Fundhar Gauthan Raipur: रायपुर के फुंडहर गौठान में गौवंश की संख्या तय एग्रीमेंट से दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। नगर निगम ने 260 गौवंश के लिए 27.50 रुपये प्रति गौवंश प्रतिदिन के हिसाब से एग्रीमेंट किया था, लेकिन गौठान में संख्या 600 से ऊपर पहुंच गई।
21 अगस्त को आठ गायों की मौत के बाद अब चारा, दवा और भुगतान को लेकर विवाद गहरा गया है। गौठान संचालक विक्रांत शर्मा ने नगर निगम को गौठान नहीं चला पाने की सूचना दी है।
एग्रीमेंट 260 का, गौठान में निगम भेजता रहा गायें
फुंडहर गौठान के संचालक के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में नगर निगम के साथ 260 गौवंश का एग्रीमेंट हुआ था। इसके बाद नवंबर में 66 और दिसंबर में 150 गायें गौठान में लाई गईं। फरवरी के अंत तक गौवंश की संख्या 685 तक पहुंच गई। यानी तय संख्या के मुकाबले गौठान में कहीं ज्यादा मवेशी पहुंच गए। संचालक का कहना है कि भुगतान अभी भी एग्रीमेंट में तय 260 गौवंश के हिसाब से ही हो रहा है।
संख्या बढ़ी, लेकिन संसाधन उसी हिसाब से नहीं बढ़े
गौठान संचालक का कहना है कि अधिक संख्या में गौवंश आने के बावजूद चारा और इलाज की व्यवस्था उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। बीमार और दुर्घटनाग्रस्त गायों का इलाज भी चल रहा था। 21 अगस्त को आठ गायों की मौत के बाद व्यवस्था को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं। संचालक का दावा है कि 24 अगस्त से चारे की व्यवस्था भी नहीं रह जाएगी। दवाइयों की कमी की बात भी उन्होंने नगर निगम के सामने रखी है।
10 महीने में भेजे 10 पत्र, फिर भी समस्या बरकरार
विक्रांत शर्मा के अनुसार, उन्होंने 5 मार्च को नगर निगम को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया था। इसके बाद 6 मार्च से काउ कैचर का आना बंद हो गया। मई में 260 गौवंश के हिसाब से भुगतान किया गया। नए आयुक्त के आने के बाद 15 जुलाई को भी उन्होंने गौठान सरेंडर करने की चेतावनी दी। उनका कहना है कि करीब 10 महीने में नगर निगम को 10 पत्र भेजे गए, लेकिन भुगतान और व्यवस्था से जुड़ी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
सवाल सिर्फ फुंडहर का नहीं, पूरे सिस्टम का
रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भी शहर के गौठानों की स्थिति पर चिंता जताई है। उनके मुताबिक, गोकुल नगर गौठान में 600 से अधिक, हीरापुर जरवाय में 160 से अधिक, अटारी में 300 और कुंडहर गौठान में 680 गौवंश हैं। उनका कहना है कि सड़कों से गौवंश को गौठानों तक पहुंचाना तभी सार्थक है, जब वहां उनके लिए पर्याप्त चारा, इलाज और देखभाल की व्यवस्था हो। व्यवस्था कमजोर रही तो गौठानों में ही मवेशियों की सुरक्षा चुनौती बन जाएगी।
अब निगम के सामने दोहरी चुनौती
यह मामला सिर्फ गौठान संचालक के भुगतान तक सीमित नहीं है। नगर निगम ने जिन गौवंश को सड़कों से पकड़कर गौठान में पहुंचाया, उनकी संख्या, क्षमता के मुकाबले अतिरिक्त गौवंश की व्यवस्था और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी निगम की निगरानी के दायरे में आती है। रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भी गौठानों की स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सड़कों से गौवंश को गौठान लाने का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब वहां उनकी समुचित देखभाल हो।
