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Ancient Ganesha temples Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ की धरोहर, 3 हजार फीट ऊंचे पहाड़ से लेकर बारसूर तक, जानें राज्य की प्राचीन गणेश प्रतिमाओं का इतिहास

Ancient Ganesha Temples Chhattisgarh Dholkal Barsoor Ganesh History
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Ancient Ganesha temples Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है, जहां दंतेवाड़ा जिले के बारसूर और ढोलकल से लेकर बिलासपुर तथा सरगुजा तक हजार वर्ष पुरानी प्राचीन गणेश प्रतिमाएं स्थापित हैं। दसवीं से ग्यारहवीं शताब्दी के नागवंशी और कलचुरी राजवंशों के काल में तराशी गईं ये प्रतिमाएं न केवल भारतीय स्थापत्य कला की अनूठी मिसाल हैं, बल्कि देश भर के पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र भी बनी हुई हैं।

बस्तर के ढोलकल में 3,000 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थापित गणेश प्रतिमा से लेकर बारसूर के विशालकाय एकश्म मंदिर राज्य की इस प्राचीन शिल्प-परंपरा की गवाही देते हैं।

ढोलकल गणेश: बैलाडीला की पहाड़ी पर स्थापित 3000 फीट ऊंचा ऐतिहासिक स्थल

दंतेवाड़ा जिले की बैलाडीला पहाड़ी श्रृंखला में समुद्र तल से लगभग 3,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित ढोलकल गणेश प्रतिमा ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। छिंदक नागवंश शासनकाल (10वीं-11वीं शताब्दी) में स्थापित ग्रेनाइट पत्थर की यह 3 फीट ऊंची प्रतिमा ललित मुद्रा में तराशी गई है। पुरातत्वविदों के अनुसार नागवंशी राजाओं ने बस्तर अंचल की सुरक्षा और समृद्धि के प्रतीक स्वरूप इस दुर्गम पहाड़ी पर गणेश जी की स्थापना करवाई थी।

बारसूर के विशाल जुड़वां गणेश: स्थापत्य शिल्प का अद्भुत नमूना

दंतेवाड़ा के ऐतिहासिक नगर बारसूर में स्थित विशाल गणेश प्रतिमाएं दुनिया की सबसे पुरानी और विशालकाय मूर्तियों में गिनी जाती हैं। यहां एक ही विशाल पत्थर को तराशकर दो गणेश प्रतिमाएं बनाई गई हैं, जिनमें बड़ी प्रतिमा लगभग 8 फीट और छोटी प्रतिमा 6 फीट ऊंची है। ग्यारहवीं शताब्दी में नागवंशी शासन के दौरान निर्मित यह परिसर प्राचीन भारतीय स्थापत्य और मूर्तिकला का बेजोड़ उदाहरण प्रस्तुत करता है।

रतनपुर और दीपाडीह: स्थापत्य और पुरातात्विक महत्व

बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक नगर रतनपुर स्थित महामाया मंदिर परिसर में कलचुरी कालीन प्राचीन गणेश प्रतिमाएं मौजूद हैं, जो उस दौर के उच्च स्तरीय शिल्पशास्त्र को दर्शाती हैं। वहीं सरगुजा जिले के दीपाडीह पुरातात्विक स्थल की खुदाई में नौवीं से दसवीं शताब्दी की दुर्लभ बहुभुजी गणेश प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं। ये प्रतिमाएं छत्तीसगढ़ के प्राचीन धार्मिक इतिहास और समृद्ध कला संस्कृति की कहानी बयां करती हैं।

5 FAQs (प्रश्न और उत्तर):

प्रश्न: ढोलकल गणेश प्रतिमा छत्तीसगढ़ में कहां स्थित है?

उत्तर: ढोलकल गणेश प्रतिमा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में बैलाडीला पहाड़ी श्रृंखला पर समुद्र तल से 3,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

प्रश्न: बारसूर की विशाल गणेश प्रतिमाएं किस राजवंश के शासनकाल में बनाई गई थीं?

उत्तर: बारसूर की विशाल जुड़वां गणेश प्रतिमाएं 11वीं शताब्दी में छिंदक नागवंश के शासनकाल में बनाई गई थीं।

प्रश्न: ढोलकल गणेश प्रतिमा किस पत्थर से निर्मित है?

उत्तर: ढोलकल गणेश प्रतिमा ग्रेनाइट पत्थर को तराशकर बनाई गई है।

प्रश्न: रतनपुर और दीपाडीह में पाई जाने वाली गणेश प्रतिमाएं किस काल की हैं?

उत्तर: रतनपुर की प्रतिमाएं कलचुरी कालीन हैं तथा दीपाडीह की बहुभुजी प्रतिमाएं 9वीं से 10वीं शताब्दी की मानी जाती हैं।

प्रश्न: बारसूर में स्थित बड़ी गणेश प्रतिमा की ऊंचाई कितनी है?

उत्तर: बारसूर में स्थापित एक ही पत्थर से बनी बड़ी गणेश प्रतिमा की ऊंचाई लगभग 8 फीट है।

Deeksha Mishra
लेखक / पत्रकार:

Deeksha Mishra

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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