टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्यों में से एक है। राज्य की लगभग 80 फीसदी आबादी कृषि या उससे जुड़े गतिविधियों से संबध रखती है। ऐसे में कृषि विभाग का जिम्मा एक भ्रष्ट अधिकारी को दे दिया जाता है। सूत्रों के अनुसार इनकी शह पर विभाग में कोरोड़ों की हेराफेरी हो रही है। बावजूद इसके कृषि अधिकारी का दबदबा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इनकी मौजूदगी में विभाग में लगभग 15 करोड़ के घोटाले सामने आएं हैं। टीआरपी ने ही इन मामलों का समय-समय पर खुलासा भी किया है। इसके बाद भी घोटालों में लिप्त कंपनी के खिलाफ किसी प्रकार की कोई कार्रवाई आज तक नहीं की गई है।

एक अफसर सब पर भारी, बाकी के हाथ जिम्मेदारी में खाली

ऐसा नहीं है कि कृषि विभाग में केवल एक ही अधिकारी है जिनके कांधों पर इसकी जिम्मेदारी है। इनके नीचे 5 अतिरिक्त संचालक हैं मगर वे महज नाम के ही अधिकारी है। अगर कई अफसरों में प्रभार बंटा होगा तो भ्रष्टाचार पर लगाम लग सकती है।

कृषि विभाग के अफसर, जिनको भी दिया जा सकता है प्रभार

  1. एसी पैकरा
  2. डॉ एस आर रात्रे
  3. एस ई पदम
  4. एबी आसना
  5. जी के निर्माम
  6. —(रिक्त)—-
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ऐसा है अपर संचालक (कृषि) केरकेट्टा का इतिहास

अपर संचालक कृषि एम एस केरकेट्टा के ऊपर अम्बिकापुर डीडीए रहते लाखों रूपये एडवांस ले चुके हैं। जिसका कोई हिसाब किताब नहीं विभाग को मिल पा रहा है। इस सन्दर्भ में तत्कालीन अपर संचिव वित्त विभाग सतीश पाण्डेय ने आडिट रिपोर्ट में तत्कालीन संचालक कृषि पी आर कृदत्त और शासन को अपनी आडिट रिपोर्ट भेज चुके हैं। मगर उनकी सेवानिवृत्ती इसी वर्ष होनी है इस आधार पर 17 करोड़ के सी बीड जेल मामले में क्लीन चिट दी जा चुकी है। इस सावल पर कृषि मंत्री भी टीआरपी से कुछ भी कहने से हिचिकचाते हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठना लाजमी है कि ऐसे भ्रष्ट अपर संचालक कृषि एम एस केरकेट्टा को सरकार क्या संविदा नियुक्ति देंगी और सेवानिवृत्त के बाद क्या मिश्रा की रिपोर्ट पर रिकवरी विभाग या शासन कर सकेंगी।

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कृषि विभाग में संविदा नियुक्ति के लिए कर रहे कसरत ?

छत्तीसगढ़ राज्य कृषि संचालनालय में पदस्थ अपर संचालक कृषि एम एस केरकेट्टा जनवरी 2021 में सेवानिवृत्ति होने वाले हैं और उनकी मंशा भी है कि राज्य सरकार उन्हें कृषि विभाग में संविदा नियुक्ति दे। इसके लिए केरकेट्टा पूरी तैयारी कर चुके हैं। कृषि विभाग में चर्चा है कि उनकी संविदा में नियुक्ति सुनिश्चित हैं। दरअसल अपर संचालक कृषि एम एस केरकेट्टा बड़े लोगों से सांठ-गांठ अपनी नियुक्ति बचाने में लगे हैं। उनके इर्द-गिर्द बैठे लोग भी अपर संचालक कृषि एम एस केरकेट्टा का इस भ्रष्टाचार में पूरा सहयोग दे रहे हैं। देखना यह है कि क्या कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे या नहीं।

ये है बड़ा सवाल

भंडार क्रय नियम की अवहेलना कर विधान सभा प्रश्न क्रमांक 1989 फरवरी 2018 में दोषी पाए गए मुख्य अपचारी अधिकारी अपर संचालक कृषि एम. एस. केरकेट्टा को तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त केडीपी राव द्वारा जारी कारण बताओ सूचना पत्र में बजाय एम. एस. केरकेट्टा को सिविल सेवा वर्गीकरण नियम के दण्डित करने के वर्तमान कृषि उत्पादन आयुक्त एम. गीता द्वारा अपने से वरिष्ठतम अधिकारी के विनिश्चय के विरुद्ध किस आधार पर और क्यों एम. एस. केरकेट्टा द्वारा व्यक्तिगत रूप से जवाब न देकर संचालक कृषि की हैसियत से प्रस्तुत जवाब को मान्य कर प्रकरण नस्तीबद्ध कर क्लीन चिट दी गयी यह तथ्य समझ से ही परे है।

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इसके अलावा फरवरी 2019 में आयोजित विधानसभा के दौरान सवाल क्रमां 1269 के जवाब में कृषि मंत्री ने सदन में एफआईआर करवाने का आश्वासन भी दिया था। उस आश्वासन का क्या हुआ यह भी एक बड़ा सवाल है।

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