Electricity Bill Half Scheme: छत्तीसगढ़ में बिजली बिल की रियायतों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने एक तीखे बयान में साय मंत्रिमंडल के 200 यूनिट बिजली छूट को जारी रखने के निर्णय को पूरी तरह कागजी करार दिया है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले से प्रदेश की आम जनता को जमीनी स्तर पर कोई राहत नहीं मिलने वाली है, क्योंकि यह योजना कई पेचीदा शर्तों में उलझकर रह गई है।
201 यूनिट होते ही शून्य हो जाती है सारी छूट
कांग्रेस नेता ने इस योजना की मुख्य खामी उजागर करते हुए बताया कि 200 यूनिट तक की यह छूट तभी तक प्रभावी मानी जाती है, जब तक बिजली की कुल खपत 200 यूनिट के भीतर सीमित रहे। यदि किसी उपभोक्ता की खपत गलती से भी 201 यूनिट तक पहुंच जाती है, तो मिलने वाली पूरी छूट एक झटके में शून्य हो जाती है। इस कठोर शर्त के कारण उपभोक्ताओं को कोई वास्तविक वित्तीय लाभ नहीं मिल पा रहा है।
स्मार्ट मीटर और मुनाफाखोरी के लालच पर बड़ा सवाल
सुशील आनंद शुक्ला ने राज्य सरकार द्वारा घरों में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर की तेज रीडिंग के कारण अमूमन हर उपभोक्ता की खपत 200 यूनिट से ऊपर चली जाती है। सरकार एक तरफ छूट का दावा करती है और दूसरी तरफ स्मार्ट मीटर व नए पैंतरों के जरिए जनता से अनाप-शनाप बिजली बिल वसूल रही है, जो उपभोक्ताओं का मुंह चिढ़ाने जैसा है।

6 लाख उपभोक्ताओं को फायदा, कुल आंकड़े हैं 65 लाख से ज्यादा
कांग्रेस ने सरकार के दावों की पोल खोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार यह ढिंढोरा पीट रही है कि इस योजना से 6 लाख उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा, जबकि वास्तविकता यह है कि छत्तीसगढ़ में कुल घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 65 लाख से अधिक है। इसके अलावा, इस 50 प्रतिशत छूट का लाभ भी केवल 1 वर्ष के लिए ही सीमित किया गया है, जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की ‘बिजली बिल हाफ’ योजना में ऐसी कोई हताश करने वाली शर्तें नहीं थीं।
भाजपा शासन में पांचवीं बार बढ़ी बिजली की दरें और अधिभार
आंकड़े गिनाते हुए कांग्रेस ने बताया कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद से लगातार पांचवीं बार बिजली के दाम बढ़ाए गए हैं। इस साल जुलाई में ही घरेलू उपभोक्ताओं के दाम 30 से 50 पैसे, गैर-घरेलू के 20 से 40 पैसे और कृषि पंपों की बिजली 40 पैसे महंगी की गई है। इसके अलावा 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार (MPPS) जोड़कर कुल 31.23 प्रतिशत तक बिजली के दाम बढ़ाए जा चुके हैं, जिससे आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।



