INDIAN RAILWAYS:

आप भारत के किसी भी रेलवे स्टेशन पर चले जाएं. वहां साफ वॉशरूम मिले न मिले, खाने पर

मंडराती मक्खियां मिलें न मिलें, पीने के पानी के नल के पास थूक के पीक दिखे न दिखे, चूहे

ज़रूर दिखेंगे. वो भी नॉर्मल साइज़ वाले नहीं, बिल्लियों के साइज़ के बड़े-बड़े चूहे. इंडियन

रेलवे INDIAN RAILWAY  खुद इन चूहों से खासा परेशान रहता है. इनसे निपटने के लिए

नए-नए रास्ते भी अपनाता है और खूब रुपये भी खर्च करता है. एक RTI से मिली जानकारी के

मुताबिक, पश्चिम रेलवे ने बीते तीन साल में चूहों का खात्मा करने यानी रोडेंट कंट्रोल के लिए 1.52

करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च किए हैं. इतने पैसे खर्च करने का रिजल्ट ये निकला कि 5457 चूहे मारे

गए. पढ़कर लगेगा- वाह कमाल कर दिया, पांच हज़ार से ज्यादा चूहे मार दिए.

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।