टीआरपी ने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा, जिसके बाद नींद से जागा छत्तीसगढ़ संवाद

रायपुर। छत्तीसगढ़ संवाद ने कंसोल इंडिया और क्यूब्स मीडिया को कहा सो…. सॉरी….. हाल ही में छत्तीसगढ़ संवाद ( Chhattisgarh Samvad ) द्वारा संवाद में इंपैनलमेंट हेतु टेंडर बुलाए गए थे। जिसमें ग्रुप ए के तहत 33 और ग्रुप बी के तहत 44 कंपनियों के आवेदन आए। इसमें वे एजेंसियां भी शामिल हैं जिनपर आर्थिक अनियमितता के आरोप में जांच बिठाई गई थी। इनमें से दो कंपनियां ऐसी थी जिनपर आर्थिक अनियमितता के आरोप लगे थे। कुछ एजेंसियों को गैर जरूरी करार देते हुए उन्हें संवाद से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। मगर संवाद ने टेक्निकल राउंड में बगैर जांच किए  दो एजेंसियों को अंदर कर लिया।

इस मामले को टीआरपी ने प्रमुखता के साथ उठाया था। संवाद के अधिकारियों से चर्चा भी की गई थी। उस दौरान उन्होंने किसी प्रकार की जानकारी देने से इंकार कर दिया था। 12 जुलाई को ग्रुप ए की 32 कंपनियों को कौशल प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया था। एक कंपनी को रोक दिया गया। मिली जानकारी के अनुसार ग्रुप बी में 44 में से 43 कंपनियों को ही बुलाया जाएगा।

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टीआरपी की खबर का असर

छत्तीसगढ़ सरकार ( Chhattisgarh Government ) के विभिन्न सोशल मीडिया ( Social Media ) अकाउंट हैंडल करने के लिए संवाद ने जून माह के दौरान आवेदन मंगवाए थे। जिसमें 40 कंपनियों ने हिस्सा लिया था। आनन फानन में संवाद ने टेक्निकल राउंड के दौरान कंसोल इंडिया और क्यूब्स मीडिया को अंदर कर लिया था। जिन्हें आर्थिक अनियमितता के आधार पर या गैर जरूरी करार देते हुए छत्तीसगढ़ संवाद से बाहर कर दिया गया था।  टीआरपी ने छत्तीसगढ़ संवाद ने नहीं किया किसी भी फर्म को ब्लैक लिस्ट, RTI में हुआ खुलासा  शीर्षक से खबर को वेब पोर्टल पर प्रकाशित भी किया था। जिसके बाद जनसंपर्क विभाग में हड़कंप मच गया और कंसोल इंडिया के साथ क्यूब्स मीडिया के आवेदन को रोक दिया गया।

कौन सी हैं ये एजेंसियां

कंसोल इंडिया
क्यूब्स मीडिया

क्या था मामला

भूपेश बघेल सरकार ( CM Bhupesh Baghel ) ने पूर्व बीजेपी सरकार के समय प्रचार प्रसार के नाम पर 250 करोड़ रुपए के बजट के बावजूद 400 करोड़ रुपए से भी अधिक खर्च किए जाने की जांच का ऐलान किया था। इस मामले में लगभग 150 करोड़ रुपए से भी अधिक की राशि की हेरफेर की गई। इस मामले की जांच हेतु आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा ने अनियमितता की जांच हेतु कमेटी का गठन किया गया। संवाद के संचालक उमेश मिश्र के नेतृत्व में इस कमेटी में स्वराज दास, जमुना सांडिया, पंकज गुप्ता, आर के क्षत्रे और शरतचंद्र पात्र शामिल थे। जिसके बाद 48 एजेंसियों का इंपैनेलमेंट तत्काल निरस्त कर दिया गया था। जिनमें क्यूब्स मीडिया और कंसोल इंडिया भी शामिल हैं।

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क्यों रोका गया दो कंपनियों को

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्रुप बी में क्यूब्स मीडिया को रोका गया। दरअसल इस कंपनी के नाम पर विभागीय जांच चल रही है। ग्रुप ए से कंसोल को कौशल प्रशिक्षण हेतु रोका गया क्योंकि इस कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर और क्यूब्स मीडिया के ग्रुप डायरेक्टर एक ही हैं। इनके नाम से फिलहाल इओडब्ल्यू में जांच चल रही है।

क्या कहते हैं अधिकारी

इस मामले में संवाद से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि दोनों ही कंपनियों को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के नाम पर इओडब्ल्यू में जांच जारी है। जिसके कारण इन कंपनियों को कौशल प्रशिक्षण हेतु नहीं बुलाया गया।

 

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