DIG
केंद्रीय बलों में DIG के 251 में से 186 पद खाली

टीआरपी डेस्क। केंद्रीय पुलिस संगठन ‘सीपीओ’ और केंद्रीय अर्धसैनिक बल ‘सीएपीएफ’ में आईपीएस के लिए रिजर्व डीआईजी के अधिकांश पद खाली पड़े हैं। इससे इन बलों का काम प्रभावित हो रहा है। दूसरी तरफ खाली पड़े पदों पर कैडर अधिकारियों को स्थायी पदोन्नति भी नहीं दी जा रही। जब आईपीएस अफसर ‘डीआईजी’ के पद पर ज्वाइन नहीं करता है तो कुछ पदों को कैडर अधिकारियों की तरफ डायवर्ट कर दिया जाता है। यहां पर दिक्कत यह है कि ये पद अस्थायी तौर पर कैडर अधिकारियों को दिए जाते हैं। अगर स्थायी तौर पर उनकी नियुक्ति होती है तो उन्हें समय रहते प्रमोशन मिल सकता है, लेकिन ऐसा नहीं होता।

डीआईजी के पद वर्षों तक खाली रहते हैं, मगर उन्हें स्थायी तौर पर कैडर अधिकारियों को नहीं दिया जाता। केंद्रीय गृह मंत्रालय में 9 जून की स्थिति के मुताबिक, बीएसएफ में आईपीएस डीआईजी के लिए 26 पद आरक्षित हैं। इनमें से 24 खाली पड़े हैं। सीआरपीएफ में 38 पद हैं, लेकिन एक ही पद भर सका है। सीआईएसएफ में 20 में से 17, आईटीबीपी में 10 में से 7 और केंद्रीय जांच एजेंसी ‘सीबीआई’ में 34 में से 22 पद रिक्त पड़े हैं।

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डीआईजी के पद पर जाने से कतराते हैं आईपीएस

मौजूदा स्थिति के अनुसार, सीपीओ/सीएपीएफ में आईपीएस डीआईजी का टोटा हो गया है। डीआईजी के 251 पद केवल ‘आईपीएस’ के लिए स्वीकृत किए गए हैं। हैरानी की बात ये है कि अभी तक 186 पद खाली पड़े हैं। यह स्थिति तब है, जब अधिकांश आईपीएस अफसरों को देर सवेर को मनचाही पोस्टिंग मिल जाती है। इसके बावजूद वे केंद्रीय पुलिस संगठन या अर्धसैनिक बलों में नहीं आना चाहते। इसके पीछे यह कारण बताया गया है कि इन बलों में डीआईजी का पद ‘फील्ड पोस्टिंग’ के तहत आता है। हालांकि कुछ अफसर हेडक्वार्टर में भी पोस्टिंग ले लेते हैं, लेकिन ज्यादातर डीआईजी को दूरदराज की यूनिटों में जगह मिलती है।

बीएसएफ में पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगते लंबे बॉर्डर की सुरक्षा के लिए मुश्किल जगहों जैसे, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल व उत्तर पूर्व के जोखिम भरे इलाकों में तैनाती होती है। यहां मेट्रो सिटी मिलने की गुंजाइश बहुत कम रहती है। ऐसा ही कुछ सीआरपीएफ में देखने को मिलता है। इस बल में नक्सल और आतंकवाद से मुकाबले के अलावा देश में कानून व्यवस्था की अन्य ड्यूटी भी संभालनी पड़ती हैं। यही वजह है कि आईपीएस, ‘डीआईजी’ के पद पर ज्वाइन करने से कतराते हैं।

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पिछले साल भी ‘डीआईजी’ के पद रहे थे खाली

केंद्रीय पुलिस संगठन/केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में पिछले साल भी आईपीएस डीआईजी के 158 पद खाली पड़े थे। दिसंबर 2020 की स्थिति के अनुसार, आईजी के 140 पदों में से 30 पद खाली रह गए थे। आईपीएस-डीआईजी के लिए स्वीकृत 251 पदों में से 158 पद नहीं भर सके थे। केंद्र सरकार के अनेक प्रयासों के बावजूद ज्यादातर आईपीएस, इस पद पर आने के लिए राजी नहीं हुए। बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद का कहना है, आईपीएस अधिकारी को मन माफिक पोस्टिंग चाहिए होती है। अगर वह नहीं मिलती है, तो वे ऐसे पद पर ज्वाइन नहीं करते।

सीएपीएफ में डीआईजी को ज्यादातर फील्ड पोस्टिंग पर भेजा जाता है, इसलिए डीआईजी के ज्यादातर पद खाली पड़े रहते हैं। खास बात ये है कि पिछले दिसंबर में डीआईजी के पद ज्वाइन न करने वाले आईपीएस की संख्या 158 थी, जो अब बढ़कर 186 हो गई है। सीएपीएफ में कैडर अधिकारियों को समय पर प्रमोशन नहीं मिलता। कमांडेंट और डीआईजी बनने में उन्हें लगभग 25 साल लग जाते हैं। अगर आईपीएस डीआईजी के खाली पड़े पदों को स्थायी तौर पर कैडर अधिकारियों में डायवर्ट कर दिया जाए तो उन्हें समय पर परमोशन मिल सकेगी और खाली पड़े डीआईजी के पद भी भरे जा सकेंगे।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।