पिछले दो महीने से चल रही है संचालक कंपनी के खिलाफ जांच

सबसे पहले टीआरपी ने किया था खुलासा

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट उचित शर्मा ने ईओडब्ल्यू में की थी शिकायत

रायपुर। दूर दराज के मरीजों को आपात स्थित में अस्पताल तक पहुंचाने में संजीवनी साबित होने वाली 108 एम्बुलेंस के टेंडर में भारी धांधली हुई थी। इस मामले में पिछले दो महीने से स्वास्थ्य विभाग की चल रही जांच में टेंडर में गड़बड़ी के सबूत मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में संचालक कंपनी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं। इस मामले में कंपनी को स्वास्थ्य विभाग की ओर से 191 करोड़ रुपए का वर्कआर्डर मिला है।

बता दें कि सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट उचित शर्मा ने इस मामले में ईओडब्ल्यू में शिकायत थी। इसका सबसे पहले न्यूज पोर्टल द रूरल प्रेस (टीआरपी) ने प्रमुखता से खुलासा किया था।
अब स्वास्थ्य विभाग की जांच में खुलासा हो रहा है कि प्रदेश में संजीवनी 108 के लिए अनुबंधित कंपनी जय अम्बे इमरजेंसी सर्विसेज के खिलाफ चल रही जांच में कई गड़गड़ी के सबूत मिले हैं।

स्वास्थ्य विभाग की जांच में पता चला है कि गुजरात के जिस सम्मान फाउंडेशन का अनुभव प्रमाण पत्र 108 की निविदा में लगाया गया था, वह निविदा शर्तों को पूरा नहीं करता है। स्वास्थ्य विभाग ने 100 एम्बुलेंस (एडवांस लाइफ सपोर्टिंग सिस्टम) के संचालन का अनुभव प्रमाण पत्र मांगा था, लेकिन उस समय सम्मान फाउंडेशन के पास महज 44 एम्बुलेंस के संचालन का अनुभव था।

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इस बात का खुलासा राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के दस्तावेज से साबित हो रहा है, जो उसने 29 फरवरी 2020 को संचालक स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ को भेंजे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक जांच कमेटी के पास जय अम्बे इमरजेंसी सविर्सेज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अनुशंसा करने के पुख्ता प्रमाण है। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग कंपनी से अनुबंध समाप्त करने पर भी विचार कर रहा है।

बता दें कि संचालक कंपनी का कारोबार बिहार में भी है। कंपनी ने टेंडर में वार्षिक टर्नओवर के जो दस्तावेज पेश किए थे, वह बिहार में काम करने वाली कंपनी की दूसरी फर्मों के थे, जिनका मुख्य काम कोयला व्यवसाय परिवहन है।

इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बिहार सरकार को पत्र भेजकर इसकी जानकारी मांगी थी, जिसमें संचालक कंपनी द्वारा गलत जानकारी देने का मामला सामने आया। इस मामले में कंपनी के लिए दस्तावेज बनाने वाले सीए (chartered accountant) की भूमिका भी संदिग्ध है। इसकी भी जांच की जा सकती है।

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लपेटे में आ सकते हैं अफसर

इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी लपेटे में आ सकते हैं। संजीवनी 108 की निविदा और जय अम्बे कंपनी को जारी वर्कआउट मामले में वे विभागीय अफसर भी सवालों के घेरे में है, जिन्होंने निविदा की नियम-शर्तें तय की और उन्हें बदलकर वर्कआडर जारी किया।

बताया जाता है कि इस मामले में एक ब़ड़े आईएएस अफसर का नाम सामने आ रहा है। इसमें गड़बड़ियों की शिकायत पहले अफसरों को की गई थी, लेकिन इस मामले को दबाने की कोशिश की गई। इस मामले में शिकायतकर्ता ने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से मुलाकात की थी। इस पर मंत्री ने संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए थे।

टीआरपी ने सबसे पहले उठाया था मुद्दा

बता दें कि इस मामले को वेब पोर्टल द रूरल प्रेस (टीआरपी) ने सबसे पहले प्रमुखता से उठाया था। सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट उचित शर्मा ने इस मामले में ईओडब्ल्यू में शिकायत थी। धांधली की खबर उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया था।

अब महतारी एक्सप्रेस 102 का दोबार टेंडर जारी करने की तैयारी

इधर अभी स्वास्थ्य विभाग में संजीवनी 108 मामले में जांच चल रही है, वहीं विभाग ने गर्भवती महिलाओं को लाने-ले जाने के लिए मुफ्त एम्बुलेस सेवा महतारी एक्सप्रेस 102 के लिए टेंडर जारी कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक टेंडर में अभी 1 ही कंपनी शामिल हुई है।

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नियम के तहत कम से कम तीन निविदाकारों का शामिल होना जरूरी है। इस कारण विभाग दोबारा टेंडर निकालने की तैयारी में है। इसमें अब नए सिरे से निविदा प्रक्रिया होगी। बता दें कि 2011 से चल रही इस सेवा की सभी 300 एम्बुलेंस आउटडेटेड हो चुकी है। इससे संचालन में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कंपनी के खिलाफ जांच जारीः संचालक स्वास्थ्य सेवाएं

नीरज बंसोड़ के लिए इमेज नतीजे

इस मामले में संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं नीरज बंसोड़ का कहना है कि इस मामले में कंपनी जय अम्बे के खिलाफ जांच जारी है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती है, तब तक कुछ भी कहा नहीं जा सकता। श्री बंसोड़ ने स्वीकार किया कि अभी महतारी एक्सप्रेस 102 के लिए दोबारा निविदा जारी की जाएगी।

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