शासन की एडवाइजरी या संविदा कर्मचारियों की आफत

रायपुर। शासन के एडवाइजरी ने संविदा कर्मचारियों की परेशानी बढ़ा दी है। जिसके अनुसार संविदा अवधि खत्म होने या उन्हें हटाए जाने पर में कर्मचारियों को अपील करने का अधिकार नहीं है। सरकारी विभागों में भ्रम की स्थिति को देखते हुए सरकार ने समस्त विभागों को पत्र के जरिए इसकी जानकारी दी है।

दरअसल सरकार ने न्यायालय अपर आयुक्त बिलासपुर संभाग के आदेश को अमान्य कर दिया है। जिसमें कविता कुर्रे नाम की महिला ने जनपद पंचायत सक्ती सीईओ के आदेश को निरस्त करते हुए प्रस्तुत पुनरीक्षण स्वीकार कर लिया था। यह आदेश 21 सितंबर 2016 के जारी किया गया था। अपर आयुक्त न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई 19 अप्रैल 2018 को की थी। इस मामले में सरकार द्वारा अपर आयुक्त से जानकारी मांगी गई। जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि संविदा कर्मचारी के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं थी। इस वजह से ही अपील स्वीकार की गई थी।

इसके बाद छत्तीसगढ़ सामान्य प्रसाशन विभाग द्वारा सभी विभागों को पत्र जारी किया गया है। इस पत्र में कहा गया कि अपर आयुक्त के आदेश से प्रतीत होता है कि विभागों कार्यालयों को इस संबंध में भ्रम की स्थिति है। संविदा पर नियुक्त व्यक्ति की संविदा सेवा समाप्त करने पर अथवा संविदा नियुक्ति की अवधि में वृद्धि न करने पर संबंधित व्यक्ति द्वारा अपील की जाती है तो क्या उस पर विचार किया जा सकता है अथवा नहीं?

पत्र में साफतौर पर बताया गया है कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (संविदा नियुक्ति) नियम 2012 में अपील का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में यदि कोई अपील प्रस्तुत करता है तो उस पर विचार नहीं किया जाएगा। आनन फानन में शासन द्वारा जारी की गई एडवाइजरी संविदा कर्मचारियों के लिए समझ से परे हैं। शासन ने बचाव का कोई विकल्प ही नहीं छोड़ा है।

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