बस्तर दशहरा : 100 शिल्पी बना रहे रथ, 8 विशाल पहियों में 3 क्विंटल लोहा लगेगा
बस्तर दशहरा : 100 शिल्पी बना रहे रथ, 8 विशाल पहियों में 3 क्विंटल लोहा लगेगा

टीआरपी डेस्क
रायपुर/जगदलपुर। रियासत कालीन बस्तर दशहरा पर्व के विशाल काष्ठ रथ निर्माण बेड़ाउमरगांव व झारउमरगांव के 100 से अधिक कारीगरों के द्वारा किया जा रहा है। इस वर्ष बस्तर दशहरा के लिए 08 चक्कों के रथ का निर्माण किया जा रहा है। आज रथ निर्माण स्थल पर बस्तर दशहरा रथ के चक्के आकार लेने लगे हैं। रथ बनाने वाले काष्ठ के कारीगरों के अलावा परंपरागत रुप से लोहार भी अपनी भागीदारी निभाते आ रहे हैं। रथ के विभिन्न हिस्सों और तीन भागों में तैयार चक्के को आपस में जोडऩे के लिए लोहार पारंपरिक औजारों से क्लैंप तैयार करते हैं इसे स्थानिय कारीगर जोकी कहते हैं। चक्के की धुरी पर बने छेद में 08 एमएम के लोहे की पट्टी को आकार देकर चक्के को आपस में जोड़ा जाता है।
कारीगरों के मुताबिकं 8 चक्कों के रथ निर्माण में लगभग 03 क्विंटल लोहा लग जाता है। लोहार के मुिखया भागीरथी ने बताया कि सिरहासार भवन के ठीक बगल में स्थित पवित्र पत्थर की पूजा-अर्चना विधि-विधान से की जाती है। इसके बाद लोहा तपाने के लिए भट्टी लगाया जाता है। उन्होने बताया कि रथ में प्रयुक्त विभिन्न स्थानोंं आड़बाधन, जोड़ी खंभा, मगरमुंही, असांड, लाड़ी को जोडऩे के लिए लोहे की कील बनाई जाती है।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।