रायपुर। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के सरगुजा (Surguja) संभाग से लगे जिले सोनभद्र (Sonbhadra) में आदिवासियों के साथ 18 जुलाई को नरसंहार हुआ था। जिसमें 10 आदिवासियों का मौत हो गई थी। अब इस मामले में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (Janta Congress Chhattisgarh) ने जाँच रिपोर्ट तैयार की है। अमित जोगी (Amit Jogi) ने बताया कि इसकी कॉपी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ को 2 अगस्त को भी भेजी गई है। उत्तरप्रदेश के सोनभद्र में हुए नरसंहार की जांच कमेटी के सदस्यों ने कुल 7 बिन्दुओं का ध्यान में रखकर जांच की है।

सोनभद्र नरसंहार की जांच रिपोर्ट

1. घटना कब और कहाँ हुई?

घटना उभ्भा गांव की है। जो 18 जुलाई 2019 दोपहर 12.00 बजे हुई थी। घटना को अंजाम देने के लिए गांव के प्रधान आगी दत्त ने ग्रामीणों को मीटिंग के बहाने इकठ्ठा किया था। यह बातें घायलों से मिलने के उपरांत घायलों व उनके परिजनों से पता चली.

2. घटना का मूल कारण क्या था?

वह 120 बीघा जमीन जो आशा मिश्रा के द्वारा ग्राम प्रधान आगी दत्त को 20 लाख रूपये में बेचा गया था। जिस जमीन पर उभ्भा गांव के ग्रामीण आदिवासियों का कब्जा था। उस जमीन को आशा मिश्रा अपने कब्जे में नहीं ले पा रही थी इसलिए उसने ग्राम प्रधान को बेच दिया। ग्राम प्रधान द्वारा जबरिया उस जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से घटना को अंजाम दिया गया।

3. जमीन विवाद क्या है?

जमीन विवाद समझने के लिए हम लोगों को वर्ष 1955 को ध्यान देना होगा जब वहां के ठाकुर महेश्वर बाबू ने उभ्भा गांव के किसानों को खेती करने के लिए और अपने जीवन यापन करने के लिए उन्हें यह जमीन दी थी। उसके बाद मैनेजर राजेन्द्र मिश्रा ने उत्तर प्रदेश के बाहर के लोगों के साथ मिलकर 12 लोगों की एक सोसाइटी बनाई थी। उस सोसायटी के माध्यम से वहां की जमीन को सोसायटी के नाम पर चढ़ाया गया था और उस जमीन में से लगभग 90 बीघा जमीन आशा मिश्रा ने अपने नाम पर करवा रखी थी। इसके साथ-साथ लगभग 30 बीघा जमीन जो कि फारेस्ट की भूमि कही जाती थी उसे भी अपने कब्जे में दिखाया गया था। दोनों जमीनों को मिलाकर आशा मिश्रा के द्वारा 120 बीघा जमीन को अपने नाम करवा लिया गया था जिस पर उभ्भा गांव के ग्रामीण आदिवासी किसान अपना जीवन यापन खेती के माध्यम से करते थे। आशा मिश्रा के द्वारा कई बार इस जमीन को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की गई थी।  परंतु हर बार वह असफल ही रहीं। तब जाकर ग्राम प्रधान आगी दत्त ने 20 लाख रुपया में 120 बीघा जमीन को खरीदने की बात आशा मिश्रा से की और इन दोनों के बीच में सौदा पूरा हुआ परंतु जमीन पर कब्जा उस गांव के आदिवासी किसानों का था जिसको छुड़वाने में आगी दत्त भी सफल नहीं हो पाए।

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4. घटना कैसे हुई?

इस घटना को अंजाम देने के लिए पूर्व नियोजित ढंग से योजना बनाई गई थी। आगी दत्त के द्वारा 150 से 200 लोगों को 30 से 35 ट्रैक्टर में पहले से तैयार किया गया था। साथ ही 12 बोर की राइफल एवं भरमार बंदूक की व्यवस्था भी आगी दत्त के द्वारा की गई थी। गांव वालों की मीटिंग के बहाने एक जगह इकठ्ठा करके फिर ऐसी परिस्थितियां पैदा की गई कि गांव वाले उत्तेजित हों। गांव वालों को उत्तेजित करके आगी दत्त एवं उनके साथ आए वहां के लोगों ने अंधाधुन बंदूक चलाना चालू कर दिया जिससे 10 लोगों की मौत हो गई। 6 लोग बनारस में आज भी अपना इलाज करवा रहे हैं। साथ ही लगभग 14 लोग राबट्र्सगंज के जिला चिकित्सालय में अपना इलाज करवा रहे हैं। घटना में प्रभावित की स्थिति, घटना में प्राप्त जानकारी के अनुसार 10 लोगों की मौत 18 जुलाई 2019 को हो गई थी। कुछ घायलों को बनारस एवं सोनभद्र के अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती रखा गया है। परन्तु कुछ लोगों का कहना यह भी है कि अन्य लोगों की भी मृत्यु हुई है जिसके खुलासे के डर से प्रशासन उस गांव में किसी को भी जाने नहीं दे रहा है। जल्द ही इस सच्चाई का भी खुलासा हो जाएगा कि वहां कुल कितने लोगों की मृत्यु हुई है। आज तक घायलों को 50 हजार रूपये का मुआवजा एवं मृतकों के परिवार को 5 लाख रूपये का मुआवजा घोषित किया दिया गया है जिसमें से कईयों को मुआवजे की रकम आज दिनांक तक नहीं मिली है।

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5. घटना के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के बारे में

घटना के बाद कई नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही कई लोग अभी भी फरार हैं जिन्हें आज तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। आरोपियों में मुख्य रूप से 12 बोर भरमार का उपयोग करने वाले लोग अगी दत्त प्रधान, कोमल, बाबुल, पन्ने, मुन्ना, धीरज, नीरज हैं।

6. ग्रामीणों के द्वारा घोरवाल ठाणे में फोन करने के बावजूद भी वहां के कोई भी प्रलिस प्रशासन से ग्रामीणों की मदद के लिए नहीं पहुंचा। यहां तक की 100 नंबर में फोन करने के बाद पुलिस गांव में आई जरूर लेकिन उन्होंने ग्रामीणों की कोई भी मदद नहीं की। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में हुए घटना में राबर्ट्सगंज चिकित्सालय में एडमिट पीड़ितों के नाम इस प्रकार है-
1. रामनाथ 2. इंदर कुमार 3. चंद्रेश 4. राम लाल 5. राम जी 6. राजेंद्र 7. रामधनी 8. छोटेलाल 9. रामरक्षा 10. भगवानदास, 11. सीता 12. कलावती 13. रीमा 14. विजय है.

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उत्तर प्रदेश सोनभद्र में हुए हादसे के बनारस में एडमिट पीड़ित इस प्रकार हैं-
1. दिनेश 2. नागेंद्र 3. महेंद्र 4. जयप्रकाश 5. सुखवती 6. केरवा
उत्तर प्रदेश सोनभद्र में हुए हादसे के मृतकों के नाम –
1. सुखवंती 2. रामसुंदर 3. जवाहिर 4. रामचंद्र 5. अशोक 6. रामधारी
7. अशोक व 3 अन्य

7. इस पूरे घटनाक्रम को जांच करने के पश्चात हम सभी जांच कमेटी के सदस्यों ने यह पाया कि अगर जमीन को शासन-प्रशासन के द्वारा पहले ही जो लोग उस जमीन पर 1955 से काबिज थे उनके नाम पर कर दिया जाता और कहीं ना कहीं गड़बड़ी नहीं की जाती तो आज इतने बड़ी घटना घटित नहीं होती। इस घटना को अंजाम देने में जितना दोषी आगी दत्त है उसतना ही कहीं ना कहीं शासन-प्रशासन के लोग और उस समय वहां के थाने में पदस्थ कर्मचारी भी इसमें शामिल प्रतीत होते हैं। इतनी बड़ी घटना को उनके क्षेत्र में अंजाम देना आसान नहीं था। बिना उनकी सहमति के ये नरसंहार नहीं हो सकता था। इस पूरे घटनाक्रम की जांच सीबीआई के माध्यम से करवाने पर ही सच्चाई बाहर आ सकती है क्योकि स्थानीय जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन कहीं ना कहीं आज भी इस मामले पर लीपापोती करने के प्रयास में लगा हुआ है और ग्रामीण आदिवासी भाईयों का हक उन्हें नहीं मिल सकता।

8. जांच दल में दानिश रफीक के साथ देवेश प्रताप सिंह, बलविंदर सिंह छाबड़ा, अभिषेक श्रीवास्तव, नेहाल अहमद, ज्ञानी नंद सिंह, रामचंद्र सिंह और उत्तरप्रदेश के दो अन्य लोग शामिल थे।

 

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