कोरबा। ऊर्जानगरी से होकर गुजरने वाली हसदेव नदी में दुर्लभ प्रजाति का ऊदबिलाव मिला है, जिसे “यूरेशियन ओटर” कहा जाता है। इस ऊदबिलाव को किसी युवक ने रखा हुआ था, जिसे वह लोगों को डॉग की प्रजाति का बता रहा था। कोरबा DFO प्रियंका पांडेय ने बताया कि संबंधित इलाके में इस ऊदबिलाव की फैमिली का पता लगाया जा रहा है।

मेडिकल स्टोर पहुंचा युवक डॉग बता रहा था ऊदबिलाव को

कोरबा के निहारिका क्षेत्र में संचालित वेटनरी मेडिकल स्टोर में दवाई लेने के लिए एक युवक इस ऊदबिलाव को लेकर पहुंचा और पूछने पर इसे डॉग की ब्रीड बताया, मगर स्टोर संचालक को समझ में आ गया, फिर उसने कोरबा के चर्चित सर्प मित्र अविनाश यादव को इसकी सूचना दे दी। अविनाश ने बताया कि जिस युवक के पास ऊदबिलाव मिला उसने इसके बांकीमोंगरा क्षेत्र में मिलने की जानकारी देते हुए बताया कि उसने इसे सौ रूपये में ख़रीदा था।

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ठन्डे प्रदेशों में पाया जाता है यह जीव

DFO प्रियंका पांडेय ने बताया कि जब बाद में वाइल्ड वालों से संपर्क किया गया तब पता चला कि यह दुर्लभ प्रजाति का ऊदबिलाव है, जिसे यूरेशियन ओटर कहा जाता है। DFO के मुताबिक यूरेशियन ओटर जलीय जीवन शैली वाला जीव है और भारत के उत्तरी ठंडे पहाड़ी इलाके तथा दक्षिण के कुछ क्षेत्रों में पाया जाता है। कोरबा के हसदेव नदी में मछुआरों के जाल में फंसकर यह जीव पकड़ में आ गया, चूँकि यह उभयचर है इसलिए यह पानी के बाहर भी रह लेता है। इसकी एक विशेषता यह भी है की यह साफ पानी के नदी-नालों में रहता है।

तस्करी से भी जुड़ा हो सकता है मामला

DFO प्रियंका पांडेय ने इस बात की सम्भावना से इंकार नहीं किया कि यह मामला वन्य जीवों की तस्करी से भी जुड़ा हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस जीव का फर बहुत मुलायम होता है, इसलिए पूर्व में बड़े पैमाने पर इसकी तस्करी हुई, जिससे यह मासूम जीव आज विलुप्तप्राय की श्रेणी में आ गया है। प्रियंका पांडेय ने कहा कि यह कोरबा के लोगो के लिए गर्व की बात है कि यहां इस तरह का दुर्लभ जीव मिला है। फ़िलहाल इसके संरक्षण की जरुरत है, जिसके लिए लोगों को जागरूक करना होगा।

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भारत में दूसरी जगह मिला यह जीव

स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड की सदस्य मीतु गुप्ता ने इस ऊदबिलाव के मिलने की जानकारी ट्वीट करते हुए बताया है कि इसके पहले जून 2016 में मध्य प्रदेश के सतपूड़ा टाइगर रिजर्व एरिया में यह जीव मिला था। मध्य भारत के इलाके में दूसरी बार यह कोरबा क्षेत्र में देखा गया है।
दुर्लभ प्रजाति का यूरेशियन ओटर (ऊदबिलाव), वन विभाग

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।