AI chatbot answering user questions while traditional websites lose traffic
AI chatbot answering user questions while traditional websites lose traffic

AI impact on website traffic: इंटरनेट पर जानकारी खोजने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब यूजर किसी वेबसाइट पर जाकर जानकारी पढ़ने के बजाय सीधे एआई टूल से सवाल पूछ रहे हैं। चैटजीपीटी और गूगल के एआई फीचर कुछ सेकंड में कई स्रोतों से जानकारी लेकर जवाब दे देते हैं। इससे वेबसाइटों पर क्लिक घट रहे हैं और उनके ट्रैफिक के साथ विज्ञापन से होने वाली कमाई पर भी असर पड़ रहा है।

इंटरनेट के शुरुआती दौर में सर्च इंजन और वेबसाइटों के बीच एक तरह का अनकहा समझौता था। सर्च इंजन वेबसाइटों की जानकारी को क्रॉल करके अपने नतीजों में दिखाते थे। यूजर लिंक पर क्लिक करके मूल वेबसाइट तक पहुंचता था। इससे वेबसाइटों को पाठक मिलते थे और विज्ञापन के जरिए कमाई होती थी।

AI क्रॉलर से वेबसाइटों की दूरी

ट्रैफिक घटने की चिंता के बीच कई वेबसाइट संचालक अब एआई कंपनियों के क्रॉलर को अपनी साइट से जानकारी लेने से रोक रहे हैं। यानी जिन वेबसाइटों की सामग्री से एआई सिस्टम जवाब तैयार करते हैं, वही वेबसाइटें अब अपने कंटेंट तक एआई की पहुंच सीमित करने की कोशिश कर रही हैं। वेबसाइट संचालकों की चिंता सीधी है। अगर यूजर मूल वेबसाइट तक नहीं पहुंचेगा तो अच्छी सामग्री तैयार करने में होने वाला खर्च निकालना मुश्किल हो सकता है। खासकर उन वेबसाइटों के लिए, जिनकी आय मुख्य रूप से विज्ञापन और पाठकों के ट्रैफिक पर निर्भर है। एआई के बढ़ते इस्तेमाल ने इस व्यवस्था को बदल दिया है। एआई टूल वेबसाइटों से जानकारी लेकर उसका सार तैयार करते हैं और यूजर को जवाब सीधे अपने प्लेटफॉर्म पर दे देते हैं। ऐसे में यूजर के लिए मूल वेबसाइट खोलने की जरूरत कम हो जाती है।

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बेहतर स्रोत पीछे छूटने का खतरा

एआई क्रॉलर के बढ़ते इस्तेमाल से एक दूसरी चिंता भी सामने आ रही है। अगर भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण वेबसाइटें एआई क्रॉलर को रोकती हैं, जबकि कम भरोसेमंद साइटें अपनी सामग्री तक पहुंच देती रहती हैं, तो एआई के पास उपलब्ध जानकारी का संतुलन बदल सकता है। ऐसी स्थिति में एआई सिस्टम को अच्छे स्रोतों की तुलना में कम गुणवत्ता वाली वेबसाइटों से ज्यादा जानकारी मिल सकती है। इसका असर भविष्य में एआई से मिलने वाले जवाबों की गुणवत्ता पर पड़ने की आशंका है।

क्या है Google Zero?

सर्च की दुनिया में अब Google Zero जैसी स्थिति की चर्चा हो रही है। इसका मतलब ऐसी स्थिति से है, जब यूजर गूगल पर जानकारी खोजने के बाद किसी वेबसाइट पर जाने के बजाय वहीं मिले एआई जवाब से संतुष्ट हो जाए। यूजर के लिए यह व्यवस्था तेज और सुविधाजनक है। लेकिन वेबसाइटों के लिए इसका मतलब कम क्लिक और कम ट्रैफिक है। लंबे समय में इसका असर डिजिटल मीडिया, रिसर्च और विशेषज्ञ सामग्री तैयार करने वाली वेबसाइटों की कमाई पर पड़ सकता है। विकिपीडिया पर हुए एक अध्ययन में भी एआई आधारित सारांश आने के बाद कुछ भाषाओं के ट्रैफिक में गिरावट देखी गई। इससे यह बहस तेज हुई है कि अगर यूजर का वेबसाइटों तक पहुंचना लगातार कम हुआ तो इंटरनेट पर भरोसेमंद सामग्री तैयार करने वाला मॉडल कैसे टिकेगा।

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आम यूजर के लिए क्या बदलेगा?

एआई से सीधे जवाब मिलने का सबसे बड़ा फायदा सुविधा और समय की बचत है। लेकिन हर एआई जवाब पूरी तरह सही हो, यह जरूरी नहीं है। किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए मूल स्रोत को देखना और जानकारी की पुष्टि करना अभी भी जरूरी है। इंटरनेट का अगला दौर इसी सवाल से जुड़ा है कि एआई की सुविधा और वेबसाइटों की आर्थिक जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अगर यूजर वेबसाइटों तक पहुंचना कम करते हैं और वेबसाइटें एआई को अपनी सामग्री से दूर करती हैं, तो इंटरनेट पर जानकारी के निर्माण, वितरण और कमाई का पूरा मॉडल बदल सकता है।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।