राज्य में 5वीं और 8 वीं के विद्यार्थियों को देनी होगी बोर्ड परीक्षा

रायपुर। प्रदेश के निजी और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 5 वीं और 8 वीं के विद्यार्थियों को इस सत्र से बोर्ड परीक्षा देनी होगी। हालांकि छत्तीसगढ़ सरकार सत्र शुरू होने के पहले अभी तक बच्चों के पास और फेल को लेकर कोई फैसला नहीं कर पाई है।

केंद्र सरकार ने 8वीं तक फेल नहीं करने की नीति में बदलाव करके फेल और पास करने का अधिकार राज्य सरकारों को दे दिया है। इसके चलते पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश ने 5 वीं-8 वीं बोर्ड परीक्षा के लिए राजपत्र प्रकाशित कर नियमावली जारी कर दी है।

मध्यप्रदेश में भी होगी बोर्ड परीक्षा:

मध्यप्रदेश में इस सत्र से बच्चों की 5वीं-8 वीं की बोर्ड परीक्षा होगी। बच्चों को पास और फेल भी किया जाएगा। बता दें कि छत्तीसगढ़ समेत देशभर में बच्चों को फेल और पास करने के सिस्टम को खत्म कर साल 2010 में आरटीई (शिक्षा का अधिकार) लागू कर दिया गया था।

तभी से पहली से आठवीं तक फेल करने के सिस्टम को खत्म कर दिया गया था। अब कई राज्यों ने आरटीई में संशोधन के बाद एक बार फिर पांचवीं-आठवीं में पास और फेल सिस्टम को लागू कर दिया है। छत्तीसगढ़ शासन ने अभी तक इस संबंध में कोई फैसला नहीं लिया है।

पिछले साल ऐसा किया था मूल्यांकन:

छत्तीसगढ़ सरकार ने जब आरटीई में संशोधन नहीं हुआ था तभी से पांचवीं-आठवीं की परीक्षा के लिए गाइड लाइन तय कर दी थी। पिछली बार निजी और सरकारी दोनों ही स्कूलों के परीक्षार्थियों का मूल्यांकन एक साथ किया गया था।

कक्षा 5वीं और 8वीं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की बोर्ड परीक्षा के तर्ज पर ही अध्ययनरत शालाओं में परीक्षा लेकर उत्तर-पुस्तिकाओं का बाह्य मूल्यांकन कराया गया था। हालांकि इस परीक्षा में किसी को फेल नहीं किया गया था।

छत्तीसगढ़ ने की थी फेल और पास करने की सिफारिश :

प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता खराब होने के कारण खुद राज्य के शिक्षा विभाग ने एक बार फिर पांचवीं-आठवीं में फेल और पास करने की सिफारिश की थी।

शिक्षा गुणवत्ता खराब होने का हवाला देकर शिक्षा विभाग ने बच्चों के लिए शिक्षा गुणवत्ता अभियान चलाया। इस साल स्टेट लेवल असेसमेंट (एसएलए) करके शिक्षा विभाग की टीम खामियों के हिसाब से शिक्षा गुणवत्ता के लिए योजनाएं भी बना रही है।

निजी स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता का स्तर कैसा है इसका पता नहीं लग पा रहा है। बोर्ड परीक्षा आयोजित करने से अब निजी स्कूलों के बच्चों का शिक्षा गुणवत्ता स्तर का पता किया जा सकेगा। अभी तक निजी स्कूलों में वार्षिक परीक्षा का पेपर खुद स्कूल वाले सेट करते रहे हैं।

सालभर में कुल 10 यूनिट की पढ़ाई हर विषय की होना अनिवार्य है। होता यह है कि कई स्कूल छह या आठ यूनिट की पढ़ाई कर उसी के हिसाब से परीक्षा आयोजित कर लेते थे। इस पर भी रोक लगेगी।

 

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