रायपुर। पिछले पंद्रह दिनों से जो घटनाक्रम बयानबाजी विशेषकर भाजपा नेताओं की चल रही है उससे एक बात स्पष्ट हो गयी कि भारतीय जनता पार्टी के छत्तीसगढ़ के नेता राज्य की धान खरीदी को बाधित करने का षड्यंत्र रच रहें हैं। छत्तीसगढ़ से 60 लाख मैट्रिक टन चावल लेने का कमिटमेंट कर 24 लाख मैट्रिक टन चावल लेने की अनुमति प्रदान करना है मोदी भाजपा के किसान विरोधी कृत्य है। सोमवार को पत्रकारवार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने ये बातें कही।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के द्वारा एफसीआई से चावल जमा करने के अनुरोध पर राजीव गांधी किसान न्याय योजना में किसानों को बोनस तो नही दे रहे? यह सवाल केंद्रीय खाद्य मंत्री क्यों पूछ रहे? जबकि राज्य सरकार ने साफ कर दिया था कि यह किसानों की सहायता राशि है न कि धान का बोनस। धान खरीदी प्रतिक्विंटल में होती है। न्याय योजना की सहायता प्रति एकड़ में दी जा रही।

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भाजपा की प्रदेश प्रभारी पुरंदेश्वरी गलत बयान दे रही

भाजपा की प्रदेश प्रभारी पुरंदेश्वरी गलत बयान दे रही कि केंद्र ने धान खरीदी के लिए 9000 करोड़ का अग्रिम भुगतान किया है। केंद्र ने कोई अग्रिम भुगतान नही किया राज्य सरकार धान खरीदी मार्कफेड के माध्यम से करती है मार्क फेड विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेती है जिसका ब्याज सहित वापसी मार्क फेड करता है। इस वर्ष भी 16,000 करोड़ ऋण लेने की योजना है। 9500 करोड़ का लोन मार्कफेड ने एनसीडीबी (नेशनल कोऑपरेटिव डेवलेप मेन्ट कॉर्पोरेशन) से लिया जिसका ब्याज राज्य सरकार मार्कफेड करेगा। इसमे केंद्र का एक रु का न अनुदान है और न सहायता ।

प्रति एकड़ 25 क्विंटल धान खरीदी के अनुपात में चावल लेने की अनुमति दें

पूर्व की रमन सरकार ने 15 साल में 50 लाख मैट्रिक टन से अधिक की धान की खरीदी नहीं की। किसानों से किए वादे को रमन सिंह ने पूरा नहीं किया किसानों को धान की कीमत ₹2100 प्रति क्विंटल और 300 बोनस देने का वादा किया गया था। भाजपा प्रभारी पुरंदेश्वरी जी को छत्तीसगढ़ के किसानों की भला चाहती हैं आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की विचार रखती है तो भाजपा के 9 सांसदों दो राज्यसभा सदस्य एवं भाजपा के 14 विधायकों को लेकर दिल्ली जाएं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छत्तीसगढ़ के किसानों से प्रति एकड़ 25 क्विंटल धान खरीदी के अनुपात में चावल लेने की अनुमति लेकर आए। मोदी सरकार ने भी किसानों को स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश के अनुसार लागत मूल्य का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने का वादा किया था सस्ते दरों पर डीजल एवं रासायनिक खादों की उपलब्धता की वचन दिया था किसानों की आय दोगुनी का सपना दिखाया है जो अब तक पूरा नहीं हुआ है।

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