रायपुर। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की घोर लापरवाही सामने आई है। कोरोना महामारी के दौरान भी स्वास्थ्य विभाग के 40 कर्मचारी ऐसे हैं जो घर पर बैठें है। जबकि प्रदेश ही नहीं पूरे देश में इस वक्त चिकित्सा कर्मचारियों की कमी है। दरअसल ये कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग के स्थापना आदेश का इंतजार कर रहे हैं। ताकि वे कोरोना काल में मरीजों की सेवा कर सकें।

कोरोना काल में भी आखिर घर बैठने पर क्यों मजबूर हैं स्वास्थ्य कर्मचारी

दरअसल छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा 7, 14, 19, 22 और 23 अगस्त 2019 को प्रदेश के स्वास्थ्य कर्मियों का स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था। जिसमे बहुत से स्वास्थ्य कर्मियों की नवीन पदस्थापना हो चुकी है लेकिन करीब आठ महीनें बाद भी लगभग 40 की संख्या में स्वास्थ्यकर्मी अपनी नवीन पदस्थापना का इंतजार कर रहे हैं। जिसमें हेल्थ डिपार्टमेंट के अधिकारी,कर्मचारी, डॉक्टर और फार्मासिस्ट शामिल हैं। टीआरपी के पास इसके दस्तावेज मौजूद हैं।

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8 माह से कर रहे हैं पदस्थापना का इंतजार

अगस्त 2019 में हुई स्थानांतरण की संशोधित सूची स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभी तक जारी नहीं की गई है। जिससे बहुत से अनुभवीय डॉक्टर,अधिकारी और कर्मचारी घर में बैठे हुए है। वे सभी चाहकर भी अपनी सेवा स्वास्थ्य विभाग को नहीं दे पा रहें हैं, क्योंकि पुराने पदस्थापना से उन्हें रिलीव कर दिया गया है और अब तक उनकी नवीन पदस्थापना नहीं की गई है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश दिया है कि कोरोना से जंग लड़ रहे मेडिकल स्टाफ (कोरोना वॉरियर्स ) की समस्याओं को महज दो घंटे में हल किया जाए।

मरीजों की सेवा करना चाहते हैं चिकित्सक

कोरोना महामारी के दौरान एक ओर जहां देशभर के चिकित्सक व अन्य कर्मचारी दिन-रात मरीजों के उपचार में लगे हैं वहीं ये 40 कर्मचारी घर पर बैठें हैं। उनका कहना है कि वे भी इस आपदा के दौरान प्रदेश की सेवा करना चाहते हैं। मगर उनके हाथ बंधे हुए हैं। उनके द्वारा दिए गए संशोधन आवेदनों की सुनवाई आज-तक नहीं हो सकी है।

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क्या कहते हैं स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार

टीआरपी ने जब इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा करनी चाही तो पहले तो किसी ने कॉल रिसिव नहीं किया। जब जिम्मेदार अधिकारी से बात हुई तो वो भी इस मामले में टाल-मटोल करते नजर आए।

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