माकपा ने भी वीडियो जारी कर राज्य सरकार से मजदूरों को वापस लाने की मांग की

रायपुर। लॉकडाउन के चलते छत्तीसगढ़ के मजदूर कई राज्यों में फंसे हुए हैं। अब तेलंगाना में फंसे प्रदेश के मजदूरों ने वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री भूपेश बघेर व राज्य सरकार से घर वापसी की व्यवस्था करने की गुहार लगाई है।
वहीं कई मजदूर तेलंगाना से पैदल ही छत्तीसगढ़ के लिए निकल चुके हैं।

वहीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी वीडियो जारी कर छत्तीसगढ़ सरकार से तेलंगाना में फंसे करीब 1300 मजदूरों की वापसी के लिए व्यवस्था कराने की मांग की है। माकपा कहा है कि वहां ठेकेदारों द्वारा प्रदेश के मजदूरों से जबरन काम कराया जा रहा है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने तेलंगाना में फंसे हुए मजदूरों के वीडियो जारी किया है। वीडियो में मजदूर बता रहे हैं कि उनके परिवारों को ठेकेदारों ने बच्चों सहित बंधक बना लिया है और जबरदस्ती काम करवाया जा रहा है और वे किसी भी प्रकार की सरकारी मदद प्राप्त करने की स्थिति में नहीं है।

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एक अन्य वीडियो में मजदूर छत्तीसगढ़ के लिए पैदल मार्च करते हुए दिख रहे हैं और सरकार से उनकी वापसी की व्यवस्था करने की अपील कर रहे हैं। माकपा ने राज्य सरकार से अपील की है कि इन मजदूरों की घर वापसी के लिए विशेष प्रयत्न किए जाएं और राज्य सरकार तुरंत इन मजदूरों से संपर्क कर उन्हें आश्वस्त करें।

तेलंगाना के कई जिले में फंसे हैं प्रदेश के मजदूर

आज यहां जारी बयान में माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा कि माकपा ने तेलंगाना में फंसे 1300 मजदूरों को उनके नाम, पते और मोबाइल नंबरों के साथ सूचीबद्ध किया है। इनमें 89 बच्चे और 128 महिलाएं भी शामिल है।

ये मजदूर हैदराबाद, सिकंदराबाद, अनंतपुर, रंगारेड्डी, हिमायत नगर, गौलीडोडी, नागल रोड, तुर्कपल्ली, शिवराम पल्ली, सिद्धिपेट, निजमपेट, कोकापेट व अन्य जगहों में ऐसी स्थिति में फंसे हुए हैं कि सरकारी मशीनरी को ही इन मजदूरों तक पहुंचना होगा। पार्टी ने पूरी सूची नोडल अधिकारी पी अंबलगन को प्रेषित की है, लेकिन अभी तक कोई पहल कदमी किए जाने की जानकारी नहीं है।

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नोडल अधिकारियों के मोबाइल बंद होने का आरोप

उन्होंने कहा कि अंबलगन सहित अधिकांश नोडल अधिकारियों ने अपने मोबाइल नंबर बंद करके रखे हैं, इसलिए माकपा ने मांग की है कि इन नोडल अधिकारियों के साथ इस काम में लगे अन्य अधीनस्थ अधिकारियों के मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक किए जाए, ताकि जनता उनसे संपर्क कर सकें। माकपा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से अपील की है कि इन प्रवासी मजदूरों की समस्याओं के प्रति बयानबाजी से ऊपर उठकर संवेदनशीलता का परिचय दें।

प्रवासी मजदूरों की हालत खराब, भूखे प्यासे मरने पर मजबूर

माकपा नेता ने आरोप लगाया कि प्रवासी मजदूरों को उनके अपने हाल पर छोड़ दिया गया है और वे बच्चों और महिलाओं सहित भूखे प्यासे 15-15 दिनों तक हजारों किमी पैदल चलकर अपने गांवों तक पहुंच रहे हैं और इनमें से कई मरने के लिए अभिशप्त हैं। देश की जनता इतनी निर्मम और अमानवीय सरकारें आजादी के बाद पहली बार देख रही है।

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