टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ के गोधन न्याय योजना के तहत अब केंद्र सरकार भी गोबर-धन योजना लेकर आयी है। गोधन न्याय योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा गाय पालने वाले पशुपालक किसानो से गाय का गोबर ख़रीदा जाता है। फिर गोबर का उपयोग सरकार वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के लिए करती है।

गोधन न्याय योजना की तरह बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुप्रचारित गोबर-धन योजना की एकीकृत पोर्टल का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छता के नाम पर एक नई क्रांति लेकर आए हैं। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की शुरुआत गांव से की गई।

ओपन डेफकेशन जो सालों से चुनौती बना हुआ था उसे निर्धारित लक्ष्य से ग्यारह साल पहले ही पूरा कर लिया गया है। गांव में गोबर एक बड़ी चुनौती है। यदि गांव से गोबर हट जाए तो स्वच्छता का नया पैमाना गांव में देखने को मिलेगा।

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दो करोड़ तक बढ़ेगी किसानों की आमदनी

केन्द्रीय मत्सयपालन एवं पशुपालन मंत्री गिरिराज सिंह ने इस मौके पर कहा- प्रधानमंत्री की नीति और नियत को स्वच्छता के साथ जोड़ा गया है। बायो गैस लगने से गांव के लोगों के जीवन में बहुत परिवर्तन आया है। किसानों की आमदनी दो करोड़ तक बढ़ गई है।

वहीं गैस एवं पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद प्रधान ने कहा कि गोबर गैस बनाने के लिए सरकार ने काफी कुछ किया है। इस पोर्टल में मल्टी मिनिस्ट्री की जानकारी रहेगी। किसी भी तरह की जानकारी इस पोर्टल से आसानी से मिल सकेगी है।

धर्मेंद प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री की योजना है कि आने वाले पांच साल में इथेनॉल और बायोगैस से जो इनकम होगी उसे किसानों के लिए ही प्रयोग किया जाएगा। जिससे एक लाख करोड़ की अतिरिक्त आय किसानों को मिलेगी।

कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने इस पोर्टल को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि आज ओडीएफ प्लस के मुख्य घटक को आगे बढ़ाने के लिए गोबर-धन पोर्टल को शुरू किया गया है। सरकार ने किसानों से गोबर और फसलों के अवशेष उचित दाम पर खरीदने के लिए ही गोबर-धन योजना शुरू की है।

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क्या है, गोबर-धन योजना?

गोबर-धन योजना के तहत किसानों से गोबर, खेत में बचे अवशेष आदि को खरीदकर उसे बायोगैस, CNG और कम्पोस्ट खाद में बदलने का काम करेगी। इस योजना का अहम मकसद गांवों को स्वच्छ बनाना और किसानों की आमदनी बढाना है।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।