बीमा लॉबी की भेंट चढ़ी स्वास्थ्य संचालक शिखा राजपूत, भेजी गई बेमेतरा

रायपुर। स्वास्थ्य विभाग ( Health Department of Chhattisgarh ) में बीमा लॉबी किस कदर हावी हो चली है। ये किसी से भी छिपा नहीं है। विजेंद्र कटरे ( Vijendra Katre ) के खिलाफ 274 पृष्ठ की रिपोर्ट और तमाम तथ्यों के विपरीत होने पर भी उनकी संविदा नियुक्ति बतौर राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर करने पर प्रशासन अमादा है। तो वहीं स्वास्थ्य मंत्री का फरमान ये भी है कि ये नियुक्ति उसके पुराने मासिक वेतनमान 1 लाख 35 हजार 488 रुपए पर होनी चाहिए। स्वास्थ्य संचालक शिखा राजपूत ने नियम-कायदे के हिसाब से उनको 50 हजार रुपए का वेतन ऑफर किया। तो विजेंद्र कटरे ने जॉब करने से मना कर दिया।

ऐसे में संचालक शिखा राजपूत  ( IAS Shikha Rajput ) को स्वास्थ्य सचिव ने नोटिस जारी कर ये पूछा कि किस नियम के तहत विजेंद्र कटरे को 50 हजार रुपए आफर किए गए? स्वास्थ्य मंत्री ने संचालक को वाचिक आदेश दिया कि अगर मैं आदेश कर रहा हूं तो आपको नियुक्ति देने में क्या तकलीफ है? संचालक ने सीधे-सीधे नियमों को उंगलियों पर गिना दिए, बस यही बात मंत्रीजी को नागवार गुजर गई। उन्होंने कुछ दूसरे आईएएस अफसरों के साथ ही स्वास्थ्य संचालक शिखा राजपूत को भी बेमेतरा भेज कर नीरज कुमार बंसोड़ को स्वास्थ्य संचालक बना दिया। इन्हीं सारे कारणों के चलते आइएएस रानू साहू भी स्वास्थ्य संचालक का पद छोड़कर हट गई थीं। जानकार तो यहां तक बताते हैं कि शिखा राजपूत भी संजीव चतुर्वेदी बनती जा रही थीं। अंत में वही हुआ जिसका लोगों को डर था।

पहले भी टीआरपी ने उठाया था मामला

विजेंद्र कटरे का मामला पहले भी टीआरपी उठा चुका है। टीआरपी की टीम के पास तमाम दस्तावेज मौजूद हैं जो उनकी योग्यता से लेकर उनको उपकृत किए जाने के तमाम तथ्यों की गवाही देते हैं।

क्या कहता है नियम

दरअसल संविदा नियुक्ति नियम 2012 के तहत जो वेतन की सीमा वित्त विभाग ने निर्धारित की है वह 50 हजार रुपए मासिक ही है। ऐसे में अगर विजेंद्र कटरे की नियुक्ति 1 लाख 35 हजार 488 रुपए के वेतनमान पर की जाती है तो ये उस नियम के (12)(2)(क) का उल्लंघन होगा। इसके साथ ही साथ रूल ऑफ बिजनेस के नियम 11 (1)(क) को भी शिथिल करना होगा।

क्यों स्वास्थ्य विभाग को चाहिए विजेंद्र कटरे

स्वास्थ्य विभाग ( Health Department of Chhattisgarh ) के जनकार बताते हैं कि अगले कुछ महीनों में प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बीमा कंपनियों के साथ बड़ी डील करने वाला है। विजेंद्र कटरे ऐसे ही मामलों में सिध्दहस्त बताए जाते हैं। ऐसे में अगर विजेंद्र कटरे को नियुक्ति नहीं दी गई तो राज्य सरकार का घाटा हो सकता है। इन्हीं सारी बातों को ध्यान में रखकर प्रशासन विजेंद्र कटरे की शर्तों पर उनकी नियुक्ति करने पर आमादा है।

योग्यता पर भी विवाद

विजेंद्र कटरे की शैक्षणिक योग्यता का मामला माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इस पद के लिए वांछित अनुभव 7 वर्षों का होना चाहिए था, मगर इसमें उनका कुल अनुभव 5 वर्ष 8 माह का पाया गया ।

क्यों उपकृत किए जा रहे ऐसे लोग

भ्रष्ट अधिकारियों को क्यों उपकृत किया जा रहा है। इनकी तो जांच होनी चाहिए और उसकी रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
राकेश चौबे
सामाजिक कार्यकर्ता
रायपुर।

भ्रष्टाचार बढ़ाने वाली गतिविधि

ऐसे अधिकारियों को अगर उपकृत किया जाएगा जो इससे भ्रष्टाचार और बढ़ेगा। ऐसे में प्रशासन से लोगों की उम्मीद है कि वे स्वच्छता पर ध्यान दें। साफ -सुथरी छवि के लोगों को ही प्रश्रय दें न कि ऐसे लोगों को।
ममता शर्मा
सामाजिक कार्यकर्ता
रायपुर।

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