बगैर जन सुनवाई अंबुजा सीमेंट कोल वाशरी की स्वीकृति हुई रद्द, निको की जनसुनवाई को दिखाकर ले ली थी अनुमति

रायगढ़। तमनार स्थित अंबुजा कोयला खदान में स्थापित होने जा रहे कोल वाशरी की पर्यावरणीय स्वीकृति को एनजीटी ने रद्द करने का आदेश केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को दिया है। याचिकाकर्ता रमेश अग्रवाल ने बताया कि पूर्व में जिस कंपनी को कोल वाशरी की स्वीकृति मिली थी, उसी की आड़ में अम्बुजा ने नए कॉल वाशरी की अनुमति ले ली थी।

पूर्व में निको कंपनी को मिली थी खदान

जन चेतना समिति के सदस्य व गोल्मेन इनवायरमेंट प्राइज़ विजेता रमेश अग्रवाल की याचिका पर एनजीटी ने यह अहम् फैसला सुनाया। रमेश अग्रवाल ने TRP न्यूज़ को बताया कि वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा देश भर में कोल माइंस का आबंटन रद्द कर दिया था। इससे पूर्व जायसवाल निको के पास तमनार में गारे 4/4 – 4/8 कोल माइंस थी। 2013 में जायसवाल निको को कोल वाशरी लगाने की पर्यावरणीय स्वीकृति पर्यावरण मंत्रालय द्वारा विधिवत तरीके से दी गई थी।

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गलत तरीके से ली गई थी अनुमति

बाद में हुई नीलामी में गारे 4/8 कोयला खदान अंबुजा सीमेंट को मिल गई । अंबुजा सीमेंट द्वारा पूर्व में कोल वाशरी के लिए जायसवाल निको को मिली स्वीकृति को अपने नाम से एक्सटेंशन करने का आवेदन दिया था| पूर्व की स्वीकृति के बारे में न तो अंबुजा सीमेंट ने बताया और न ही केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने ध्यान दिया कि वर्तमान में केवल एक ही खदान अंबुजा के पास है जबकि पूर्व में दो खदानों के आधार पर कोल वाशरी की स्वीकृति दी गई थी। इस तरह अंबुजा को सन 2020 को कोल वाशरी बनाने की स्वीकृति दे दी गई।

जो प्लांट अस्तित्व में नहीं, उसके आधार पर

प्रस्तावित कोल वाशरी से निकलने वाले फाइन व् रिजेक्ट्स कोयले के उपयोग हेतु हमीरपुर में 600 मेगावाट का पावर प्लांट भी प्रस्तावित किया गया था, जो कि कभी लगा ही नहीं। इस मामले में पर्यावरण मंत्रालय ने एनजीटी के उस आदेश की भी अनदेखी की जिसमें घरघोड़ा और तमनार में नये उद्योग लगाने पर पाबंदी लगा दी गई है ।

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ओवर साइट कमेटी की रिपोर्ट पर फैसला

जन चेतना समिति के सदस्य रमेश अग्रवाल द्वारा इस मामले में दायर याचिका पर 16 मार्च 2021 को हुई पहली सुनवाई में ही एनजीटी ने मामला ओवरसाईट कमेटी को जांच हेतु सौंप दिया। एनजीटी द्वारा गठित इस कमेटी में कई केन्द्रीय विभागों के साथ साथ रायगढ़ जिला कलेक्टर भी शामिल हैं। एनजीटी को सौंपी अपनी रिपोर्ट में ओवरसाईट कमेटी ने कहा कि रमेश अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत याचिका के तथ्य पूर्णतया सत्य हैं और केन्द्रीय वन पर्यावरण और क्लाइमेट चेंज मंत्रालय को स्वीकृति रद्द कर दी चाहिये। कमेटी की रिपोर्ट मिलने पर एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय द्वारा दी गई कोल वाशरी की स्वीकृति रद्द करने का आदेश पारित कर दिया।

पर्यावरण मंत्रालय की भूमिका हुई उजागर

रमेश अग्रवाल का कहना है कि जन सुनवाई और इआईए से बचने के लिए उद्योग तरह तरह के हथकंडे अपनाते हैं, इसका खुलासा हो गया। इसमें पर्यावरण मंत्रालय की भूमिका भी अहम् होती है। गौरतलब है कि गोल्मेन इनवायरमेंट पुरस्कार प्राप्त रमेश अग्रवाल ने प्रदूषण से जूझ रहे रायगढ़ जिले में उद्योगों द्वारा की जा रही मनमानी पर रोक लगाने के लिए काफी संघर्ष किया है।

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रमेश अग्रवाल
रमेश अग्रवाल, जन चेतना समिति सदस्य व गोल्मेन इनवायरमेंट प्राइज विजेता

इस कार्य में सूचना का अधिकार उनके लिए मददगार साबित हुआ। अपने संगठन जन चेतना के माध्यम से वे लम्बी क़ानूनी लड़ाई लड़ते आ रहे हैं, जिसका प्रतिफल यह है कि अनेक मामलों में अदालतों का फैसला उनके पक्ष में आया है। NGT का वर्तमान में आया फैसला भी इसी की एक बानगी है।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।