नई दिल्ली। देशभर में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 6000 का आंकड़ा पार कर चुकी है। जबकि इस घातक वायरस के चलते करीब 200 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारें भी इस जानलेवा वायरस से निपटने के लिए कड़े कदम उठा रही है।

भारत में जुगाड़ियों की कमी नहीं। गांव से लेकर शहर तक हर जगह छोटे से जुगाड़ से बड़े से बड़े काम निकाल लिए जाते हैं। ऐसा ही जुगाड़ अब कोरोना से लड़ने में भी मददगार साबित हो रहे हैं।
झारखंड के विभिन्न जिलों में कोरोना के खिलाफ जंग में बनाये गए जुगाड़ के हथियार देश के लिए मिसाल बन रहे हैं। यह न सिर्फ कोरोना संक्रमण नियंत्रण में कारगार साबित हो रहे हैं बल्कि आम लोगों और स्वास्थ्य कर्मियों के सुरक्षा कवच भी बन रहे हैं। इनमें से कई प्रयासों की सराहना नीति आयोग ने भी की है।

वैन को बनाया मोबाइल सैंपल कलेक्शन बूथ

रिम्स के सिविल सर्जन डॉ. विजय बिहारी प्रसाद और उनकी टीम ने कोरोना सैंपल कलेक्शन वैन बूथ तैयार कर दी है। यह दूर दराज के इलाकों में जाकर भी संदिग्ध मरीज का सैंपल ले सकती है और उसे तत्काल टेस्ट लैब तक पहुंचा सकता है।

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डॉ प्रसाद ने बताया कि सैंपल कलेक्शन के लिए ऐसे चार वैन बूथ उपयोग में लाए जा रहे हैं। इस मोबाइल सैंपल कलेक्शन वैन में जो बूथ फिट किये गए हैं, उनका मॉडल चाईबासा के उप विकास आयुक्त आदित्य रंजन ने पिछले दिनों कुछ स्थानीय इंजीनियरों की मदद से अपने घर पर ही विकसित किया है। यह एक फोन बूथ के आकार का है, जिसके जरिये बगैर पीपीई किट के भी संदिग्ध का सैंपल लिया जा सकता है।

दोबारा इस्तेमाल हो सकती है पीपीई किट

प्रदेश में दो तरह की पीपीई किट तैयार की गई हैं। पहली 90 जीएसएम तरपॉलिन प्लास्टिक से बने किट। खास बात यह है कि इनको धोने के बाद दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं दूसरी 50 जीएसएम एलडीपीई से बने किट हैं, जिनका इस्तेमाल एक ही बार किया जा सकता है।

रिम्स के डॉक्टरों की ओर से तैयार पीपीई किट का मॉडल तीन स्थानीय कंपनियों को उपलब्ध कराकर बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन शुरू किया जा रहा है।
यह जिम्मेदारी अरविंद मिल्स, ओरियंट क्राफ्ट एंड आशा इंटरप्राइजेज को दी गई है।

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