टीआरपी डेस्क। सबके दिलों पर राज करने वाली टू मिनट नूडल्स ( Two minute noodles ) या झटपट मैगी ( Maggi ) को सब जानते हैं। हॉस्टलर्स का पसंदीदा फूड… जिसमें टेस्टमेकर का वो चमकीले पैकेट निकलता है। टेस्‍टी और हेल्‍दी भी टैगलाइन वाली, जिसकी खुशबू से ही मुंह में पानी सा आने लगता है.. हां वो ही मैगी जिसे भारत आए आज 37 साल हो गए हैं। मगर क्या आपने सोचा है कि कभी भी दो मिनट में नहीं पकने वाली मैगी का जन्म कैसे हुआ? किसने इसे ये नाम दिया? क्यों बार-बार तमाम विवादों के बाद भी बैन क्यों नहीं हुई? आइये जानते हैं मैगी के पीछे की पूरी कहानी..

‘टेस्‍टी और हेल्‍दी’ ( Tasty and Healthy ) के पंच लाइन के साथ आज लोगों की जुबां पर चढ़ी मैगी की एंट्री भारतीय बाजार में साल 1983 हुई। इसे नेस्‍ले इंडिया लिमिटेड ( Nestle India Limited ) ने लॉन्च किया था। मिनटों में बनने वाली मैगी सभी को पसंद आई और लॉन्चिग के कुछ वर्षों के बाद ही इसके मसाले, चिकन और टमाटर जैसे वेरिएंट बाजार में आ गए, जिन्हें खूब पसंद किया गया।

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कैसे पड़ा मैगी का नाम

साल 1884 में स्विट्जरलैंड का एक शख्स ने आटे से बने प्रोडक्ट को बेचना शुरू किया, लेकिन उसका ये बिजनेस चला नहीं। इसके बाद उसने बेचने वाले काम को छोड़, बनाने के काम हाथ आजमाना तय किया। अपने प्रोडक्ट कोल बनाने से पहले उसने तय किया कि कुछ ऐसा बनाया जाए जो जल्दी से पक जाए। उसका बनाया प्रोडक्ट बाजार में चल गया और तब उसने प्रोडक्ट का नाम अपने सरनेम पर रख दिया। उस शख्स का नाम जूलियस माइकल जोहानस मैगी ( Julius Michael Johannes Maggi ) था और प्रोडक्ट को तो आप पहचानते ही हैं।

मैगी से पहले मैगी सूप की हुई थी खोज

शुरुआत में जूलियस ने प्रोटीन से भरपूर खाना और रेडीमेड सूप बनाया। इस काम में उनके फिजिशियन दोस्त फ्रिडोलिन शूलर ने उनकी काफी मदद की। लेकिन दो मिनट में बनने वाली मैगी को लोगों ने खूब पसंद किया। साल 1897 में सबसे पहले जर्मनी में मैगी नूडल्स पेश किया गया था।

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नेस्ले ने खरीदा और हर घर तक पहुंची मैगी

साल 1912 तक मैगी ने अमेरिका और फ्रांस जैसे कई देशों के लोगों ने इसे हाथों हाथ लिया। मगर इसी साल जूलियस मैगी का निधन हो गया। उनकी मौत का असर मैगी पर भी पड़ा और लंबे समय तक इसका कारोबार धीरे-धीरे चलता रहा। फिर 1947 में नेस्ले ने मैगी को खरीद लिया और उसकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग ने मैगी को हर घर के किचन में पहुंचा दिया।

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