रायपुर। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और 500 से अधिक किसान संगठनों के किसान 30 जनवरी को उपवास पर रहेंगे। उन्होंने आम किसानों से भी किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ उपवास रखने का आह्वान किया है।

छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन से जुड़े घटक संगठनों के सदस्य 26 जनवरी को दिल्ली की किसान रैली में सरकार प्रायोजित हिंसा के खिलाफ, किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ संघर्ष को तेज करने और शहीद किसानों की स्मृति और उनके सम्मान में दिन भर का उपवास करेंगे।

बेनकाब हुई संघ-भाजपा सरकार की साजिश

छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के संयोजक सुदेश टीकम और संजय पराते, आलोक शुक्ला, नंद कश्यप, आनंद मिश्रा आदि ने कहा है कि गांधीजी के अहिंसात्मक तरीके और सत्याग्रह के सिद्धांत के आधार पर पिछले दो माह से चल रहे शांतिपूर्ण किसान आंदोलन को फासीवादी और हिटलराना तरीके से तोड़ने की संघ-भाजपा सरकार की साजिश बेनकाब हो चुकी है।

इस ऐतिहासिक आंदोलन को बदनाम करने के लिए जिस प्रकार के घटिया हथकंडे यह सरकार अपना रही है, उसके खिलाफ आम जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता ही जा रहा है और आम जनता के विभिन्न तबकों का समर्थन उन्हें मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इस देशव्यापी आंदोलन के खिलाफ सरकार प्रायोजित हिंसा के बावजूद यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि इन तीनों किसान विरोधी कानूनों को वापस नहीं लिया जाता।

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आंदोलन में 150 से ज्यादा किसानों ने दी शहादत

इस देशव्यापी किसान आंदोलन के खिलाफ मोदी सरकार द्वारा किये जा रहे दुष्प्रचार, दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों पर हमले और किसान संगठनों की एकता को तोड़ने की साजिश की तीखी निंदा करते हुए छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के नेताओं ने कहा है कि यह आम किसानों की मांगों के लिए, आम जनता का, आम जनता द्वारा संचालित आंदोलन है।

इस आंदोलन में 150 से ज्यादा किसानों ने अभी तक शहादत दी है और सरकार द्वारा कानून वापस लिए जाने तक यह शांतिपूर्ण आंदोलन और शहादतें जारी रहेगी। किसान सभा नेताओं ने कहा कि बिना राय-मशविरा किये गैर-लोकतांत्रिक ढंग से पारित किये गए कानून की आम जनता के लिए कोई वैधता नहीं है और वह उसे मानने के लिए बाध्य नहीं है।

गोडसे को पूजने वाली संघ-भाजपा की फासीवादी सरकार कुचलना चाहती है किसानों के स्वराज का सपना

छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन ने प्रदेश के आम किसानों से अपील की है कि कल एक समय का भोजन त्यागकर मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करें। 30 जनवरी महात्मा गांधी की शहादत दिवस भी है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत में किसानों के स्वराज का सपना देखा था। गोडसे को पूजने वाली संघ-भाजपा की फासीवादी सरकार उनके इसी सपने को कुचलना चाहती है।

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उन्होंने कहा कि यह संघर्ष देश की अर्थव्यवस्था को कारपोरेटीकरण से बचाने का और खाद्यान्न आत्मनिर्भरता और सुरक्षा को बचाने का देशभक्तिपूर्ण संघर्ष है, जबकि संघी गिरोह इस देश को साम्राज्यवाद के हाथों बेचना चाहता है। हमारे देश के किसान केवल अपनी खेती-किसानी बचाने की लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, वे इस देश की स्वतंत्रता और अस्मिता की रक्षा के लिए भी लड़ रहे हैं।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।