आलमगीर आलम, रामेश्वर उरांव व सत्यानंद भोक्ता

रांची। झारखंड में रविवार को हेमंत सोरेन ने प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। हेमंत सोरेन

को रांची के मोरहाबादी मैदान में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। हेमंत

सोरेन के अलावा कांग्रेस और आरजेडी के भी विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। झारखंड में जेएमएम

-कांग्रेस-आरजेडी की गठबंधन सरकार के मुखिया बने हेमंत सोरेन झारखंड के 11वें सीएम बने हैं। हेमंत

सोरेन के साथ कांग्रेस विधायक दल नेता आलमगीर आलम और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर उरांव व

सत्यानंद भोक्ता ने मंत्री पद की शपथ ली।

 

रविवार को हुए हेमंत सोरेन के शपथ समारोह के दौरान मंच पर विपक्ष के तमाम बड़े नेता मौजूद रहे। नई

सरकार के शपथ समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, पूर्व राज्यसभा

सांसद शरद यादव, राज्यसभा सांसद संजय सिंह, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन

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खडग़े, सुबोधकांत सहाय, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत समेत तमाम बड़े नेता मौजूद रहे। इसके

अलावा डीएमके नेता एमके स्टालिन, जेएमएम नेता और हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन, पूर्व केंद्रीय मंत्री

आरपीएन सिंह, एनसीपी नेता सुप्रिया सुले और प्रदेश के पूर्व सीएम रघुबर दास भी मंच पर मौजूद रहे।

शपथ समारोह के मंच पर तेजस्वी यादव, ममता बनर्जी मौजूद रहीं।

44 साल के हेमंत सोरेन को 24 दिसंबर को गठबंधन की ओर से विधायक दल का नेता चुना गया था।

विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद हेमंत सोरेन ने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा

पेश किया था। झारखंड के चुनाव में हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा को सबसे अधिक सीटें

मिली थीं।

 

झारखंड मुक्ति मोर्चा चुनावों में 30 सीटें मिली है। इसके अलावा प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी को

इस चुनाव में 25 सीट मिली है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और आदिवासी नेता शिबू सोरेन के बेटे हेमंत इन चुनावों

में जेएमएम-कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के गठबंधन का चेहरा थे। 19वीं सदी के आदिवासी नायक

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बिरसा मुंडा को मानने वाले हेमंत राज्य के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

सबसे कम उम्र के सीएम रहे हैं हेमंत

राज्य सभा के सांसद के तौर पर वह 24 जून, 2009 से लेकर 4 जनवरी, 2010 के बीच संसद पहुंचे। सितंबर

में वह बीजेपी/जेएमएम/जेडीयू/एजेएसयू गठबंधन की अर्जुन मुंडा सरकार में झारखंड के उपमुख्यमंत्री बने।

इससे पहले वह 2013 में राज्य के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने और दिसंबर 2014 तक इस पद पर रहे।

बड़े भाई की मौत से बदली जिंदगी

2005 में विधानसभा चुनावों के साथ उन्होंने चुनावी राजनीति में कदम रखा जब वह दुमका सीट से मैदान में

उतरे हैं। हालांकि, उन्हें पार्टी के बागी नेता स्टीफन मरांडी से हार झेलनी पड़ी। इसके बाद 2009 में बड़े भाई

दुर्गा की मौत ने हेमंत की जिंदगी में बड़ा मोड़ ला दिया। दुर्गा को शिबू सोरेन का उत्तराधिकारी माना जाता

था लेकिन उनकी असमय मौत हो गई और हेमंत राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गए।

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