फ्रीज या प्याज में जीवित नहीं रह सकता ब्लैक फंगस! जाने क्या कहते है एक्सपर्ट्स
फ्रीज या प्याज में जीवित नहीं रह सकता ब्लैक फंगस! जाने क्या कहते है एक्सपर्ट्स

टीआरपी डेस्क। प्रदेश में अभी कोरोना का प्रभाव खत्म हुआ भी नहीं कि ब्लैक फंगस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एम्स में मंगलवार को 15 नए मामले सामने आए हैं। इनमें एक महिला की ब्रेन सर्जरी के दौरान मौत और तीन मरीजों की आंखों को निकालने की नौबत आ गई। गौतलब है कि एम्स में अब तक 61 मरीज भर्ती हुए हैं। जिनमें से 19 लोगों का आपरेशन किया गया है। यह नए मरीज रायपुर के साथ ही बिलासपुर, कोरिया, अम्बिकापुर, दुर्ग समेत अन्य जिलों के हैं।

जानकारी अनुसार, एक दिन पहले अस्पताल में भर्ती मनेंद्रगढ़ निवासी पीड़ित महिला की एक दिन पहले मौत हुई। इसके साथ ही ब्लैक फंगस से अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। एम्स के पीआरओ ने बताया कि एक दिन पहले ब्लैक फंगस से जिस महिला की मौत हुई थी। वह पहले कोरोना से पीड़ित थी। लक्षण नजर आने के बाद एम्स में भर्ती किया गया था। सप्ताहभर पहले उसका ऑपरेशन किया गया था।

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महिला को अनियंत्रित शुगर, आंख में सूजन समेत अन्य शिकायतें थीं। वहीं आम्बेडकर अस्पताल में भी ब्लैक फंगस के पांच मामले हैं। जबकि एक संदिग्ध मरीज का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। इधर लगातार बढ़ते ब्लैक फंगस के मारिजों को देखते हुए राज्य सरकार ने एडवाइजरी जारी की है। प्रत्येक अस्पताल को इसकी जानकारी सरकार को उपलब्ध कराना है। इन मरीजों के लिए एम्स और आम्बेडकर अस्पताल में निःशुल्क इलाज की सुविधा है।

बता दें, डायबीटिक या अनियंत्रित डायबीटिज वाले व्यक्ति, स्टेरायड दवाई ले रहे व्यक्ति को या आईसीयू में अधिक समय तक भर्ती रहने से यह बीमारी हो सकती है। यदि इस प्रकार के लक्षण दिखे तो चिकित्सक से तुरंत सम्पर्क करें।

ब्लैक फंगस के लक्षण 

आंख, नाक में दर्द और आंख के चारों ओर लालिमा, नाक का बंद होना, नाक से काला या लाल तरल द्रव्य निकलना, जबड़े की हड्डी में दर्द होना, चेहरे में एक तरफ सूजन होना, नाक, तालु काले रंग का होना, दांत में दर्द, दांतों का ढ़िला होना, धुंधला दिखाई देना, शरीर में दर्द होना, त्वचा में चकते आना, छाती में दर्द, बुखार आना, सांस की तकलीफ होना, खून की उल्टी, मानसिक स्थिति में परिवर्तन आना।

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कैसे करें बचाव 

धूल भरे स्थानों में मास्क पहनकर, शरीर को पूरे वस्त्रों से ढंक कर, बागवानी करते समय हाथों में दस्ताने पहन कर और व्यक्तिगत साफ-सफाई रख कर ब्लैक फंगस के संक्रमण से बच सकते हैं।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।