलती हैं। ऐसे में बाहरी तस्करों और स्थानीय गिरोहों पर नकेल कसने के लिए वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी ही सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकती है। क्या CBI से छत्तीसगढ़ के वन्यजीवों की रक्षा कराएंगे ?

लगातार सामने आ रहे मामले
छत्तीसगढ़ राज्य का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा घने जंगलों से ढका हुआ है और यह क्षेत्र दुर्लभ वन्य जीवों व वनस्पतियों के लिए जाना जाता है। पूर्व में भी राज्य के अलग-अलग जंगलों से तेंदुए की छाल, हाथीदांत, पैंगोलिन की खाल की तस्करी की घटनाएं सामने आती रही हैं। हालांकि, हाल के महीनों में जिस तरह से संगठित तस्कर गिरोहों की गतिविधियां बढ़ी हैं, उसने राज्य के वन संरक्षण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि राज्य सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी को जांच सौंपने की बात कही थी, जिस पर अब राजनीति गरमा गई है।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है।