1998 से 62% सस्ता है टिकट

जिनेवा। दुनियाभर की एयरलाइंस के सामने ओवर कपैसिटी की समस्या बनी रहेगी, जिसका असर

एयर टिकट के लिए ज्यादा किराया वसूलने की उनकी क्षमता पर पड़ेगा। 1998 के मुकाबले इस समय\

हवाई किराया लगभग 62 पर्सेंट कम है।

 

इंटरनैशनल एयर ट्रांसपॉर्ट असोसिएशन (IATA) के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन पीयर्स ने बताया कि

2020 में ओवर कपैसिटी की समस्या और बढ़ेगी। पीयर्स ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि

दुनियाभर की एयरलाइंस ने 2019 में अपने बेड़े में 5.1 पर्सेंट की बढ़ोतरी की है और 2020 में

इसमें 2 पर्सेंट की और बढ़ोतरी होने का अनुमान है। अगले वर्ष एयरलाइंस के बेड़े में करीब

2,100 एयरक्राफ्ट शामिल होंगे, जो दुनिया की कुल एयरक्राफ्ट क्षमता का 7.5 पर्सेंट है।

1990 के दशक से भी कम है हवाई किराया :

हवाई किराए 1990 के दशक से भी कम हैं। इसके बावजूद किराए में बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है।

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पीयर्स ने बताया, ‘क्षमता बढ़ने से दुनिया की सभी एयरलाइंस पर किराए को लेकर दबाव बना रहेगा।

‘ IATA के डायरेक्टर जनरल ऐलेक्जेंडर डे जूनिएक ने कहा कि 1998 के मुकाबले औसत किया 62 पर्सेंट

सस्ता है। उनका कहना था, ‘हवाई सफर किफायती होता जा रहा है। हवाई किराए में अगर सरचार्ज और

टैक्स को हटा दें और उसमें महंगाई दर जोड़ें तो रिटर्न टिकट की औसत कीमत 1998 की तुलना

में 62 पर्सेंट कम है।’

 

भारत में किफायती है हवाई यात्रा :

इसका मतलब यह है कि उभरती अर्थव्यवस्था वाली देशों के युवाओं के पास हवाई सफर के लिए पुरानी

पीढ़ी से ज्यादा मौके हैं। पीयर्स ने कहा कि पुरानी पीढ़ी के लिए युवा उम्र में हवाई सफर पर जाना किसी

सपने जैसा था। भारत में किराया कम होने से हवाई सफर किफायती बना है। हालांकि, एयरलाइंस ने

मार्केट में जरूरत से ज्यादा क्षमता को लेकर शिकायत करना शुरू कर दिया है, जिसके चलते उन्हें किराए

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को कम रखना पड़ रहा है। इसका असर उनके मुनाफे पर पड़ा है।

जेट के चलते बढ़ी ओवर कपैसिटी की समस्या :

एयरलाइंस की शिकायत है कि जेट एयरवेज के बंद होने से खाली हुए स्लॉट पर फ्लाइट शुरू करने और

बेड़े में अतिरिक्त प्लेन शामिल करने के लिए मची होड़ से मार्केट में ओवर कपैसिटी की समस्या बनी है।

इससे किराया कम हुआ है और एयरलाइंस का घाटा बढ़ा है। इधर कपैसिटी बढ़ने से फेस्टिव सीजन के

दौरान भी किराए पर दबाव बना रहा, जबकि इस दौरान टिकट की मांग अधिक रहती है। बाकी एयरलाइंस

जहां ओवर कपैसिटी की शिकायत कर रही हैं, देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो का मानना है कि

भारतीय मार्केट में ओवर कैपेसिटी नहीं है। इंडिगो ने कहा, ‘हमारे पास और फ्लाइट शुरू करने के लिए

पर्याप्त प्लेन नहीं हैं।

 

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