नई दिल्ली। East Ladakh dispute भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की आठवें दौर की बातचीत अगले सप्ताह हो सकती है जिसमें पूर्वी लद्दाख से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पर बातचीत को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जा सकता है जहां आने वाले समय में कड़ी सर्दियां पड़ने वाली हैं। सरकार के सूत्रों ने यह जानकारी दी।

इससे पहले 12 अक्टूबर को सातवें दौर की वार्ता के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के टकराव वाले बिंदुओं से सैनिकों की वापसी में कोई सफलता नहीं मिली है। दोनों पक्षों ने कहा था कि सातवें दौर की बातचीत ‘सकारात्मक और फलदायक रही। एक सूत्र ने कहा, ”आठवें दौर की सैन्य वार्ता इस सप्ताह हो सकती है। तारीख को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।”

सातवें दौर की वार्ता के बाद दोनों देशों की सेनाओं का संयुक्त प्रेस बयान

सातवें दौर की वार्ता के एक दिन बाद दोनों देशों की सेनाओं ने संयुक्त प्रेस बयान में कहा था, ”दोनों पक्षों ने सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से संवाद और संचार बनाए रखने और जल्द से जल्द सैनिकों की वापसी के लिए पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने को लेकर सहमति जताई।

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गत 29 और 30 अगस्त की दरम्यानी रात को इलाके में पीएलए के सैनिकों द्वारा भारतीय सैनिकों को डराने-धमकाने की कोशिश के बाद भारतीय सैनिकों ने पैंगोंग झील के दक्षिणी तट के आसपास स्थित मुखपारी, रेजांग ला और मगर पहाड़ी इलाकों में नियंत्रण हासिल कर लिया था।

गत 21 सितंबर को छठे दौर की सैन्य वार्ता के बाद, दोनों पक्षों ने कई फैसलों की घोषणा की थी, जिसमें अग्रिम क्षेत्रों में और अधिक सैनिकों को नहीं भेजने, एकतरफा रूप से जमीन पर स्थिति को बदलने से बचने और ऐसी कोई भी कार्रवाई करने से बचना शामिल था जिससे मामला और जटिल हो जाए।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।