नई दिल्ली। देश के प्रधानमंत्री लगातार कई सालों से भारत को एक युवा देश के तौर पर पेश करते आ रहे हैं, लेकिन एक हकीकत यह भी है कि भारत में बुजुर्गो की आबादी (population of elderly)  उम्मीद से अधिक तेजी से बढ़ रही है। बुजुर्गो की आबादी (population of elderly) 2050 तक बढ़कर 34 करोड़ पहुंचने की संभावना है जो संयुक्त राष्ट्र के 31.68 करोड़ के अनुमान से अधिक है। यह एक स्पष्ट संकेत है कि भारत अनुमान से अधिक तेजी से बूढ़ा हो रहा है। भारत 2027 में 145 करोड़ आबादी के साथ चीन को पीछे छोड़ देगा। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं होगा। 12 हजार साल में से 6200 साल भारत की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा रही है। इन अनुमानों ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा किया है कि क्या हम तेजी से बढ़ रही बुजुर्गो की आबादी (population of elderly) को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा व समुचित देखभाल के लिए तैयार हैं?
तो वहीं दुनिया में 65 साल से ज्यादा उम्र के बूढों की संख्या 5 साल के बच्चों की संख्या से ज्यादा हो गई है। ये हम नहीं बल्कि यूएन के आंकड़े हैं। संस्था का तो ये भी कहना है कि 2050 में 210 करोड़ बुजुर्ग होंगे। उनकी संख्या बच्चों की संख्या से 2 गुनी हो जाएगी।
तेजी से बढ़ रहा होमकेयर कॉन्सेप्ट:
बढ़ती उम्र न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। इसलिए विदेशों की तर्ज पर अडल्टकेयर व होमकेयर कॉन्सेप्ट भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसके तहत घर पर ही बुजुर्गो का इलाज और स्वास्थ्य की देखभाल के साथ उनका अकेलापन भी दूर किया जाता है।
क्या कहते हैं पुराने आंकड़े:
पुराने आंकड़ों पर गौर करें तो हिस्ट्री डेटाबेस आफ द ग्लोबल एनवॉयरमेंट रिपोर्ट के मुताबिक 12 हजार साल में दुनिया में जन्मे लोगों में से 49.7% भारत और चीन में पैदा हुए। ईसा पूर्व 4440 से 1760 ईसवी तक भारत की आबादी चीन से ज्यादा रही। फिर चीन आगे हो गया।
ईसा पूर्व 10 हजार साल तक सर्वाधिक आबादी मैक्सिको में थी। ईसा पूर्व 5050 में चीनी आबादी मैक्सिको से अधिक हो गई। अब तक 10 हजार करोड़ लोग पैदा हुए, इनमें से 6.9% आबादी जिंदा है। साल 1800 में पहली बार आबादी 100 करोड़ पहुंची और 1989 में 500 करोड़ जा पहुंची।
30 साल बाद क्या होगा:
अगर यही हालात रहे तो 30 साल बाद दुनिया का हर 11वां शख्स बुजुर्ग होगा। उस वक्त दुनिया में मौजूद किशोरों से ज्यादा संख्या बुजुर्गों की होगी।

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