नई दिल्ली। भारत ने जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Council) की बैठक में अपना रुख साफ किया है। इस बैठक से बाहर आने के बाद संयुक्त राष्ट्र (United Nations Council) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने मीडिया से कहा कि भारत का रुख यही था और है कि संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) संबंधी मामला पूर्णतया भारत का आतंरिक मामला है और इसका कोई बाह्य असर नहीं है।

भारत ने जम्मू-कश्मीर मामले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Council) की बैठक के बाद कहा कि जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) का विशेष राज्य का दर्जा हटाना पूरी तरह उसका आंतरिक मामला है। इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में कहा कि वार्ता शुरू करने के लिए उसे आतंकवाद रोकना होगा।

आतंकवाद रोकिए फिर होगी वार्ता

पाकिस्तान (Pakistan) का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि कुछ लोग कश्मीर में स्थिति को भयावह नजरिए से दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जो वास्तविकता से बहुत दूर है। वार्ता शुरू करने के लिए आतंकवाद रोकिए। अकबरुद्दीन ने कहा कि जब देश आपस में संपर्क या वार्ता करते हैं तो इसके सामान्य राजनयिक तरीके होते हैं। आगे बढ़ने के लिए आतंकवाद का इस्तेमाल करने और अपने लक्ष्यों को पूरा करने जैसे तरीके को सामान्य देश नहीं अपनाते। यदि आतंकवाद बढ़ता है तो कोई भी लोकतंत्र वार्ता को स्वीकार नहीं करेगा। आतंकवाद रोकिए, वार्ता शुरू कीजिए। एक देश और उसके नेतागण भारत में हिंसा को प्रोत्साहित कर रहे हैं और जिहाद की शब्दावली का प्रयोग कर रहे हैं। हिंसा हमारे समक्ष मौजूदा समस्याओं का हल नहीं है।

See also  देश से हर हाल में निकाले जाएंगे रोहिंग्या : केंद्र सरकार

बैठक में कश्मीर के लोगों की आवाज सुनी गई

बैठक के बाद चीनी और पाकिस्तानी दूतों के मीडिया को संबोधित करने के बारे में अकबरुद्दीन ने कहा कि सुरक्षा परिषद बैठक समाप्त होने के बाद हमने पहली बार देखा कि दोनों देश (China and Pakistan) अपने देश की राय को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की राय बताने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत कश्मीर में धीरे-धीरे सभी प्रतिबंध हटाने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी ने बैठक के बाद कहा कि बैठक में कश्मीर के लोगों की आवाज सुनी गई। लोधी ने कहा कि यह बैठक होना इस बात का सबूत है कि इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना गया है।

भारत के एकतरफा कदम ने कश्मीर में यथास्थिति बदली

बैठक के बाद संयुक्त राष्ट्र में चीन (China) के राजदूत झांग जुन ने भारत और पाकिस्तान से अपने मतभेद शांतिपूर्वक सुलझाने और एक दूसरे को नुकसान पहुंचा कर फायदा उठाने की सोच त्यागने की अपील की। कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा हटाने और लद्दाख को एक अलग केंद्रशासित प्रदेश बनाने के भारत के कदम का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि भारत (India) के इस कदम ने चीन के संप्रभु हितों को भी चुनौती दी है और सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाने को लेकर द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन किया है। चीन काफी चिंतित है। रूस के उप-स्थायी प्रतिनिधि दिमित्री पोलिंस्की ने बैठक कक्ष में जाने से पहले संवाददाताओं से कहा कि मॉस्को का मानना है कि यह भारत एवं पाकिस्तान का द्विपक्षीय मामला है।

See also  Bipin Rawat ने Pakistan को दी सख्त चेतावनी, LoC पर अगर कोई हरकत की तो सिखाएंगे सबक

भारत और पाकिस्तान ने बैठक में भाग नहीं लिया

उल्लेखनीय है कि बंद कमरे में बैठकों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं होता और इसमें बयानों का रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। विचार-विमर्श सुरक्षा परिषद के सदस्यों की अनौपचारिक बैठकें होती हैं। भारत और पाकिस्तान ने बैठक में भाग नहीं लिया। बैठक परिषद के पांच स्थायी और 10 अस्थायी सदस्यों के लिए ही थी। संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के मुताबिक, आखिरी बार सुरक्षा परिषद ने 1965 में भारत-पाकिस्तान प्रश्न के एजेंडा के तहत जम्मू कश्मीर के क्षेत्र को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद पर चर्चा की थी। हाल में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि उनके देश ने, जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के भारत के फैसले पर चर्चा के लिए सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की औपचारिक मांग की थी।

Chhattisgarh से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Twitter पर Follow करें और Youtube  पर हमें subscribe करें। एक ही क्लिक में पढ़ें  The Rural Press की सारी खबरें।

See also  शोपियां के पिंजोरा इलाके में सुरक्षा बलों ने 4 आतंकियों को मार गिराया, 24 घंटे में 9 दहशतगर्द ढेर