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Maoist Leader Surrender : हाथ में बंदूक, चेहरे पर शांति और मुस्कान के साथ आत्मसमर्पण, नक्सल नेता भूपति ने डाले हथियार, देखें वीडियो…

Maoist Leader Surrender : हाथ में बंदूक, चेहरे पर शांति और मुस्कान के साथ आत्मसमर्पण, नक्सल नेता भूपति ने डाले हथियार, देखें वीडियो…
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

टीआरपी डेस्क। Maoist Leader Surrender : वो क्षण असाधारण था जब हाथों में हथियार थामे, चेहरे पर गहरी शांति और संतुलित मुस्कान लिए नक्सल आंदोलन के शीर्ष रणनीतिकार और विचारक मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति/सोनू ने महाराष्ट्र सरकार और सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

भूपति, जो कभी जंगलों में नक्सल युद्धनीति का मस्तिष्क माना जाता था, आज खुद संविधान और लोकतंत्र के सामने नतमस्तक है। उसने न केवल अपनी बंदूकें सौंपीं, बल्कि अपने 60 नक्सल साथियों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।

लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत

जिस चेहरे को सुरक्षा बल वर्षों से तलाश रहे थे, वो अब उनके सामने था, न गुस्सा, न घबराहट, बस एक गहरी, शांत मुस्कराहट। मानों सालों की हिंसा, संघर्ष और वैचारिक भ्रम के बाद कोई किसी ने उचित पथ का ज्ञात हुआ हो। भूपति का यह आत्मसमर्पण केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक विचारधारा की अंतर्विरोधी हार और लोकतांत्रिक मूल्यों की मौन विजय है।

वो हाथ जो कभी जंगलों में गोलियां चलाते थे, अब संविधान की राह पर चलने का संकल्प ले चुके हैं। वो चेहरा, जो कभी भय का प्रतीक था, अब समाज की ओर संवाद और समर्पण का संदेश दे रहा है।

भूपति पर ₹6 करोड़ का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के साथ-साथ सुरक्षा बलों को 50 से अधिक हथियार भी सौंपे गए हैं। इस कदम को राज्य और केंद्र की अनूप ऑपरेशन की सफलता और नक्सल आंदोलन की अंदरूनी दरारों का संकेत माना जा रहा है।

यह आत्मसमर्पण नक्सल आंदोलन के लिए एक गंभीर धक्का माना जा रहा है। भूपति के इस निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंदरूनी दबाव, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और नक्सल नेटवर्क में दरारें उस स्तर तक पहुंच चुकी हैं कि शीर्ष नेतृत्व भी खुलेआम हथियार डालने को विवश हुआ है।

यह आत्मसमर्पण भारत और महाराष्ट्र सरकार के लिए एक राजनीतिक और सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। पुलिस और सुरक्षा बलों ने इसे नक्सल प्रभावित इलाकों में संचालन तेज करने के एक अवसर के रूप में लिया है। अब सवाल यह है कि क्या इस कदम से और भी नक्सल कार्यकर्ता आत्मसमर्पण करेंगे और क्या नक्सलवाद पूरी तरह खत्म होगा।

भूपति के कारनामों की सूची

भूपति एक प्रमुख नक्सली नेता था जो कई बड़े नक्सली अभियानों में शामिल रहा है। उसके खिलाफ कई राज्यों में ढेरों मामले दर्ज हैं। भूपति पर छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में बड़े हमलों और साजिशों में शामिल होने के आरोप हैं। वह नक्सली संगठन के शीर्ष नेताओं में से एक था और पोलित ब्यूरो का सदस्य था। भूपति नक्सली संगठन के वित्तीय मामलों को संभालने में भी शामिल था।

भीमा मंडावी हत्याकांड मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) उसकी तलाश कर रही थी। भूपति का नेटवर्क छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में फैला हुआ था। भूपति पर लगभग ₹6 करोड़ का इनाम घोषित था। उसे नक्सली आंदोलन के सबसे बड़े नेताओं में से एक माना जाता था।

आत्मसमर्पण करने का कारण

रिपोर्ट्स की मानें तो भूपति ने यह दावा किया कि हथियारबंद संघर्ष विफल हो गया है और नक्सल आंदोलन को संवाद व शांति की ओर जाना चाहिए। रिपोर्टों में कहा गया कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व के साथ मतभेदों और संघर्षों के चलते उन्होंने हथियार छोड़ने का निर्णय लिया।

भूपति ने उन रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया है कि जनता समर्थन कम हो गया था और नक्सलियों की सोच अब लोगों तक पहुंच नहीं पा रही थी। विश्लेषण बताते हैं कि भूपति के पास शहरी नक्सल नेटवर्क, समर्थक नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स प्रणाली आदि की जानकारी हो सकती है।

Maoist Leader Surrender : आत्मसमर्पण के समय 54 हथियार बरामद किए गए, जिनमें AK‑47, INSAS आदि शामिल हैं। भूपति ने 60 अन्य नक्सल साथियों के साथ गढचिरोली में महाराष्ट्र पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया।