रायपुर। कृषि विभाग (Agricultural Department) की योजनाओं में भंडार क्रय नियम (Store Purchase Rules) के विपरीत करीब 18 करोड़ के गड़बड़झाला में पहले तो फ़ाइल अटकी (File Stuck) और अब जांच लटकती जा रही है। विडंबना तो ये है कि कृषि विभाग (Agricultural Department) में करोड़ों के गड़बड़झाला के स्वीकार हो जाने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी (Administration Officer) मामले से पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं।

वहीं जिस अधिकारी के नाक के नीचे करोड़ों का भ्रष्टाचार (Corruption Of Crores) किया गया, उन्हें इनामस्वरूप अन्यत्र मलाईदार विभाग में पदस्थ कर मौज करने की इजाजत दे दी गयी। अब सवाल ये उठता है कि करोड़ों का भ्रष्टाचार (Corruption Of Crores) करने वाले अधिकारियों पर इसी तरह कार्यवाही ना कर मलाईदार विभाग में पोस्टिंग दे दी जाए, तो आखिर कैसे प्रदेश में भ्रष्ट अधिकारियों (Corrupt Officers)  पर अंकुश लगेगा? आखिर कब भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले ध्वस्त होंगे?

तत्कालीन संचालक केरकेट्टा पर आरोप, लेकिन वो कर रहें हैं मौज

कृषि विभाग के तत्कालीन संचालक एम. एस. केरकेट्टा (Director M.S. Kerketta) पर कृषि विभाग (Agricultural Department) की योजनाओं में 18 करोड़ की अनियमितता और गड़बड़झाला का आरोप है। 18 करोड़ के फर्जीवाड़ा के (Corruption Of Crores) स्वीकार हो जाने के बावजूद तत्कालीन संचालक केरकेट्टा (Director M.S. Kerketta) पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई, बल्कि उल्टा उन्हें इनामस्वरूप अन्यत्र मलाईदार विभाग में पोस्टिंग दे दी गयी।

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करोड़ों के भ्रष्टाचार (Corruption) मामले में पहले तो तत्कालीन संचालक ने 10 महीने तक फ़ाइल दबा दी, फिर जैसे ही इसकी भनक आला अधिकारियों को लगी तो उन्हें शो कॉज नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया गया। फिलहाल तत्कालीन संचालक केरकेट्टा  (Director M.S. Kerketta) को जारी शो कॉज नोटिस (Show Cause Notice) के जवाब के बारे में अधिकारी जांच का हवाला देकर कुछ कहने से बचते नजर आ रहे हैं।

जानें क्या है पूरा मामला

विधानसभा (Assembly) प्रश्न क्रमांक 1989 में वित्तीय वर्ष (Financial Year) 2015-16 से दिसंबर 2017 तक कृषि विभाग (Agricultural Department) की योजनाओं में भंडार क्रय नियम का उल्लंघन का मामला सामने आया।

कृषि विभाग द्वारा (NFSM) ,हरित क्रांति एवं (RKVY) योजना में 50 प्रतिशत अनुदान पर सूक्ष्म तत्व/वीडीसाइड/कीटनाशक रसायन के भंडारण एवं सेल के लिए भंडारण क्रय नियमों (Storage Purchasing Rules) के विपरीत करीब 18 करोड़ का फर्जीवाड़ा होना स्वीकार किया गया। जब करोड़ों के भ्रष्टाचार (Corruption Of Crores) के मामले की आंच विभिन्न जिलों के कृषि अधिकारियों पर गिरी, तो तत्कालीन संचालक एम. एस. केरकेट्टा (Director M.S. Kerketta) ने चहेतों को बचाने 10 महीने तक फ़ाइल को दबा दिया।

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वहीं तत्कालीन कृषि संचालक (Director M.S. Kerketta) पद पर होने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की। मामले की भनक जब आला अधिकारियों को लगी, तो तत्कालीन अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त सुनील कुजूर द्वारा तत्कालीन संचालक को शो कॉज नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर जवाब मांगा गया। हालांकि नोटिस के बावजूद तत्कालीन संचालक (Director M.S. Kerketta) पर गाज गिरने के बजाय उन्हें अन्यत्र मलाईदार विभाग में बैठा दिया गया।

जानें क्या कहते हैं वर्तमान संचालक व जांच अधिकारी

कृषि विभाग (Agricultural Department) में हुए करोड़ों के गड़बड़झाला पर जब द रूरल प्रेस (The Rural Press) की टीम ने वर्तमान संचालक टामन सोनवानी (Director Taman Sonwani) से उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने अधिकृत अधिकारी ना होकर पक्ष देने से इंकार कर दिया।

इसके बाद टीम ने जांच अधिकारी अपर संचालक एबी आसना (Additional Director AB Asana) से जांच कब तक पूरी होने का सवाल किया तो उन्होंने करीब 1 माह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बात कही। वहीं टीम के कई सवालों के जवाब में अपर संचालक आसना (Additional Director AB Asana तत्कालीन संचालक का बचाव करते भी नजर आए।

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