नई दिल्ली। इंग्लैंड में वर्ल्ड कप क्रिकेट शुरू हो चुका है। वैसे तो भारत और पाकिस्तान का मुकाबला 16 जून को होग, मगर उससे पहले ही भारतीय सेना ने पाकिस्तानी पिच पर यॉर्कर गेंद डालने की तैयारी शुरू कर दी है। और ये यॉर्कर टीम इंडिया के गेंदबाज नहीं बल्कि भारतीय सेना डालने जा रही है।

वो भी पाकिस्तानी सीमा से लगती सरहदी पिच पर। बस यूं समझ लीजिए कि ये यॉर्कर गेंद इतनी घातक है कि कश्मीर में छुपे आतंकियों की खटिया खड़ी कर देगी। बताया जा रहा है कि इस वीडियो सर्विलांस बॉल की कीमत करीब 70 लाख रुपए है। क्यों है न कमाल की बॉल?

क्या है इस बॉल की खासियत

आपके मन में इस छोटी सी गेंद को लेकर जो भी सवाल उठ रहे हैं, हम उनका जवाब एक -एक कर के आपको देंगे, और आपको ये भी बताया जाएगा कि कैसे ये गेंद आतंकियों पर कहर बरपाने वाली है। मगर पहले देखिए कि ये गेंद कितनी करामाती है। ये घास पर चल सकती है।

रोड पर दौड़ सकती है। ऊबड़-खाबड़ रास्ते भी इसके लिए मुश्किल नहीं पैदा कर सकते। ये मिट्टी पर भी रेंगती है। बर्फ में फिसलती है। पानी में तैरती है। ये आपके बगल से निकल जाएगी और आपको पता भी नहीं चलेगा। ये लुढ़कते -लुढकते कहीं भी पहुंच सकती है।

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https://youtu.be/zhBM0wnMzCo

 

जानिए असल में ये है क्या:

जिसे आप अब तक मामूली गेंद समझ रहे थे वो दरअसल वीडियो सर्विलांस बॉल है। जिसके दोनों तरफ कैमरे लगे हैं जो अपने इर्द गिर्द 360 डिग्री के एंगल से वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं। कमाल तो ये है कि ये करामाती गेंद वीडियो के साथ साथ आडियो रिकार्डिंग भी करता है।

यानि इसके सामने जो दिखेगा वो भी फंसेगा और जो बोलेगा वो भी पकड़ा जाएगा। रात और दिन की इसके लिए कोई पाबंदी नहीं है। ये जितना दिन में काम कर सकता है उतना ही रात में असरदार है। इसमें जो लेंस लगे हैं वो रात में भी रिकॉर्डिंग कर सकते हैं। वो भी छोटी मोटी रिकॉर्डिंग नहीं। लंबी रिकॉर्डिंग। ये वीडियो सर्विलांस बॉल दो घंटे तक लगातार काम कर सकती है।

कौन है गार्डबॉट:

अब आइये आपको बताते हैं कि इस वीडियो सर्विलांस बॉल का भारत से क्या कनेक्शन है। दरअसल आतंकी गतिविधियों से जूझ रहे कश्मीर में सरकार ने आतंकियों से निपटने के लिए चलाए जा रहे आॅपरेशन्स में इस नई तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है। यूं तो आमतौर पर इसे वीडियो सर्विलांस बाल कहा जाता है मगर इसका नाम गार्डबॉट है।

आसान लफ्जों में इसे आप करामाती गेंद कह सकते हैं। जिसके बीच में एक वीडियो सर्विलांस सिस्टम है। जिसका इस्तेमाल कश्मीर पुलिस घाटी में छुपे आतंकियों का पता लगाने और उनसे मुठभेड़ के दौरान मौके का जायजे लेने में किया जा सकेगा।

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ताकि कम वक्त में और सटीक तरीके से आतंकियों को ठिकाने लगाया जा सके। ऐसा माना जा रहा है कि ये वीडियो सर्विलांस सिस्टम जल्द ही कश्मीर पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा।

कहां आएगी काम:

अब तक मुठभेड़ के दौरान मौका-ए वारदात पर सिर्फ ड्रोन कैमरों से नजर रखी जाती थी। इनसे पता लगाया जाता था कि आतंकी किस दिशा में छुपे हुए हैं। उनकी गतिविधियां क्या हैं। मगर इस वीडियो सर्विलांस बॉल से उनकी सटीक लोकेशन जानने के अलावा वो क्या बात कर रहे हैं

उसका भी पता लगाया जा सकेगा। माना जा रहा है कि कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ के वक्त ये वीडियो सर्विलांस सिस्टम काफी मददगार साबित होगा।

और क्या-क्या खूबियां हैं इसमें:

अब आइये आपको बताते हैं कि आतंकियों की चुगली करने के अलावा इस करामाती गेंद की और क्या क्या खूबियां हैं। इस गेंद में आडियो और वीडियो सर्विलांस की क्षमता होगी। 20 मीटर की दूरी तक इसे फेंका या धकेला जा सकता है। इसे इस तरह बनाया गया है कि फेंकने पर भी ये टूटेगा नहीं।

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360 डिग्री के एंगल से ये वीडियो-आडियो रिकार्ड कर सकता है। ये वीडियो सर्विलांस बॉल दिन और रात दोनों वक्त काम करेगी। ये गेंद 25 घंटे तक बिना रुके अपना काम कर सकेगी। ये जमीन पर 9 मील प्रति घंटा और पानी में 3 मील प्रति घंटे की रफ्तार से तैरेगा।

क्या हैं इसकी खूबियां:

इसमें इमेज सेंसर, आडियो माइक्रोफोन, वीडियो एंड आडियो ट्रांसमिशन है। कैमरा सेंसर से लैस इस गेंद का वजन एक किलो तक होगा। एक पोर्टेबल रिमोट डिस्पले यूनिट और 5 इंच का टीएफटी स्क्रीन होगी। इनबिल्ट डीवीआर होगा ताकि रिकार्ड और प्ले बैक किया जा सके। इसमें लगी बैटरी 45 घंटे तक काम कर सकती है

कैसे करेगी काम:

अब आइए आखिरी सवाल पर। ये वीडियो सर्विलांस बॉल आखिर काम कैसे करेगी। सबसे पहले तो जिस जगह की जानकारी हासिल की जानी है वहां इसे दो तरीके से पहुंचाया जा सकता है। या तो इसे फेंका जाए या फिर इसे आगे धकेल दिया जाए। उसके बाद ये बॉल रिमोट के जरिए से आॅपरेट की जाएगी। यानी आपरेटर इसे जहां चाहे मोड़ सकता है। और जहां चाहे रोक सकता है।

 

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