छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
Breaking News : हाईकोर्ट ने शिक्षक और हेडमास्टर के प्रमोशन पर लगाई रोक, राज्य शासन को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में मांगा जवाब

टीआरपी डेस्क। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 91 को लेकर हाईकोर्ट जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। इसके अनुसार सीआरपीसी की धारा 154 के अंतर्गत एफआईआर के पूर्व प्रारंभिक जांच में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 91 लागू नहीं होगी। बिलासपुर जिले के सरकंडा थाने में छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन बोर्ड के डायरेक्टर ने राजेश्वर शर्मा के खिलाफ लिखित शिकायत की थी।

शिकायत में कहा गया था कि राजेश्वर ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है। शिकायत के आधार पर सरकंडा पुलिस ने राजेश्वर शर्मा को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के तहत नोटिस जारी कर बार-बार थाने बुलाया और प्रताड़ित किया। प्रताड़ना से तंग आकर राजेश्वर शर्मा ने अधिवक्ता सौरभ शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें बताया कि पुलिस बिना एफआईआर दर्ज किए उसके खिलाफ धारा 91 का दुरुपयोग करते हुए दिन रात थाने में बुलाकर प्रताड़ित करती है।

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इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इसमें हाईकोर्ट ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा 154 के अंतर्गत एफआईआर के पूर्व प्रारंभिक जांच में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 91 लागू नहीं होगी।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।