रायपुर। World Tourism Day 2020 : छत्तीसगढ़ पर्यटन के लिए स्वर्ग है। छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक सौंदर्य बिखरा पड़ा है। कुछ अनदेखा भी है। हाल ही में भूमि विज्ञान विशेषज्ञ ने खनिज विभाग की टीम के साथ गरियाबंद में छह, कोंडागांव में एक शिक्षक तथा कारोबारी की मदद से नौ, कांकेर वनमंडल में वन विभाग के अधिकारियों ने 10 से ज्यादा नए वाटरफॉल की खोज की है।

गौरतलब है, पर्यटन को बढ़ावा देने हर वर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस ( World Tourism Day ) के रूप में मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ पर्यटन ( Tourism In Chhattisgarh ) के मामले में अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है। छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक स्थल को देखते हुए ऐसा कहा जा सकता है यहां पर्यटन की आपार संभावनाएं हैं। ज्यादातर लोग घने जंगलों के साथ प्राकृतिक झरनों, गुफाओं के बारे में जानना चाहते हैं। इस लिहाज से छत्तीसगढ़ में घने जंगलों के साथ अनगिनत वाटरफॉल हैं।

80 फीट की ऊंचाई से झरता सिंदूरीखोल

भू-विज्ञान विशेषज्ञ जीतेंद्र नक्का, माइनिंग इंस्पेक्टर मिदुल गुहा और उनकी टीम ने गरियाबंद तथा छुरा सीमा से सटे सिंदूरीखोल जलप्रपात एवं आमाखोल जलप्रपात की खोज की है। यह इलाका पूरी तरह जंगलों से घिरा हुआ है। झरनों की आवाज सुनकर सिंदूरीखोल जलप्रपात तक पहुंचा जा सकता है। जलप्रपात 80 फीट की ऊंचाई से गिर रहा है।

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केशकाल में झरने ही झरने

राज्य के बस्तर संभाग के कोंडागांव वनमंडल ( Chhattisgarh Tourism ) के केशकाल घाटी में हाल के दिनों में बहुतायत में प्राकृतिक झरनों की खोज की है। वन विभाग ने जहां दस झरनों की खोज की है। वहीं जीतेन्द्र नक्का ने स्थानीय शिक्षक टीकम सोरी, व्यवसायी राजा गोयल के साथ मिलकर नौ ऐसे जलप्रपात की खोज की है, जिनके बारे में स्थानीय लोग जानते हैं, लेकिन पर्यटकों को इसके बारे में जानकारी नहीं है। केशकाल में जीतेंद्र और उनकी टीम ने मिरदे, मुत्तेखड़का, लिंगदरहा, आमादरहा, उपरबेदी, चेरबेड़ा जलप्रपात, ग्राम चेरबेड़ा, हांखीकुडूम तथा होन्हेड जलप्रपात की खोज की है।

हाल ही में बेजराडीह में एक और झरने की खोज की है। बेजराडीह से बहने वाला एक स्थानीय नाला घने जंगलों से गुजरकर कई नालों के संपर्क में आकर ऊंचाई से गिरकर आकर्षक और रोमांचित करने वाले झरने के रूप में झरता है। इस झरने तक पहुंचने के लिए नाले में करीब आधा किलोमीटर उतरने के साथ आधा किलोमीटर चढ़ाई करनी पड़ती है।

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कुटूमसर की तरह गुफाएं कवर्धा में

नेशनल रिसर्च केव मिशन के डायरेक्टर डॉ. जयंत विश्वास की टीम ने छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में कई गुफाओं की खोज की है। डॉ. विश्वास की टीम ने कवर्धा स्थित देवसरा तथा मंडीखोल में कई गुफाएं ढूंढ निकाली हैं। डॉ. विश्वास के मुताबिक इनमें से एक गुफा कुटूमसर की गुफा की तरह है। इसी तरह इनकी टीम ने कांगेर वैली में कई गुफाओं की खोज की है, जिसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

इको तथा ट्राइबल टूरिज्म की अपार संभावनाएं

राकेश चतुर्वेदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक का कहना है कि राज्य में इको तथा ट्राइबल टूरिज्म की अपार संभावनाएं है। वन विभाग के साथ पर्यटन विभाग ऐसी जगहों को चिन्हित कर रहा है, जिसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

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